"नेमिनाथ पूजा" के अवतरणों में अंतर

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==<center><font color=#8B008B>'''''नेमिनाथ पूजा'''''</font color></center>==  
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==<center><poem><font color=#8B008B>'''''नेमिनाथ पूजा'''''</font></center>==
 
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<center><font color=#A0522D>'''छंद-लक्ष्मी तथा अर्द्धलक्ष्मीधरा'''''</font color></center>
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<center><font color=#A0522D>'''छंद-लक्ष्मी तथा अर्द्धलक्ष्मीधरा'''''</font></center>
 
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<center><font color=32CD32><poem>'''जैतिजै जैतिजै जैतिजै नेमकी, धर्म औतार दातार श्यौचैनकी।<br/>
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<center><font color=32CD32>'''जैतिजै जैतिजै जैतिजै नेमकी, धर्म औतार दातार श्यौचैनकी।
श्रीशिवानंद भौफंद निकन्द ध्यावै, जिन्हें इंद्र नागेन्द्र ओ मैनकी।।<br/>
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श्रीशिवानंद भौफंद निकन्द ध्यावै, जिन्हें इंद्र नागेन्द्र ओ मैनकी।।
पर्मकल्यान के देनहारे तुम्हीं, देव हो एव तातें करों ऐनकी।<br/>
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पर्मकल्यान के देनहारे तुम्हीं, देव हो एव तातें करों ऐनकी।
थापि हौ वार त्रै शुद्ध उच्चारत्रै, शुद्धताधार भौपारकूँ लेनकी।।<br/>
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थापि हौ वार त्रै शुद्ध उच्चारत्रै, शुद्धताधार भौपारकूँ लेनकी।।
<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्र! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनं।'''<br/>
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'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्र! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनं।'''
'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्र!अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।'''<br/>
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'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्र!अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।'''
  
  
<font color=32CD32>अष्टक (चाल होली, ताज जत्त)'''</font><br/>
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<font color=32CD32>अष्टक (चाल होली, ताज जत्त)'''
दाता मोक्षके, श्रीनेमिनाथ जिनराय, दाता मोक्ष के।।टेक।।<br/>
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दाता मोक्षके, श्रीनेमिनाथ जिनराय, दाता मोक्ष के।।टेक।।
निगम नदी कुश प्राशुक लीनौ, कंचन भृंग भराय।<br/>
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निगम नदी कुश प्राशुक लीनौ, कंचन भृंग भराय।
मनवचतनतें धार देते ही, सकल कलंक नशाय।<br/>
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मनवचतनतें धार देते ही, सकल कलंक नशाय।
दाता    मोक्षके,    श्रीनेमिनाथ    जिनराय।।दाता.।।१।।<br/>
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दाता    मोक्षके,    श्रीनेमिनाथ    जिनराय।।दाता.।।१।।</font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा।।'''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा।।'''</font>
  
<font color=32CD32>हरिचन्दनजुत कदलीनन्दन, कुंकुम सङ्ग घसाय।<br/>
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<font color=32CD32>हरिचन्दनजुत कदलीनन्दन, कुंकुम सङ्ग घसाय।
विघनताप नाशनके कारन, जजौं तिहारे पाय।।दाता.।।२।।<br/>
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विघनताप नाशनके कारन, जजौं तिहारे पाय।।दाता.।।२।।</font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय भवातापविनाशनाय चन्दनं निर्वपामीति स्वाहा।।'''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय भवातापविनाशनाय चन्दनं निर्वपामीति स्वाहा।।'''</font>
  
<font color=32CD32>पुण्यराशि तुमजस सम उज्जल, तंदुल शुद्ध मंगाय।<br/>
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<font color=32CD32>पुण्यराशि तुमजस सम उज्जल, तंदुल शुद्ध मंगाय।
अखय सौख्य भोगन के कारन, पुंज धरों गुनगाय।।दाता.।।३।।<br/>
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अखय सौख्य भोगन के कारन, पुंज धरों गुनगाय।।दाता.।।३।।</font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अक्षयपदप्राप्तये अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।।'''<br/>  
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अक्षयपदप्राप्तये अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।।''' </font>
  
