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President२०१८.jpgमहामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ जी कोविंद का विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन के उद्घाटन हेतु मंगल आगमन 22 अक्टूबर 2018 को ऋषभदेवपुरम में होगा |President२०१८.jpg

Diya.gif24 अक्टूबर 2018 को परम पूज्य गणिनी आर्यिकाश्री ज्ञानमती माताजी का 85वां जन्मदिन एवं 66वां संयम दिवस मनाया जाएगा ।Diya.gif

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जैन इनसाइक्लोपीडिया
जैन विश्वकोश
जैनधर्म के ज्ञान का महासागर

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*महामहिम राष्ट्रपति जी पधारेंगे ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी में*
22 अक्टूबर 2018
प्रमुख विषय


जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



ज्योतिष-वास्तु एवं मंत्र विद्या· जैन भूगोल· जैन इतिहास· श्रावक संस्कार· ग्रन्थ भण्डार

प्रवचन सोलहकारण भावना विशेष


दर्शन विशुध्दि भावना
विनय-सम्पन्नता भावना
शील-व्रत अनतिचार भावना
शारदा पक्ष व्रत


नवरात्रि व्रत

शारदा पक्ष के ४ व्रत होते हैं।

नवरात्रि, नवदेवता, चारित्रमालाशारदा व्रत-

नवरात्रि व्रत-यह व्रत आश्विन शुक्ला एकम् से आश्विन शुक्ला नवमी तक किया जाता है। प्रात: स्नानादि का शुद्ध वस्त्र पहनकर शुद्ध द्रव्य लेकर जिनालय में जाये वहां जाकर ईर्यापथ शुद्धिपूर्वक आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का पंचामृताभिषेक करें, अष्टद्रव्य से पूजन करें पुन: श्रुत और गणधर की पूजा कर चक्रेश्वरी यक्षी व गोमुख यक्ष की अर्चना करें।

व्रतविधि—नवरात्रि व्रत आश्विन शु. एकम से आश्विन शुक्ला नवमी तक किया जाता है। प्रात: स्नानादि कर शुद्ध वस्त्र पहनकर शुद्ध द्रव्य लेकर जिनालय में जाएँ, वहाँ जिनालय की तीन प्रदक्षिणा देकर ईर्यापथ शुद्धिपूर्वक आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का पंचामृताभिषेक करें, अष्टद्रव्य से पूजन करें पुन: श्रुत और गणधर की पूजा कर चव्रेâश्वरी यक्षी व गोमुखयक्ष की अर्चना करें।


विश्वशांति अहिंसा सम्मेलन


महामहिम राष्ट्रपति जी पधारेंगे ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी में
22 अक्टूबर 2018-

ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में अखण्ड पाषाण में निर्मित विश्व की सबसे ऊँची दिगम्बर जैन प्रतिमा-108 फुट उत्तुंग भगवान ऋषभदेव की पावन धरा पर मूर्ति निर्माण की पावन प्रेरिका सर्वोच्च जैन साध्वी भारतगौरव गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के सान्निध्य में प्रथम बार भारत गणतंत्र के राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ जी कोविन्द का मंगल आगमन विश्वशांति अहिंसा सम्मेलन के उद्घाटन हेतु दिनाँक-22 अक्टूबर 2018, सोमवार को मध्यान्ह 2 बजे, ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी में होगा।

यह समस्त दिगम्बर जैन समाज के लिए गौरव का विषय है अत: आप भी इस अवसर पर अवश्य पधारें। सधन्यवाद,

भगवान श्री ऋषभदेव मूर्ति निर्माण कमेटी, ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी

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भूमि पूजन


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पुण्यतिथि पर प्रस्तुत


प्रशान्तमूर्ति आचार्य श्री वीरसागर

-गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी
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इस भारत वसुन्धरा पर समय-समय पर अनेकों रत्नों ने जन्म लेकर इस धरा को अलंकृत किया है। उनमें से एक श्रेष्ठरत्न श्री आचार्य वीरसागर जी महाराज हो चुके हैं, जिनसे मैंने आर्यिका दीक्षा को प्राप्त कर महाव्रत से अपने जीवन को पवित्र बनाया है। हैदराबाद राज्य के अन्तर्गत एक औरंगाबाद शहर है, जहाँ पर जैनधर्म के प्रेमी श्रावकगण हमेशा धर्म कार्यों में सक्रिय भाग लिया करते हैं। उसी जिले के अन्तर्गत एक ‘ईर’ नाम का ग्राम है जो छोटा सा ग्राम होते हुए भी ‘‘वीरसागर आचार्य’’ जैसी महान् आत्मा को जन्म देने के निमित्त से स्वयं भी महान बन गया है। इस पवित्र सुन्दर ग्राम में श्रावक शिरोमणि सेठ ‘रामसुख’ जी निवास करते थे जो कि ‘खंडेलवाल’ जाति के भूषण गंगवाल गोत्रीय थे। उनकी धर्मपत्नी ‘भागू बाई’ भी पति के अनुरूप धर्मात्मा और सती पतिव्रता थीं। उभय दम्पत्ति सदैव धर्माराधन में अपना काल व्यतीत करते थे।

