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*महामहिम राष्ट्रपति जी ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी में*
22 अक्टूबर 2018
प्रमुख विषय


जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



ज्योतिष-वास्तु एवं मंत्र विद्या· जैन भूगोल· जैन इतिहास· श्रावक संस्कार· ग्रन्थ भण्डार

विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन की फ्लशिंग न्यूज़


विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन की झलकियां


माताजी का मंगल विहार अवध की ओर


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👣 मंगल महाविहार सूचना 👣

गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का मंगल विहार अयोध्या होते हुए हस्तिनापुर के लिए चल रहा है। इसी क्रम में आज दिनांक 13/11/2018, मंगलवार को पूज्य माताजी ससंघ 22 किमी० का विहार करके साकरी (महा०) पहुँची।

आज रात्रि का विश्राम साकरी से 5 किमी० पर होगा। दिनाँक 16/11/2018 को माताजी ससंघ का धुले में मंगल प्रवेश संभावित है।🙏

भगवान ऋषभदेव इंटरनेशनल अवार्ड


जन्मजयन्ती पर प्रस्तुत-


स्वर्णिम व्यक्तित्व की धनी ज्ञानमती माताजी

लेखिका - आर्यिका चन्दनामती
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कुन्दकुन्दान्वयो जीयात्, जीयात् श्री शांतिसागर:।

जीयात् पट्टाधिपस्तस्य, सूरि: श्री वीरसागर:।।
श्री ब्राह्मी गणिनी जीयात्, जीयादन्तिमचन्दना।

जीयात् ज्ञानमती माता, गणिन्यां प्रमुखा कलौ।।

जैनशासन के वर्तमान व्योम पर छिटके नक्षत्रों में दैदीप्यमान सूर्य की भाँति अपनी प्रकाश-रश्मियों को प्रकीर्णित कर रहीं पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर उठी लेखनी की अपूर्णता यद्यपि अवश्यंभावी है, तथापि आत्मकल्याण की भावना से पूज्य माताजी के श्रीचरणों में उनके दीर्घकालीन त्यागमयी जीवन के प्रति विनम्र विनयांजलिरूप मेरा यह विनीत प्रयास है।

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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी


चंदनामती माताजी केशलोंच करते हुए


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शारदा पक्ष व्रत


नवरात्रि व्रत

शारदा पक्ष के ४ व्रत होते हैं।

नवरात्रि, नवदेवता, चारित्रमालाशारदा व्रत-

नवरात्रि व्रत-यह व्रत आश्विन शुक्ला एकम् से आश्विन शुक्ला नवमी तक किया जाता है। प्रात: स्नानादि का शुद्ध वस्त्र पहनकर शुद्ध द्रव्य लेकर जिनालय में जाये वहां जाकर ईर्यापथ शुद्धिपूर्वक आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का पंचामृताभिषेक करें, अष्टद्रव्य से पूजन करें पुन: श्रुत और गणधर की पूजा कर चक्रेश्वरी यक्षी व गोमुख यक्ष की अर्चना करें।

व्रतविधि—नवरात्रि व्रत आश्विन शु. एकम से आश्विन शुक्ला नवमी तक किया जाता है। प्रात: स्नानादि कर शुद्ध वस्त्र पहनकर शुद्ध द्रव्य लेकर जिनालय में जाएँ, वहाँ जिनालय की तीन प्रदक्षिणा देकर ईर्यापथ शुद्धिपूर्वक आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का पंचामृताभिषेक करें, अष्टद्रव्य से पूजन करें पुन: श्रुत और गणधर की पूजा कर चव्रेâश्वरी यक्षी व गोमुखयक्ष की अर्चना करें।


श्री ज्ञानमती स्तुति:


गणिनीप्रमुख आर्यिकारत्न श्री ज्ञानमती स्तुति:

डॉ. पं. दामोदर जी शास्त्री, दिल्ली
छंद—शार्दूलविक्रीडित

यस्या आप्तजिनोक्तधर्मविषया श्रद्धा दृढा कीत्र्यते,
यज्ज्ञानं बहुशास्त्रवारिधि—तलस्र्पिश प्रसिद्धं भुवि।
चारित्रं च यदीयमस्ति विमलं तीर्थंकराज्ञानुगम् ,
भक्त्याहं प्रणमामि लोकमहितां तां ज्ञाज्ञमत्र्याियकाम्।।१।।

