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प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जीवन दर्शन संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत है-<br />
 
प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जीवन दर्शन संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत है-<br />
 
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१३:१९, २३ जुलाई २०१९ के समय का अवतरण

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प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जीवन दर्शन संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत है-

ऋषभदेव
प्रस्तुति-गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी

जन्मभूमि-अयोध्या (उत्तर प्रदेश)
पिता-महाराज नाभिराय माता-महारानी मरुदेवी वर्ण-क्षत्रिय
वंश-इक्ष्वाकु देहवर्ण-तप्त स्वर्ण सदृश चिन्ह-बैल
आयु-चौरासी लाख पूर्व वर्ष अवगाहना-दो हजार हाथ गर्भ-आषाढ़ कृ.२
जन्म-चैत्र कृ.९ तप-चैत्र कृ.९
दीक्षा-केवलज्ञान वन एवं वृक्ष-प्रयाग-सिद्धार्थवन, वट वृक्ष (अक्षयवट)
प्रथम आहार-हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस द्वारा (इक्षुरस)
केवलज्ञान-फाल्गुन कृ.११ मोक्ष-माघ कृ.१४ मोक्षस्थल-कैलाश पर्वत
समवसरण में गणधर-श्री वृषभसेन आदि ८४ मुनि- चौरासी हजार गणिनी-आर्यिका ब्राह्मी
आर्यिका-तीन लाख पचास हजार श्रावक-तीन लाख श्राविका-पांच लाख
जिनशासन यक्ष-गोमुख देव यक्षी-चक्रेश्वरी देवी
भगवान ऋषभदेव वर्तमान वीर नि.सं.२५३६ से ३९४९६ वर्ष कम, सौ लाख करोड़ सागर अर्थात् एक कोड़ाकोड़ी सागर वर्ष पहले मोक्ष गए हैं। इससे चौरासी लाख पूर्व वर्ष पहले जन्में हैं।