महिलारत्न भागूबाई ने सबसे प्रथम एक पुत्ररत्न को जन्म दिया, वह गुलाब के सुन्दर पुष्प सदृश अपनी यश सुरभि पैâलाने वाला था इसलिए माता-पिता ने उसका नाम ‘गुलाबचंद’ रख दिया। कुछ दिन बाद माता भागूभाई ने सौभाग्य से स्वप्न में एक उत्तम बैल देखा उस समय उनके उदर में होनहार पुण्यशाली सूरिवर्य वीरसागर का जीव आ गया था।
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जन्मजयन्ती पर प्रस्तुत-


स्वर्णिम व्यक्तित्व की धनी ज्ञानमती माताजी

लेखिका - आर्यिका चन्दनामती
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कुन्दकुन्दान्वयो जीयात्, जीयात् श्री शांतिसागर:।

जीयात् पट्टाधिपस्तस्य, सूरि: श्री वीरसागर:।।
श्री ब्राह्मी गणिनी जीयात्, जीयादन्तिमचन्दना।

जीयात् ज्ञानमती माता, गणिन्यां प्रमुखा कलौ।।

जैनशासन के वर्तमान व्योम पर छिटके नक्षत्रों में दैदीप्यमान सूर्य की भाँति अपनी प्रकाश-रश्मियों को प्रकीर्णित कर रहीं पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर उठी लेखनी की अपूर्णता यद्यपि अवश्यंभावी है, तथापि आत्मकल्याण की भावना से पूज्य माताजी के श्रीचरणों में उनके दीर्घकालीन त्यागमयी जीवन के प्रति विनम्र विनयांजलिरूप मेरा यह विनीत प्रयास है।

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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी


चंदनामती माताजी केशलोंच करते हुए


Chandnamati keshlonch oct 2018.jpg
ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास

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महामहिम का मंगल आगमन


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विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन सभा मण्डप


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भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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काव्य कथानक


माता मोहिनी और पुत्री मैना का संवाद

तर्ज-बार-बार तोहे क्या समझाऊँ.......

माता मोहिनी - बार-बार समझाऊँ बेटी, मान ले मेरी बात।
तेरे जैसी सुकुमारी की, दीक्षा का युग है न आज।।
मैना - भोली भाली माता मेरी, सुन तो मेरी बात।
हम और तुम मिलकर ही, युग को बदल सकते आज।।
माता मोहिनी - तूने तो बेटी अब तक, संसार न कुछ देखा है।
फिर भी मान लिया क्यों इसको, यह सब कुछ धोखा है।।
खाने और खेलने के दिन, क्यों करती बर्बाद।
तेरे जैसी सुकुमारी की, दीक्षा का युग है न आज।।१।।

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शारदा व्रत


शारदा व्रत

शारदा-सरस्वती की आराधना, उपासना, भक्ति आदि से भव्यजीव समीचीन ज्ञान की वृद्धि करते हुए परम्परा से श्रुतकेवली, केवली पद को प्राप्त करेंगे। यह व्रत ज्येष्ठ मास में शुक्लपक्ष में एकम से आषाढ़ कृष्णा एकम तक सोलह दिन करना है। इसी प्रकार आश्विन मास में शुक्ला एकम से कार्तिक कृ. एकम तक पुन: माघ मास में शुक्ला एकम से फाल्गुन कृ. एकम तक, ऐसे वर्ष में तीन बार व्रत करना है। इस व्रत में शास्त्रों की पूजा-द्वादशांग जिनवाणी की पूजा, सरस्वती की मूर्ति की पूजा-जिनके मस्तक पर भगवान अर्हंतदेव की मूर्ति विराजमान हैं ऐसी सरस्वती-शारदा देवी की पूजा करना।

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इन्द्रध्वज विधान


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आज का दिन - १९ अक्टूबर २०१८ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक १९ अक्टूबर,२०१८
तिथी- आश्विन शुक्ल १०
दिन-शुक्रवार
वीर निर्वाण संवत- २५४४
विक्रम संवत- २०७५

सूर्योदय ०६.२८
सूर्यास्त १७.४४


अथ आश्विन मास फल विचार

विजयादशमी
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अष्ट मंगल द्रव्य

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०-९ अं
परिमार्जित क्ष त्र ज्ञ श्र अः


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