<font color=32CD32>पुण्डरीक तृणद्रुमको आदिक, सुमन सुगंधितलाय।<br/>
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<font color=32CD32>पुण्डरीक तृणद्रुमको आदिक, सुमन सुगंधितलाय।
दर्पण मनमथभंजनकारन, जजहुँ चरन लवलाय।।दाता.।।४।।<br/>
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दर्पण मनमथभंजनकारन, जजहुँ चरन लवलाय।।दाता.।।४।।</font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय कामवाणविध्वंसनाय पुष्पं निर्वपामीति स्वाहा।।'''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय कामवाणविध्वंसनाय पुष्पं निर्वपामीति स्वाहा।।'''</font>
  
<font color=32CD32>घेवर बावर खाजे साजे, ताजे तुरत मँगाय।<br/>
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<font color=32CD32>घेवर बावर खाजे साजे, ताजे तुरत मँगाय।</font>
क्षुधावेदनी नास करनको, जजहुँ चरन उमगाय।।दाता.।।५।।<br/>
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क्षुधावेदनी नास करनको, जजहुँ चरन उमगाय।।दाता.।।५।।
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय क्षुधारोगविनाशनाय नैवेद्यं निर्वपामीति स्वाहा'''।।<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय क्षुधारोगविनाशनाय नैवेद्यं निर्वपामीति स्वाहा'''।। </font>
  
<font color=32CD32>कनक दीप नवनीत पूरकर, उज्ज्वल जोति जगाय।<br/>
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<font color=32CD32>कनक दीप नवनीत पूरकर, उज्ज्वल जोति जगाय।
तिमिरमोहनाशक तुमकों लखि, जजहुँ चरन हुलसाय।।दाता.।।६।।<br/>
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तिमिरमोहनाशक तुमकों लखि, जजहुँ चरन हुलसाय।।दाता.।।६।। </font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय मोहान्धकारविनाशनाय दीपं निर्वपामीति स्वाहा।।'''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय मोहान्धकारविनाशनाय दीपं निर्वपामीति स्वाहा।।''' </font>
  
<font color=32CD32>दशविध गंध मँगाय मनोहर, गुंजत अलिगन आय।<br/>
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<font color=32CD32>दशविध गंध मँगाय मनोहर, गुंजत अलिगन आय।
दशों बंध जारन के कारन, खेवों तुमढिग लाय।।दाता.।।७।।<br/>
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दशों बंध जारन के कारन, खेवों तुमढिग लाय।।दाता.।।७।। </font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अष्टकर्मदहनाय धूपं निर्वपामीति स्वाहा।।'''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अष्टकर्मदहनाय धूपं निर्वपामीति स्वाहा।।''' </font>
  
<font color=32CD32>सुरस वरन रसना मनभावन, पावन फल सु मंगाय।<br/>
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<font color=32CD32>सुरस वरन रसना मनभावन, पावन फल सु मंगाय।
मोक्षमहाफल कारन पूजों, हे जिनवर तुमपाय।।दाता.।।८।।<br/>
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मोक्षमहाफल कारन पूजों, हे जिनवर तुमपाय।।दाता.।।८।। </font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय मोक्षफलप्राप्तये फलं निर्वपामीति स्वाहा।।'''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय मोक्षफलप्राप्तये फलं निर्वपामीति स्वाहा।।'''</font>
 
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<font color=32CD32>जलफलआदि साज शुचि लीने, आठों दरब मिलाय।<br/>
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<font color=32CD32>जलफलआदि साज शुचि लीने, आठों दरब मिलाय।
अष्टम छितिके राज करनको, जजों अंग वसु नाय।।<br/>
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अष्टम छितिके राज करनको, जजों अंग वसु नाय।।
दाता मोक्षके, श्रीनेमिनाथ जिनराय, दाता मोक्ष के।।९।।<br/>
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दाता मोक्षके, श्रीनेमिनाथ जिनराय, दाता मोक्ष के।।९।। </font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय  अनघ्र्यपदप्राप्तये अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।।'''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय  अनघ्र्यपदप्राप्तये अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।।''' </font>
  
