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०५:४६, ३ जुलाई २०१९ का अवतरण


जैन इनसाइक्लोपीडिया
जैन विश्वकोश
जैनधर्म के ज्ञान का महासागर


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रक्षा बंधन भजन
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ज्योतिष-वास्तु एवं मंत्र विद्या· जैन भूगोल· जैन इतिहास· श्रावक संस्कार· ग्रन्थ भण्डार

शिक्षाप्रद कथाएं


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और देखें...

Basic Knowledge of Jainism


चातुर्मास सूची 2020


चतुर्मास सूची 2020
आचार्य परमेष्ठि स्थान
आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज ससंघ रेवती रेंज, इंदौर (म.प्र.)
आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ससंघ बेलगांव (कर्णाटक)
आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ससंघ (दक्षिण) सतना (म.प्र.)
गणधराचार्य श्री कुंथु सागर जी महाराज ससंघ कुंथुगिरी (महाराष्ट्र)
गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ससंघ पुष्पगिरी तीर्थ, सोनकच्छ (म.प्र.)
गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज ससंघ भिण्ड (म.प्र.)
गणाचार्य श्री सिद्धांत सागर जी महाराज ससंघ बेला जी, दमोह (म.प्र.)
आचार्य श्री संभव सागर जी महाराज ससंघ त्रियोग आश्रम, श्री सम्मेद शिखर जी (झारखण्ड)
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दशलक्षण धर्म


दशलक्षण धर्म

यह भादों मास सभी महीनों, में राजा है उत्तम जग में।

यह धर्म हेतु है और अनेक, व्रत रत्नों का सागर सच में।।

यह महापर्व है दशलक्षण, दशधर्म मय मंगलकारी।

रत्नत्रय निधि को देता है, सोलहकारणमय सुखकारी।।

उत्तम क्षमा

सब कुछ अपराध सहन करके, भावों से पूर्ण क्षमा करिये।

यह उत्तम क्षमा जगन्माता, इसकी नितप्रति अर्चा करिये।।
कमठासुर ने भव भव में भी, उपसर्ग अनेकों बार किया।
पर पाश्र्वप्रभू ने सहन किया, शान्ति का ही उपचार किया।।१।।

क्या बैर से बैर मिटा सकते, क्या रज से रज धुल सकता है?
क्या क्रोध से भी शान्ति मिलती, क्या क्रोध सुखी कर सकता है?
यदि अपकारी पर क्रोध करो, तो क्रोध महा अपकारी है।
इस क्रोध पे क्रोध करो बंधु, यह शत्रु महा दुखकारी है।।२।।

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मेघमाला व्रत


मेघमाला व्रत विधि

मेघमाला व्रत भादों बदी प्रतिपदा से लेकर आश्विन वदी प्रतिपदा तक ३१ दिन तक किया जाता है। व्रत के प्रारंभ करने के दिन ही जिनालय के आँगन में सिंहासन स्थापित करें अथवा कलश को संस्कृत कर उसके ऊपर थाल रखकर, थाल में जिनबिम्ब स्थापित कर महाभिषेक और पूजन करे। श्वेत वस्त्र पहने, श्वेत ही चन्दोवा बांधे, मेघधारा के समान १००८ कलशों से भगवान का अभिषेक करे। पूजापाठ के पश्चात् ‘ॐ ह्रीं पंचपरमेष्ठिभ्यो नम:’ इस मंत्र का १०८ बार जाप करना चाहिए।

