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भारत गौरव पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का ससंघ नैनागिरि तीर्थ में मंगल प्रवेश ।

प्रतिदिन पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे के मध्य पू.आ. श्री चंदनामती माताजी द्वारा जैन धर्म का प्रारंभिक ज्ञान प्राप्त करें |

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विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन की फ्लशिंग न्यूज़


कार्यक्रम


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सिद्धक्षेत्र नैनागिरी में *युवा परिषद* द्वारा *बुंदेलखण्ड प्रान्तीय युवा सम्मेलन- 20/1/2019* को *मध्याह्न 1 बजे*, अवश्य पधारें। *सान्निध्य-भारतगौरव गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ*।

संत विहार अपडेट


संत विहार अपडेट

🙏🙏🙏जय जिनेन्द्र🙏🙏🙏
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  • सप्तम पटाधिश श्री अनेकांतसागजी महामुनिराज ससंघ का मंगल विहार श्री सम्मेद शिखरजी की ओर चल रहा है |
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  • अन्तर्मना गुरुवर श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ससंघ का मुंबई महानगर के बोरीवली में २० जनवरी २०१९ को प्रतः ८ बजे मंगल प्रवेश होगा।
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  • पूज्य आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज ससंघ का मुंबई महानगर से श्री गजपंथ, श्री मांगीतुंगी, श्री गिरनार सिद्धक्षेत्र दर्शनार्थ मंगल विहार चल रहा है।
अयोध्या कार्यक्रम


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आज का नियम


परम पूज्य चंदनामती माताजी द्वारा प्रदत्त आज का नियम :- णमोकार मंत्र का चालीसा पढ़े

णमोकार चालीसा :-

दोहा

वंदूँ श्री अरिहंत पद, सिद्ध नाम सुखकार।
सूरी पाठक साधुगण, हैं जग के आधार।।१।।

इन पाँचों परमेष्ठि से, सहित मूल यह मंत्र।
अपराजित व अनादि है, णमोकार शुभ मंत्र।।२।।

णमोकार महामंत्र को, नमन करूँ शतबार।
चालीसा पढ़कर लहूँ, स्वात्मधाम साकार।।३।।

चौपाई

हो जैवन्त अनादिमंत्रम्, णमोकार अपराजित मंत्रम् ।।१।।

पंच पदों से युक्त सुयंत्रम्, सर्वमनोरथ सिद्धि सुतंत्रम्।।२।।

पैंतिस अक्षर माने इसमें, अट्ठावन मात्राएँ भी हैं।।३।।

अतिशयकारी मंत्र जगत में, सब मंगल में कहा प्रथम है।।४।।

जिसने इसका ध्यान लगाया, मनमन्दिर में इसे बिठाया।।५।।

पूरी चालीसा पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करे...

गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी


सम्यग्ज्ञान पत्रिका


आगमदर्पण


गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी मंगल विहार सूचना


  • पूज्य माताजी का मंगल विहार अयोध्या होते हुए जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर की ओर सानंद चल रहा है।
  • गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ससंघ ने किया नैनगिरि तीर्थ दर्शन :-
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अन्य फोटोज के लिए क्लिक करें पूज्य माताजी का दिनांक 19-1-2019 को *नैनागिरि सिद्धक्षेत्र* पर भव्य मंगल प्रवेश हुआ । पूज्य माताजी ने मध्याह्न में पर्वत की वंदना की ।

दिनांक 20-01-2019 को पूज्य माताजी ससंघ ने भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा जो पर्वत पर विराजमान है उनका अभिषेक व शांतिधारा देखी ,तत्पश्चात पूज्य माताजी का प्रवचन हुआ । सभी श्रावक-श्राविकाओं ने बड़े ही भक्ति- भाव से पूज्य माताजी के चरण स्पर्श कर पाद- प्रक्षालन 👣 किया । नैनागिरि सिद्धक्षेत्र के अध्यक्ष श्रीमान् सुरेश जी ने पर्वत पर पूज्य माताजी के करकमलों से गणिनी ज्ञानमती ध्यान केन्द्र के शिलालेख का लोकार्पण कराया। मध्याह्न में बुंदेलखंड प्रान्तीय जैन युवा सम्मेलन का भी आयोजन किया गया इसी कार्यक्रम के मध्य अयोध्या में होने वाले पंचकल्याणक व मस्तकाभिषेक की पत्रिका का विमोचन किया गया एवं ब्राम्ही सुंदरी बालिका संगठन का दीप प्रज्वलित किया गया ।कार्यक्रम के पश्चात पूज्य माताजी ससंघ ने पर्वत पर नैनागिरि से मोक्ष पधारे गुरुदत्त आदि पांच मुनियों के चरणों में निर्वाण लाडू चढ़वाया । शाम ५ बजे पूज्य माताजी ससंघ सिद्धशिला के दर्शन के लिए गईं जहां पांचों मुनियों के चरण विराजमान हैं ।

आज दिनांक 21-01-2019 को पूज्यनीय माताजी ने नैनागिरि से विहार किया सुबह की आहारचर्या दलपतपुर गांव, म.प्र. में हुई ।

रात्रि विश्राम बिला गांव में करके सुबह शाहगढ़ के लिए संघ का मंगल विहार होगा ।

मंगल विहार फोटोज


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भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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डाक्यूमेंट्री


ऋषभगिरि (महा.) डाक्यूमेंट्री क्लिप

भजन


तीरथयात्रा का पुण्य विशाल है

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तीरथयात्रा का पुण्य विशाल है, इसकी दूजी न कोई मिशाल है।
इससे आत्मा बनेगी परमात्मा, भवसागर से होकर पार है।।टेक.।।


कोई गंगा को तीरथ कह, उसमें डुबकी लगाते हैं।
कोई संगम तट पर जाकर, निज को शुद्ध बनाते हैं।।
सच्चे तीरथ की कीरत विशाल है, इसकी दूजी न कोई मिशाल है।
इससे आत्मा बनेगी परमात्मा, भवसागर से होकर पार है।।१।।


सत्य अहिंसा करुणा की, नदियाँ जहां कल कल बहती हैं।
उनमें पापों के क्षालन को, जनता आतुर रहती है।।
वही तीरथ अलौकिक विशाल है, इसकी दूजी न कोई मिशाल है।
इससे आत्मा बनेगी परमात्मा, भवसागर से होकर पार है।।२।।

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प्रेरक विचार


नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर...

ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास

Chaturmas1953-2018.jpg


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आज का दिन - २२ जनवरी २०१९ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक २२ जनवरी,२०१९
तिथी- माघ कृष्ण २
दिन-मंगलवार
वीर निर्वाण संवत- २५४५
विक्रम संवत- २०७५

सूर्योदय ०७.१८
सूर्यास्त १७.४७


अथ माघ मास फल विचार


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अयोध्या विहार 2018


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०-९ अं
परिमार्जित क्ष त्र ज्ञ श्र अः


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