<font color="blue">'''पंचकल्याणक के अर्घ'''<br/>
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<font color="blue">'''पंचकल्याणक के अर्घ''' </font>
<font color=#A0522D>'''-पाइता छंद-'''</font><br/>
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<font color=#A0522D>'''-पाइता छंद-'''</font>
<font color=32CD32>सित कातिक छट्ठ अमंदा। गरभागम आनंदकन्दा।<br/>
+
<font color=32CD32>सित कातिक छट्ठ अमंदा। गरभागम आनंदकन्दा।
शचि सेय सिवापद आई। हम पूजत मनवचकाई।।१।।<br/>
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शचि सेय सिवापद आई। हम पूजत मनवचकाई।।१।। </font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं कार्तिकशुक्लषष्ठ्यां गर्भमंगलप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।'''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं कार्तिकशुक्लषष्ठ्यां गर्भमंगलप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।''' </font>
  
<font color=32CD32>सित सावन छट्ठ अमन्दा। जनमें त्रिभुवन के चंदा।<br/>
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<font color=32CD32>सित सावन छट्ठ अमन्दा। जनमें त्रिभुवन के चंदा।
पितु समुद महासुख पायो। हम पूजत विघन नशायो।।२।।<br/>
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पितु समुद महासुख पायो। हम पूजत विघन नशायो।।२।। </font>
<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रावणशुक्लषष्ठ्यां जन्ममंगलप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।'''<br/>
+
<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रावणशुक्लषष्ठ्यां जन्ममंगलप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।''' </font>
  
<font color=32CD32>तजि राजमती व्रत लीनों। सित सावन छट्ठ प्रवीनों।<br/>
+
<font color=32CD32>तजि राजमती व्रत लीनों। सित सावन छट्ठ प्रवीनों।
शिवनारि  तबै  हरषाई।  हम  पूजैं  पद  शिरनाई।।३।।<br/>
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शिवनारि  तबै  हरषाई।  हम  पूजैं  पद  शिरनाई।।३।। </font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रावणशुक्लषष्ठ्यां तप:कल्याणकप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।''''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रावणशुक्लषष्ठ्यां तप:कल्याणकप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।'''' </font>
  
<font color=32CD32>सित आश्विन एकम चूरे। चारों घाती अति वूâरे।<br/>
+
<font color=32CD32>सित आश्विन एकम चूरे। चारों घाती अति वूâरे।
लहि केवल महिमा सारा। हम पूजें पद अष्टप्रकारा।।४।।<br/>
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लहि केवल महिमा सारा। हम पूजें पद अष्टप्रकारा।।४।। </font>
<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं आश्विनशुक्लप्रतिपदायां केवलज्ञानप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।'''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं आश्विनशुक्लप्रतिपदायां केवलज्ञानप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।''' </font>
  
<font color=32CD32>सितषाढ़  अष्टमी  चूरे।  चारों  अघातिया  वूâरे।<br/>
+
<font color=32CD32>सितषाढ़  अष्टमी  चूरे।  चारों  अघातिया  वूâरे।
शिव  उज्र्जयन्ततें  पाई।  हम  पूजैं  ध्यान  लगाई।।५।।<br/>
+
शिव  उज्र्जयन्ततें  पाई।  हम  पूजैं  ध्यान  लगाई।।५।। </font>
 
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं आषाढ़शुक्लाष्टम्यां मोक्षमंगलप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।'''<br/>
+
<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं आषाढ़शुक्लाष्टम्यां मोक्षमंगलप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।'''
  
<font color="blue">'''जयमाला'''<br/>
+
<font color="blue">'''जयमाला''' </font>
<font color=#A0522D>'''-दोहा-'''</font><br/>
+
<font color=#A0522D>'''-दोहा-'''</font>
<font color=32CD32>श्याम छवी तन चाप दश, उन्नत गुननिधिधाम।<br/>
+
<font color=32CD32>श्याम छवी तन चाप दश, उन्नत गुननिधिधाम।
शंख चिन्हपद में निरखि, पुनि पुनि करों प्रनाम।।१।<br/>
+
शंख चिन्हपद में निरखि, पुनि पुनि करों प्रनाम।।१। </font>
  