मेघमाला व्रत में सात उपवास कुल किये जाते हैं और २४ दिन एकाशन करना होता है। तीनों प्रतिपदाओं के तीन उपवास, दोनों अष्टमियों के दो उपवास एवं दोनों चतुर्दशियों के दो उपवास इस प्रकार कुल सात उपवास किये जाते हैं। इस व्रत को पाँच वर्ष तक पालन करने के पश्चात् उद्यापन कर दिया जाता है। इस व्रत की समाप्ति प्रतिवर्ष आश्विन कृष्णा प्रतिपदा को होती है। सोलहकारण का व्रत भी प्रतिपदा को समाप्त किया जाता है, परन्तु इतनी विशेषता है कि सोलहकारण का संयम और शील आश्विन कृष्णा प्रतिपदा तक पालन करना पड़ता है तथा पंचमी को ही इस व्रत की पूर्ण समाप्ति समझी जाती है। यद्यपि पूर्ण अभिषेक प्रतिपदा को ही हो जाता है, परन्तु नाममात्र के लिए पंचमी तक संयम का पालन करना पड़ता है।

मेघमाला व्रत कथा-वत्सदेश की कौशाम्बीपुरी में जब राजा भूपाल राज्य करते थे तब वहाँ पर एक वत्सराज नाम का श्रेष्ठी (सेठ) और उसकी पद्मश्री नाम की सेठानी रहती थी। पूर्वकृत अशुभ कर्म के उदय से उस सेठ के घर में दरिद्रता का वास रहा करता था इस पर भी इसके सोलह (१६) पुत्र और बारह (१२) कन्याएँ थीं।

व्रत विधि एवं कथा पढ़ें
इन्द्रध्वज विधान


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णमोकार भजन


तर्ज—तन डोले......

णमोकार बोलो, फिर आँख खोलो, सब कार्य सिद्ध हो जाएँगे,

नर जन्म सफल हो जाएगा।। टेक.।।

प्रात:काल उषा बेला में, बोलो मंगल वाणी।
हर घर में खुशियाँ छाएँगी, होगी नई दिवाली।। हे भाई......
प्रभु नाम बोलो, निजधाम खोलो, सब कार्य सिद्ध हो जाएँगे।
नर जन्म सफल हो जाएगा।। णमोकार ......।।१।।

परमब्रह्म परमेश्वर की, शक्ती यह मंत्र बताता।
णमोकार के उच्चारण से, अन्तर्मन जग जाता।। हे भाई......
नौ बार बोलो, सौ बार बोलो, सब कार्य सिद्ध हो जाएँगे,
नर जनम सफल हो जाएगा।। णमोकार ......।।२।।

ॐ शब्द का ध्यान ‘चंदना-मति’ मन स्वस्थ बनाता।
इसके ध्यान से मानव इक दिन, परमेष्ठी पद पाता।। हे भाई......
नौ बार बोलो, सौ बार बोलो, सब कार्य सिद्ध हो जाएँगे।
नर जनम सफल हो जाएगा।। णमोकार ......।।३।।

पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन


कुछ नए प्रजेंटेशन्स

सम्यग्ज्ञान पत्रिका


जम्बूद्वीप समाचार


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दशलक्षण धर्म पूजा


प्रबन्ध सम्पादक की कलम से


वर्षायोग २०२०

जैन संतों के चातुर्मास में आप के कर्तव्य-
जैन मुनि आर्यिका क्षुल्लक क्षुल्लिका आदि चतुर्विध संघ वर्षा ऋतु में एक जगह रहने का नियम कर लेते हैं। अन्यत्र बिहार नहीं करते हैं, इसलिए इसे वर्षायोग कहा है तथा श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक इन 4 महीने पर्यंत एक जगह रहना होता है। अतः इसे चातुर्मास भी कहते हैं।

जैसा कि सभी को विदित है कि देश की सर्वोच्च साध्वी गणिनी आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास हस्तिनापुर की पावन धरा पर चल रहा है। सभी का बहुत पुण्य है कि ऐसी साध्वी का आशीर्वाद हम सभी को पारस चैनल के माध्यम से प्रतिदिन प्रात: ६ बजे से ७ बजे तक प्राप्त होता है और दिन प्रतिदिन नए-नए महोत्सव भी होते रहते हैं।

