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आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक


आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-१
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-२
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-३
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-४

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आचार्य शांतिसागर मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष 2019-2020


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4 वर्ष 9 महीने की निर्जरा जैन द्वारा धर्म प्रभावना
दशलक्षण धर्म पूजा


कुन्दकुन्द मणिमाला


गाथा - 1

परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी द्वारा पारस चैनल के माध्यम से श्री कुंदकुंद मणिमाला का अध्ययन कराया जा रहा है । अतः पूज्य माताजी द्वारा पढ़ाई गई अब तक की गाथा के ऑडियो सुनने लिए इस लिंक को खोलें।

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झलकियां


आचार्य श्री शांतिसागर महाराज की 64वीं पुण्यतिथि की झलकियां

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भाद्रपद माह के व्रत एवं पर्व


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सोलहकारण व्रत - विधि - पूजा

मेघमाला व्रत - विधि - पूजा

जिनमुखावलोकन व्रत - विधि - पूजा

श्रुतस्कंध व्रत - विधि - पूजा

चन्दनषष्ठी व्रत - विधि - पूजा

लब्धि विधान व्रत - विधि - पूजा

त्रिलोक तीज व्रत - विधि - पूजा

दशलक्षण पर्व - सम्बन्धित व्रत एवं पूजाएं

पुष्पाञ्जलि व्रत - विधि - पूजा

आकाशपंचमी व्रत - विधि पूजा

निर्दोष सप्तमी व्रत - विधि पूजा

सुगंधदशमी व्रत - विधि पूजा

अनन्त चतुर्दशी व्रत - विधि पूजा

रत्नत्रय व्रत - विधि पूजा

सोलहकारण व्रत जाप्य मंत्र


सोलहकारण व्रत जाप्य मंत्र

(सोलहकारण पर्व में ये १-१ मंत्र दो-दो दिन किये जाते हैं अत: ३२ दिन में १६ मंत्र की जाप्य होती है।)

१. ॐ ह्रीं अर्हं दर्शनविशुद्धिभावनायै नम:।

२. ॐ ह्रीं अर्हं विनयसंपन्नता-भावनायै नम:।

३. ॐ ह्रीं अर्हं शीलव्रतेष्वनतिचारभावनायै नम:।

४. ॐ ह्रीं अर्हं अभीक्ष्णज्ञानोपयोगभावनायै नम:।

५. ॐ ह्रीं अर्हं संवेगभावनायै नम:।

६. ॐ ह्रीं अर्हं शक्तितस्त्यागभावनायै नम:।

७. ॐ ह्रीं अर्हं शक्तितस्तपोभावनायै नम:।

८. ॐ ह्रीं अर्हं साधुसमाधिभावनायै नम:।

९. ॐ ह्रीं अर्हं वैयावृत्यकरणभावनायै नम:।

१०. ॐ ह्रीं अर्हं अर्हद्भक्तिभावनायै नम:।

११. ॐ ह्रीं अर्हं आचार्यभक्तिभावनायै नम:।

१२. ॐ ह्रीं अर्हं बहुश्रुतभक्तिभावनायै नम:।

१३. ॐ ह्रीं अर्हं प्रवचनभक्ति-भावनायै नम:।

१४. ॐ ह्रीं अर्हं आवश्यकापरिहाणिभावनायै नम:।

१५. ॐ ह्रीं अर्हं मार्गप्रभावनाभावनायै नम:।

१६. ॐ ह्रीं अर्हं प्रवचनवत्सलत्वभावनायै नम:।

पवार पॉइंट प्रजेंटेशन


कुछ नए प्रजेंटेशन्स

सम्यग्ज्ञान पत्रिका


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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सोलहकारण व्रत


सोलहकारण व्रत

मेघमाला और षोडशकारण व्रत दोनों ही समान हैं। दोनों का आरंभ भाद्रपद कृष्णा प्रतिपदा से होता है परन्तु षोडशकारण व्रत में इतनी विशेषता है कि इसमें पूर्णाभिषेक आश्विन-कृष्णा प्रतिपदा को होता है, ऐसा नियम है। कृष्णा पंचमी तो नाम से ही प्रसिद्ध है।