<font color=#A0522D>'''-पद्धरी छंद (१६ मात्रा लघ्वन्त)-'''</font><br/>
+
<font color=#A0522D>'''-पद्धरी छंद (१६ मात्रा लघ्वन्त)-'''</font>
  
<font color=32CD32>जै जै जै नेमि जिनिन्द चंद। पितु समुद देन आनंदकन्द।<br/>
+
<font color=32CD32>जै जै जै नेमि जिनिन्द चंद। पितु समुद देन आनंदकन्द।
शिवमात कुमुदमनमोददाय। भविवृन्द चकोर सुखी कराय।।२।।<br/>
+
शिवमात कुमुदमनमोददाय। भविवृन्द चकोर सुखी कराय।।२।।
जयदेव अपूरव मारतंड। तम कीन ब्रह्मसुत सहस खंड।<br/>
+
जयदेव अपूरव मारतंड। तम कीन ब्रह्मसुत सहस खंड।  
शिवतियमुखजलजविकाशनेश। नहिं रहो सृष्टि में तम अशेष।।३।।<br/>
+
शिवतियमुखजलजविकाशनेश। नहिं रहो सृष्टि में तम अशेष।।३।।
भविभीत कोक कीनों अशोक। शिवगम दरशायो शर्मथोक।<br/>
+
भविभीत कोक कीनों अशोक। शिवगम दरशायो शर्मथोक।
जै जै जै जै तुम गुनगंभीर। तुम आगम निपुन पुनीत धीर।।४।।<br/>
+
जै जै जै जै तुम गुनगंभीर। तुम आगम निपुन पुनीत धीर।।४।।
तुम केवल जोति विराजमान। जै जै जै जै करुना निधान।<br/>
+
तुम केवल जोति विराजमान। जै जै जै जै करुना निधान।
तुम समवसरन में तत्त्वभेद। दरशायो जाते नशत खेद।।५।।<br/>
+
तुम समवसरन में तत्त्वभेद। दरशायो जाते नशत खेद।।५।।
तित तमुकों हरि आनंदधार। पूजत भगतीजुत बहु प्रकार।<br/>
+
तित तमुकों हरि आनंदधार। पूजत भगतीजुत बहु प्रकार।
पुनि गद्यपद्यमय सुजस गाय। जै बल अनंत गुनवंतराय।।६।।<br/>
+
पुनि गद्यपद्यमय सुजस गाय। जै बल अनंत गुनवंतराय।।६।।
जय शिवशंकर ब्रह्मा महेश। जय बुद्ध विधाता विष्णुवेष।<br/>
+
जय शिवशंकर ब्रह्मा महेश। जय बुद्ध विधाता विष्णुवेष।
जय कुमति मतंगनको मृगेन्द्र। जय मदनध्वांतकों रविजिनेन्द्र।।७।।<br/>
+
जय कुमति मतंगनको मृगेन्द्र। जय मदनध्वांतकों रविजिनेन्द्र।।७।।
जय कृपासिंधु अविरुद्ध बुद्ध। जय रिद्धसिद्ध दाता प्रबुद्ध।<br/>
+
जय कृपासिंधु अविरुद्ध बुद्ध। जय रिद्धसिद्ध दाता प्रबुद्ध।
जय जगजनमन रंजन महान। जय भवसागरमहं सुष्टुयान।।८।।<br/>
+
जय जगजनमन रंजन महान। जय भवसागरमहं सुष्टुयान।।८।।
तुव भगतिकरें ते धन्य जीव। ते पावैं दिव शिवपद सदीव।<br/>
+
तुव भगतिकरें ते धन्य जीव। ते पावैं दिव शिवपद सदीव।
तुमरो गुनदेव विविध प्रकार। गावत नित किन्नरकी जु नार।।९।।<br/>
+
तुमरो गुनदेव विविध प्रकार। गावत नित किन्नरकी जु नार।।९।।
वर भगतिमाहिं लवलीन होय। नाचैं ता थेइ थेइ थेइ बहोय।<br/>
+
वर भगतिमाहिं लवलीन होय। नाचैं ता थेइ थेइ थेइ बहोय।
तुम करुणासागर सृष्टिपाल। अब मोकों बेगि करों निहाल।।१०।।<br/>
+
तुम करुणासागर सृष्टिपाल। अब मोकों बेगि करों निहाल।।१०।।
 