अभी आष्टान्हिका पर्व में पूज्य माताजी के सानिध्य में इंद्रध्वज महामंडल विधान का आयोजन हुआ। श्रावण मास के शुक्लपक्ष सप्तमी को भगवान पार्श्वनाथ का मोक्षकल्याणक पूज्य माताजी की प्रेरणा से धूमधाम से मनाया जाएगा। सभी लोग अपने-अपने मंदिरों में निर्वाण लाडू चढ़ाएं और पुण्य अर्जन करें।

कुछ ही दिनों बाद रक्षाबंधन पर्व आने वाला है यह पर्व हस्तिनापुर की धरती से प्रारंभ हुआ। रक्षाबंधन के कुछ दिन पूर्व पूज्य माताजी की प्रमुख शिष्या प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी का दीक्षा दिवस श्रावण शुक्ला ग्यारस को आ रहा है। इसी धरा पर पूज्य माता जी ने पहली बार अपने केशोंं का लोचन किया था। सभी लोग पूज्य माताजी का दीक्षा दिवस धूमधाम से मनाएं।

इसके पश्चात भाद्रपद महीने में दशलक्षण पर्व के पावन अवसर पर अपने नगरों एवं शहरों में मंदिरों में विधान पूजा सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि का आयोजन करें। यह दश धर्म बहुत ही पवित्र और पावन होते हैं। सभी लोग खूब पूजा आहार आदि देकर अपने जीवन को सफल बनाएं। जहां-जहां भी साधु संत का चातुर्मास चल रहा है, प्रयास करके वहां जाकर साधु को आहार दान शास्त्रदान वैय्यावृत्ति आदि करके अपने पुण्य को जागृत करें और ऐसी धरती को नमन करें जहां पर शांतिनाथ - कुंथुनाथ - अरहनाथ भगवान के चार-चार कल्याणक हुए हैं एवं ऐसी सरस्वती स्वरूपा माता को नमन करें जिन्होंने देश को ही नहीं पूरे विश्व को अपने ज्ञान से सभी को अभिसिंचित कर रही हैं। ऐसी माता के चरणों में कोटिश: नमन करते हुए सभी के लिए मंगल कामना।

प्रबंध सम्पादिका (ब्र0 दीपा जैन)

रत्नत्रय पूजा


रत्नत्रय पूजा

[रत्नत्रय व्रत में]

-अथ स्थापना (गीता छंद)-

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वर रत्नत्रय जिनधर्म हैं, सम्यक्त्वरत्न प्रधान है।
अष्टांगयुत सम्यक्त्व है, सम्पूर्ण गुण की खान है।।
आचार आठ समेत सम्यग्ज्ञान रत्न महान है।
तेरह विधों युत रत्न सम्यक्-चरित पूज्य निधान है।।


-दोहा-


भरतैरावत क्षेत्र में, चौथे पाँचवें काल।
शाश्वत रहे विदेह में, धर्म जगत प्रतिपाल।।२।।


ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मक धर्म! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मक धर्म! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं।
ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मक धर्म! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।


-अष्टक-

चाल-नन्दीश्वर पूजा


रेवानदि को जल लाय, कंचन भृंग भरूँ।
त्रयधार करूँ सुखदाय, आतम शुद्ध करूँ।।
जिनधर्म विश्व का धर्म, सर्व सुखाकर है।
मैं जजूँ सार्वहित धर्म, गुण रत्नाकर है।।१।।

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ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मकधर्माय जलं निर्वपामीति स्वाहा।
पूरी पूजा पढ़ें

अक्षय_तृतीया


अक्षय तृतीया-आहार गीत

तर्ज-एक परदेशी...