जम्बूद्वीप संबंधी भरतक्षेत्र के मगध (बिहार) प्रांत में राजगृही नगर है। वहाँ के राजा हेमप्रभ और रानी विजयावती थी। इस राजा के यहाँ महाशर्मा नामक नौकर था और उनकी स्त्री का नाम प्रियंवदा था। इस प्रियंवदा के गर्भ से कालभैरवी नामक एक अत्यन्त कुरुपी कन्या उत्पन्न हुई कि जिसे देखकर माता-पितादि सभी स्वजनों तक को घृणा होती थी।

एक दिन मतिसागर नामक चारणमुनि आकाशमार्ग से गमन करते हुए उसी नगर में आये, तो उस महाशर्मा ने अत्यन्त भक्ति सहित श्री मुनि को पड़गाह कर विधिपूर्वक आहार दिया और उनसे धर्मोपदेश सुना। पश्चात् जुगल कर जोड़कर विनययुक्त हो पूछा-हे नाथ! यह मेरी कालभैरवी नाम की कन्या किस पापकर्म के उदय से ऐसी कुरुपी और कुलक्षणी उत्पन्न हुई है, सो कृपाकर कहिए? तब अवधिज्ञान के धारी श्री मुनिराज कहने लगे, वत्स! सुनो- उज्जैन नगरी में एक महिपाल नाम का राजा और उसकी वेगावती नाम की रानी थी। इस रानी से विशालाक्षी नाम की एक अत्यन्त सुन्दर रूपवान कन्या थी, जो कि बहुत रूपवान होने के कारण बहुत अभिमानिनी थी और इसी रूप के मद में उसने एक भी सद्गुण न सीखा। यथार्थ है-अहंकारी (मानी) नरों को विद्या नहीं आती है।

व्रत विधि पढ़ने के लिए क्लिक करें

वर्षायोग २०१९


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सोलहकारण पूजा


सोलहकारण पूजा

[षोडशकारण व्रत में]
-अथ स्थापना-गीता छंद-
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दर्शनविशुद्धी आदि सोलह, भावना भवनाशिनी।

जो भावते वे पावते, अति शीघ्र ही शिवकामिनी।।

हम नित्य श्रद्धा भाव से, इनकी करें आराधना।

पूजा करें वसुद्रव्य ले, करके विधीवत थापना।।१।।

ॐ ह्रीं दर्शनविशुद्ध्यादिषोडशकारणभावनासमूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।

ॐ ह्रीं दर्शनविशुद्ध्यादिषोडशकारणभावनासमूह! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं।

ॐ ह्रीं दर्शनविशुद्ध्यादिषोडशकारणभावनासमूह! अत्र मम सन्निहतो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।

अथाष्टकं (चाल-चौबीसों श्रीजिनचंद.....)

पयसागर को जल स्वच्छ, हाटक भृंग भरूँ।

जिनपद में धारा देत, कलिमल दोष हरूँ।।

वर सोलह कारण भाय, तीरथनाथ बनें।

जो पूजें मन वच काय, कर्म पिशाच हने।।१।।

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ॐ ह्रीं दर्शनविशुद्ध्यादिषोडशकारणभावनाजिनगुण-संपद्भ्यो जलं निर्वपामीति स्वाहा।