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मैं दुख अनंत वसुकरमजोग। भोगे सदीव नहिं और रोग।<br/>
+
मैं दुख अनंत वसुकरमजोग। भोगे सदीव नहिं और रोग।
तुमको जगमें जान्यों दयाल। हो वीतराग गुनरतनमाल।।११।।<br/>
+
तुमको जगमें जान्यों दयाल। हो वीतराग गुनरतनमाल।।११।।
तातें शरना अब गही आय। प्रभु करो वेगि मेरी सहाय।<br/>
+
तातें शरना अब गही आय। प्रभु करो वेगि मेरी सहाय।
यह विघनकरम मम खंडखंड। मनवांछितकारज मंडमंड।।१२।।<br/>
+
यह विघनकरम मम खंडखंड। मनवांछितकारज मंडमंड।।१२।।
संसारकष्ट  चकचूर  चूर। सहजानंद  मम  उर  पूर  पूर।<br/>
+
संसारकष्ट  चकचूर  चूर। सहजानंद  मम  उर  पूर  पूर।
निजपर प्रकाशबुधि देई देई। तजिके बिलंब सुधि लेई लेई।।१३।।<br/>
+
निजपर प्रकाशबुधि देई देई। तजिके बिलंब सुधि लेई लेई।।१३।।
हम जांचत हैं यह बार बार। भवसागरतें मो तार तार।<br/>
+
हम जांचत हैं यह बार बार। भवसागरतें मो तार तार।
नहिं सह्यो जात यह जगत दु:ख। तातैं विनवों हे सुगुनमुक्ख।।१४।।<br/>
+
नहिं सह्यो जात यह जगत दु:ख। तातैं विनवों हे सुगुनमुक्ख।।१४।। </font>
  
<font color="blue">'''-घत्तानंद-'''</font><br/>
+
<font color="blue">'''-घत्तानंद-'''</font>
<font color=32CD32>श्रीनेमिकुमारं, जितमदमारं, शीलागारं सुखकारं।<br/>
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<font color=32CD32>श्रीनेमिकुमारं, जितमदमारं, शीलागारं सुखकारं।
भवभयहरतारं, शिवकरतारं, दातारं धर्माधारं।।१५।।<br/>
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भवभयहरतारं, शिवकरतारं, दातारं धर्माधारं।।१५।। </font>
<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय महार्घं निर्वपामीति स्वाहा।'''<br/>
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<font color=#2E8B57>'''ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय महार्घं निर्वपामीति स्वाहा।''' </font>
  
  
<font color=#A0522D>'''-मालिनी (१५ वर्ण)-'''</font><br/>
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<font color=#A0522D>'''-मालिनी (१५ वर्ण)-'''</font>
<font color=32CD32>सुखधनजससिद्धी  पुत्रपौत्रादि  वृद्धी।<br/>
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<font color=32CD32>सुखधनजससिद्धी  पुत्रपौत्रादि  वृद्धी।
सकल मनसि सिद्धी होतु है ताहि रिद्धी।।<br/>
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सकल मनसि सिद्धी होतु है ताहि रिद्धी।।
जजत हरषधारी नेमि को जो अगारी।<br/>
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जजत हरषधारी नेमि को जो अगारी।
अनुक्रम  अरिजारी  सो  वरे  मोच्छनारी।।१६।।<br/>
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अनुक्रम  अरिजारी  सो  वरे  मोच्छनारी।।१६।। </font>
 
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<font color=#A0522D>'''।। इत्याशीर्वाद:। पुष्पाजंलिं क्षिपेत्।।
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<font color=#A0522D>'''।। इत्याशीर्वाद:। पुष्पाजंलिं क्षिपेत्।। </font> </poem>

१६:०३, २ जुलाई २०२० का अवतरण

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नेमिनाथ पूजा</center>==

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छंद-लक्ष्मी तथा अर्द्धलक्ष्मीधरा

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जैतिजै जैतिजै जैतिजै नेमकी, धर्म औतार दातार श्यौचैनकी।

