कहानी मुनिवर की, कहानी गुरुवर की

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कहानी मुनिवर की


तर्ज-भगत माँ (दीवाना गुरुवर का)........

1st Pattacharya Shri Veer Sagar Ji Maharaj.jpg


कहानी मुनिवर की, कहानी गुरुवर की,
रोमांचक है महान-कहानी मुनिवर की।।
वीरसिन्धु गुरुवर थे मानो, वीरप्रभू के समान.......कहानी.....।।टेक.।।

श्री आचार्य शान्तिसागर के पट्टाचार्य बने थे।
आगम एवं गुरु आज्ञा का पालन वे करते थे।।
चउविध संघ का संचालन करते थे पिता समान.....कहानी.....।।१।।

एक बार इक फोड़ा भयंकर उनकी पीठ में निकला।
असहनीय पीड़ाकारी डॉक्टर भी देख के पिघला।।
बिन बेहोशी आप्रेशन के देख थे सब हैरान......कहानी.......।।२।।

समयसार का भेदज्ञान इनमें साकार हुआ था।
पुद्गल काया भिन्न है मुझसे यह आभास हुआ था।
तभी ‘‘चन्दनामती’’ इन्हें सब करते कोटि प्रणाम....कहानी....।।३।।