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धर्मनाथ

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श्री धर्मनाथ भगवान

धर्मनाथ

Name of the 15th Tirathankara (Jaina-Lord). वर्तमानकालीन 24 तीर्थंकरों में से 15 वें तीर्थंकरों का नाम, जिनका जनम रत्नपुरी (निकट अयोध्या, उ.प्र.) एवं मोक्ष सम्मेदशिखर जी से हुआ।
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जन्मभूमि - रत्नपुरी (जिला फैजाबाद) उत्तर प्रदेश

पिता - महाराजा भानुराज

माता - महारानी सुप्रभा

वर्ण - क्षत्रिय

वंश - इक्ष्वाकु

देहवर्ण - तप्त स्वर्ण सदृश चिन्ह - वज्रदंड

आयु - दस लाख वर्ष

अवगाहना - एक सौ अस्सी हाथ

गर्भ - वैशाख शु. १३

जन्म - माघ शु. १३

तप - माघ शु. १३

दीक्षा-केवलज्ञान वन एवं वृक्ष -शालवन एवं सप्तपर्ण

प्रथम आहार - पाटलिपुत्र नगर के राजा धन्यषेण द्वारा (खीर)

केवलज्ञान - पौष शु. १५

मोक्ष - ज्येष्ठ शु. ४

मोक्षस्थल - सम्मेद शिखर पर्वत

समवसरण में गणधर - श्री अरिष्टसेन आदि ४३

समवसरण में मुनि - चौंसठ हजार

समवसरण में गणिनी - आर्यिका सुव्रता

समवसरण में आर्यिका - बासठ हजार चार सौ

समवसरण में श्रावक - दो लाख

समवसरण में श्राविका - चार लाख

जिनशासन यक्ष - किपुरुषदेव

जिनशासन यक्षी - मानसी देवी

भगवान धर्मनाथ वर्तमान वीर नि.सं. २५३४ से तीन सागर ६५,८६,५३४ वर्ष पहले मोक्ष गए हैं।