श्रीशिवानंद भौफंद निकन्द ध्यावै, जिन्हें इंद्र नागेन्द्र ओ मैनकी।।
पर्मकल्यान के देनहारे तुम्हीं, देव हो एव तातें करों ऐनकी।
थापि हौ वार त्रै शुद्ध उच्चारत्रै, शुद्धताधार भौपारकूँ लेनकी।।
ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्र! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनं।
ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्र!अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।


अष्टक (चाल होली, ताज जत्त)
दाता मोक्षके, श्रीनेमिनाथ जिनराय, दाता मोक्ष के।।टेक।।
निगम नदी कुश प्राशुक लीनौ, कंचन भृंग भराय।
मनवचतनतें धार देते ही, सकल कलंक नशाय।
दाता मोक्षके, श्रीनेमिनाथ जिनराय।।दाता.।।१।।

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ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा।।

हरिचन्दनजुत कदलीनन्दन, कुंकुम सङ्ग घसाय।
विघनताप नाशनके कारन, जजौं तिहारे पाय।।दाता.।।२।।

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ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय भवातापविनाशनाय चन्दनं निर्वपामीति स्वाहा।।

पुण्यराशि तुमजस सम उज्जल, तंदुल शुद्ध मंगाय।
अखय सौख्य भोगन के कारन, पुंज धरों गुनगाय।।दाता.।।३।।

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ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अक्षयपदप्राप्तये अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।।

पुण्डरीक तृणद्रुमको आदिक, सुमन सुगंधितलाय।
दर्पण मनमथभंजनकारन, जजहुँ चरन लवलाय।।दाता.।।४।।

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ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय कामवाणविध्वंसनाय पुष्पं निर्वपामीति स्वाहा।।

घेवर बावर खाजे साजे, ताजे तुरत मँगाय।
क्षुधावेदनी नास करनको, जजहुँ चरन उमगाय।।दाता.।।५।।

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ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय क्षुधारोगविनाशनाय नैवेद्यं निर्वपामीति स्वाहा।।

कनक दीप नवनीत पूरकर, उज्ज्वल जोति जगाय।
तिमिरमोहनाशक तुमकों लखि, जजहुँ चरन हुलसाय।।दाता.।।६।।

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ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय मोहान्धकारविनाशनाय दीपं निर्वपामीति स्वाहा।।

दशविध गंध मँगाय मनोहर, गुंजत अलिगन आय।
दशों बंध जारन के कारन, खेवों तुमढिग लाय।।दाता.।।७।।

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ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अष्टकर्मदहनाय धूपं निर्वपामीति स्वाहा।।

सुरस वरन रसना मनभावन, पावन फल सु मंगाय।
मोक्षमहाफल कारन पूजों, हे जिनवर तुमपाय।।दाता.।।८।।

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ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय मोक्षफलप्राप्तये फलं निर्वपामीति स्वाहा।।
 
जलफलआदि साज शुचि लीने, आठों दरब मिलाय।
अष्टम छितिके राज करनको, जजों अंग वसु नाय।।
दाता मोक्षके, श्रीनेमिनाथ जिनराय, दाता मोक्ष के।।९।।

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ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अनघ्र्यपदप्राप्तये अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।।

पंचकल्याणक के अर्घ
-पाइता छंद-
सित कातिक छट्ठ अमंदा। गरभागम आनंदकन्दा।
शचि सेय सिवापद आई। हम पूजत मनवचकाई।।१।।

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ॐ ह्रीं कार्तिकशुक्लषष्ठ्यां गर्भमंगलप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।

सित सावन छट्ठ अमन्दा। जनमें त्रिभुवन के चंदा।
पितु समुद महासुख पायो। हम पूजत विघन नशायो।।२।।

ॐ ह्रीं श्रावणशुक्लषष्ठ्यां जन्ममंगलप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।

तजि राजमती व्रत लीनों। सित सावन छट्ठ प्रवीनों।
शिवनारि तबै हरषाई। हम पूजैं पद शिरनाई।।३।।

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ॐ ह्रीं श्रावणशुक्लषष्ठ्यां तप:कल्याणकप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।'

सित आश्विन एकम चूरे। चारों घाती अति वूâरे।
लहि केवल महिमा सारा। हम पूजें पद अष्टप्रकारा।।४।।