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सोलहकारण पर्व भजन


भजन
-प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माताजी

श्री सोलहकारण पाठ, करें सब ठाट-बाट से प्राणी,
तीर्थंकर पद की निशानी।।टेक.।।
यह पर्व अनादीनिधन है।
पर्वाधिराज यह अनुपम है।।
इसका व्रत करते हैं श्रावक-मुनि ज्ञानी,
तीर्थंकर पद की निशानी।।१।।
यह वर्ष में तीन बार आता।
भावों को शुद्ध बना जाता।।
शुभ चैत्र-भाद्रपद-माघ की सुनो कहानी,
तीर्थंकर पद की निशानी।।२।।
सोलहकारण के मंत्र जपो।
एकेक भावना रोज पढ़ो।।
बत्तिस दिन तक प्रभु नाम भजो भवि प्राणी,
तीर्थंकर पद की निशानी।।३।।
इस युग में भी व्रत करते जो।
सोलहकारण मय बनते वो।।
पाएंगे वे भी इक दिन शिवरजधानी,
तीर्थंकर पद की निशानी।।४।।
उत्तमव्रत में उपवास करो।
अथवा व्रत शक्त्यनुसार करो।।
‘‘चंदनामती’’ यह कहती है जिनवाणी,

तीर्थंकर पद की निशानी।।५।।
सोलहकारण भावना


सोलहकारण भावना

जिनको बार-बार भाया जाए, उन्हें भावना कहते हैं। संख्या में १६ होने से इन्हें सोलहकारण भावना कहते हैं। ये तीर्थंकरप्रकृति का बंध कराने में कारण हैं।

१. दर्शनविशुद्धि-पच्चीस मल दोष रहित विशुद्ध सम्यग्दर्शन को धारण करना।

२. विनयसम्पन्नता-देव, शास्त्र, गुरु तथा रत्नत्रय की विनय करना।

३. शील व्रतों में अनतिचार-व्रतों और शीलों में अतिचार नहीं लगाना।

४. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोग-सदा ज्ञान के अभ्यास में लगे रहना।

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ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


भारत गौरव गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के

दीक्षित जीवन के 67 चातुर्मास (1953-2019)

*वर्ष 1953 टिकैत नगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1954 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1955 महेश्वर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1956 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1957 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1958 ब्यावर (राजस्थान)

*वर्ष 1959 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1960 सुजानगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1961 सीकर (राजस्थान)

*वर्ष 1962 लाडनूं (राजस्थान)

*वर्ष 1963 कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

*वर्ष 1964 हैदराबाद (आंध्र प्रदेश)

*वर्ष 1965 श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)

*वर्ष 1966 सोलापुर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1967 सनावद (मध्य प्रदेश)

*वर्ष 1968 प्रतापगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1969 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1970 टोंक (राजस्थान)

*वर्ष 1971 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1972 दिल्ली (पहाड़ी धीरज)

*वर्ष 1973 दिल्ली (नजफगढ़)

*वर्ष 1974 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1975 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1976 खतौली (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1977 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1978 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1979 दिल्ली (मोरी गेट)

*वर्ष 1980 दिल्ली (कूचा सेठ)

*वर्ष 1981 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1982 दिल्ली (मोदी धर्मशाला)

*वर्ष 1983 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1984 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1985 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1986 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1987 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1988 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1989 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1990 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1991 सरधना (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1992 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1993 अयोध्या (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1994 टिकैतनगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1995 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1996 मांगी तुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1997 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1998 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1999 दिल्ली (कनॉट प्लेस)

*वर्ष 2000 दिल्ली (प्रीत विहार)

*वर्ष 2001 दिल्ली (अशोक विहार)

*वर्ष 2002 प्रयाग इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 2003 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2004 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2005 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2006 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2007 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2008 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2009 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2010 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2011 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2012 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2013 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2014 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2015 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2016 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2017 मुंबई (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2018 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2019 टिकैतनगर (उ.प्र.)

चातुर्मास के विषय में पढ़ें

आज का दिन - २१ सितम्बर २०१९ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक २१ सितम्बर,२०१९
तिथी- आश्विन कृष्ण ७
दिन- शनिवार
वीर निर्वाण संवत- २५४५
विक्रम संवत- २०७६

सूर्योदय ०६.१८
सूर्यास्त १८.२४


अथ आश्विन मास फल विचार

रोहिणी व्रत
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पूज्य गणिनी ज्ञानमती माताजी की 86वीं महाजयंती के प्रतिदिन की फोटोज


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