प्रभु ऋषभदेव का आहार हो रहा,
हस्तिनापुरी में जयजयकार हो रहा।।
प्रथम प्रभू का प्रथम पारणा, प्रथम बार जब हुआ महल में।।हुआ..।।
पंचाश्चर्य की वृष्टि हुई थी, चौके का भोजन अक्षय हुआ तब।।
अक्षय....।।
भक्ती में विभोर सब संसार हो रहा,
हस्तिनापुर में जयजयकार हो रहा।।प्रभू........।।१।।
भरत ने नगरि अयोध्या से आकर, श्रेयांस का सम्मान किया था।।
श्रेयांस....।।
दानतीर्थ के प्रथम प्रवर्तक, कहकर उन्हें बहुमान दिया था।।बहुमान....।।
राजा के महलों में मंगलाचार हो रहा,
हस्तिनापुर में जयजयकार हो रहा।।प्रभू........।।२।।
पूरा पढ़ें...

सोलहकारण भावना


सोलहकारण भावना

जिनको बार-बार भाया जाए, उन्हें भावना कहते हैं। संख्या में १६ होने से इन्हें सोलहकारण भावना कहते हैं। ये तीर्थंकरप्रकृति का बंध कराने में कारण हैं।

१. दर्शनविशुद्धि-पच्चीस मल दोष रहित विशुद्ध सम्यग्दर्शन को धारण करना।

२. विनयसम्पन्नता-देव, शास्त्र, गुरु तथा रत्नत्रय की विनय करना।

३. शील व्रतों में अनतिचार-व्रतों और शीलों में अतिचार नहीं लगाना।

४. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोग-सदा ज्ञान के अभ्यास में लगे रहना।

पूरा पढ़े...

ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


भारत गौरव गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के

दीक्षित जीवन के 67 चातुर्मास (1953-2019)

*वर्ष 1953 टिकैत नगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1954 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1955 महेश्वर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1956 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1957 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1958 ब्यावर (राजस्थान)

*वर्ष 1959 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1960 सुजानगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1961 सीकर (राजस्थान)

*वर्ष 1962 लाडनूं (राजस्थान)

*वर्ष 1963 कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

*वर्ष 1964 हैदराबाद (आंध्र प्रदेश)

*वर्ष 1965 श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)

*वर्ष 1966 सोलापुर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1967 सनावद (मध्य प्रदेश)

*वर्ष 1968 प्रतापगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1969 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1970 टोंक (राजस्थान)

*वर्ष 1971 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1972 दिल्ली (पहाड़ी धीरज)

*वर्ष 1973 दिल्ली (नजफगढ़)

*वर्ष 1974 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1975 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1976 खतौली (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1977 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1978 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1979 दिल्ली (मोरी गेट)

*वर्ष 1980 दिल्ली (कूचा सेठ)

*वर्ष 1981 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1982 दिल्ली (मोदी धर्मशाला)

*वर्ष 1983 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1984 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1985 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1986 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1987 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1988 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1989 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1990 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1991 सरधना (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1992 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1993 अयोध्या (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1994 टिकैतनगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1995 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1996 मांगी तुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1997 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1998 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1999 दिल्ली (कनॉट प्लेस)

*वर्ष 2000 दिल्ली (प्रीत विहार)

*वर्ष 2001 दिल्ली (अशोक विहार)

*वर्ष 2002 प्रयाग इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 2003 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2004 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2005 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2006 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2007 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2008 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2009 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2010 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2011 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2012 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2013 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2014 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2015 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2016 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2017 मुंबई (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2018 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2019 टिकैतनगर (उ.प्र.)

चातुर्मास के विषय में पढ़ें

आज का दिन - ५ अगस्त २०२० (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक ५ अगस्त २०२०
तिथी- भाद्रपद कृष्ण २
दिन- बुधवार
वीर निर्वाण संवत- २५४६
विक्रम संवत- २०७७

सूर्योदय ०६.०३
सूर्यास्त १९.०२


अथ भाद्रपद मास फल विचार



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पूज्य गणिनी ज्ञानमती माताजी की 86वीं महाजयंती के प्रतिदिन की फोटोज


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