ॐ ह्रीं आश्विनशुक्लप्रतिपदायां केवलज्ञानप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।

सितषाढ़ अष्टमी चूरे। चारों अघातिया वूâरे।
शिव उज्र्जयन्ततें पाई। हम पूजैं ध्यान लगाई।।५।।

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ॐ ह्रीं आषाढ़शुक्लाष्टम्यां मोक्षमंगलप्राप्ताय श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय अर्घं निर्वपामीति स्वाहा।

जयमाला
-दोहा-
श्याम छवी तन चाप दश, उन्नत गुननिधिधाम।
शंख चिन्हपद में निरखि, पुनि पुनि करों प्रनाम।।१।


-पद्धरी छंद (१६ मात्रा लघ्वन्त)-

जै जै जै नेमि जिनिन्द चंद। पितु समुद देन आनंदकन्द।
शिवमात कुमुदमनमोददाय। भविवृन्द चकोर सुखी कराय।।२।।
जयदेव अपूरव मारतंड। तम कीन ब्रह्मसुत सहस खंड।
शिवतियमुखजलजविकाशनेश। नहिं रहो सृष्टि में तम अशेष।।३।।
भविभीत कोक कीनों अशोक। शिवगम दरशायो शर्मथोक।
जै जै जै जै तुम गुनगंभीर। तुम आगम निपुन पुनीत धीर।।४।।
तुम केवल जोति विराजमान। जै जै जै जै करुना निधान।
तुम समवसरन में तत्त्वभेद। दरशायो जाते नशत खेद।।५।।
तित तमुकों हरि आनंदधार। पूजत भगतीजुत बहु प्रकार।
पुनि गद्यपद्यमय सुजस गाय। जै बल अनंत गुनवंतराय।।६।।
जय शिवशंकर ब्रह्मा महेश। जय बुद्ध विधाता विष्णुवेष।
जय कुमति मतंगनको मृगेन्द्र। जय मदनध्वांतकों रविजिनेन्द्र।।७।।
जय कृपासिंधु अविरुद्ध बुद्ध। जय रिद्धसिद्ध दाता प्रबुद्ध।
जय जगजनमन रंजन महान। जय भवसागरमहं सुष्टुयान।।८।।
तुव भगतिकरें ते धन्य जीव। ते पावैं दिव शिवपद सदीव।
तुमरो गुनदेव विविध प्रकार। गावत नित किन्नरकी जु नार।।९।।
वर भगतिमाहिं लवलीन होय। नाचैं ता थेइ थेइ थेइ बहोय।
तुम करुणासागर सृष्टिपाल। अब मोकों बेगि करों निहाल।।१०।।

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मैं दुख अनंत वसुकरमजोग। भोगे सदीव नहिं और रोग।
तुमको जगमें जान्यों दयाल। हो वीतराग गुनरतनमाल।।११।।
तातें शरना अब गही आय। प्रभु करो वेगि मेरी सहाय।
यह विघनकरम मम खंडखंड। मनवांछितकारज मंडमंड।।१२।।
संसारकष्ट चकचूर चूर। सहजानंद मम उर पूर पूर।
निजपर प्रकाशबुधि देई देई। तजिके बिलंब सुधि लेई लेई।।१३।।
हम जांचत हैं यह बार बार। भवसागरतें मो तार तार।
नहिं सह्यो जात यह जगत दु:ख। तातैं विनवों हे सुगुनमुक्ख।।१४।।


-घत्तानंद-
श्रीनेमिकुमारं, जितमदमारं, शीलागारं सुखकारं।
भवभयहरतारं, शिवकरतारं, दातारं धर्माधारं।।१५।।

ॐ ह्रीं श्रीनेमिनाथजिनेन्द्राय महार्घं निर्वपामीति स्वाहा।


-मालिनी (१५ वर्ण)-
सुखधनजससिद्धी पुत्रपौत्रादि वृद्धी।
सकल मनसि सिद्धी होतु है ताहि रिद्धी।।
जजत हरषधारी नेमि को जो अगारी।
अनुक्रम अरिजारी सो वरे मोच्छनारी।।१६।।

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।। इत्याशीर्वाद:। पुष्पाजंलिं क्षिपेत्।।