शास्त्राधीति परप्रबोधककथा व्याख्यानरूपादिभि:,
स्वाध्याय प्रमुखैस्तपोभिरखिलै: सच्चर्यया पूतया।
नित्यं स्वात्महिते रताऽपि कुरुते भव्योपकारं च या,
भक्त्याहं प्रणमामि लोकमहितां तां ज्ञानमत्र्याियकाम्

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भगवान महावीर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार 2018


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श्री पावापुरी जी सिद्ध क्षेत्र में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव सोल्लास संपन्न हुआ।

इस महोत्सव में पावापुरी जी का सर्वोच्च पुरस्कार भगवान महावीर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार 2018 बिहार के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय श्री नीतीश कुमार जी को प्रदान किया गया।

वीर गाँव के वीरसागर


‘‘वीर गाँव के वीरसागर’’

-ब्र. कु.इंदु जैन
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(महाराष्ट्र प्रांत के औरंगाबाद जिले में एक छोटे से कस्बे वीर नामक ग्राम में रामसुख नाम के एक श्रेष्ठी रहा करते थे। उन्होंने ‘‘भाग्यवती’’ नाम की धर्मपत्नी को पाकर मानो सचमुच ही राम जैसे सुख को प्राप्त कर लिया था। गंगवाल गोत्रीय ये दम्पत्ति श्रावक कुल के शिरोमणि थे। प्रतिदिन मंदिर में जाकर देवदर्शन करना, भक्ति, पूजा आदि उनके जीवन के आवश्यक अंग थे। बंधुओं! माता-पिता के संस्कार बालक के ऊपर आना स्वाभाविक बात है। एक रात्रि में भाग्यवती सुख की निद्रा में सोई हुई थीं, तभी रात्रि के पिछले प्रहर में उन्होंने स्वप्न में सफेद बैल को देखा और प्रसन्नमना हो उठी |

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भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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काव्य कथानक


माता मोहिनी और पुत्री मैना का संवाद

तर्ज-बार-बार तोहे क्या समझाऊँ.......

माता मोहिनी - बार-बार समझाऊँ बेटी, मान ले मेरी बात।
तेरे जैसी सुकुमारी की, दीक्षा का युग है न आज।।
मैना - भोली भाली माता मेरी, सुन तो मेरी बात।
हम और तुम मिलकर ही, युग को बदल सकते आज।।
माता मोहिनी - तूने तो बेटी अब तक, संसार न कुछ देखा है।
फिर भी मान लिया क्यों इसको, यह सब कुछ धोखा है।।
खाने और खेलने के दिन, क्यों करती बर्बाद।
तेरे जैसी सुकुमारी की, दीक्षा का युग है न आज।।१।।

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शारदा व्रत


शारदा व्रत

शारदा-सरस्वती की आराधना, उपासना, भक्ति आदि से भव्यजीव समीचीन ज्ञान की वृद्धि करते हुए परम्परा से श्रुतकेवली, केवली पद को प्राप्त करेंगे। यह व्रत ज्येष्ठ मास में शुक्लपक्ष में एकम से आषाढ़ कृष्णा एकम तक सोलह दिन करना है। इसी प्रकार आश्विन मास में शुक्ला एकम से कार्तिक कृ. एकम तक पुन: माघ मास में शुक्ला एकम से फाल्गुन कृ. एकम तक, ऐसे वर्ष में तीन बार व्रत करना है। इस व्रत में शास्त्रों की पूजा-द्वादशांग जिनवाणी की पूजा, सरस्वती की मूर्ति की पूजा-जिनके मस्तक पर भगवान अर्हंतदेव की मूर्ति विराजमान हैं ऐसी सरस्वती-शारदा देवी की पूजा करना।

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इन्द्रध्वज विधान


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ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास

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आज का दिन - १४ नवम्बर २०१८ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक १४ नवम्बर,२०१८
तिथी- कार्तिक शुक्ल ७
दिन-बुधवार
वीर निर्वाण संवत- २५४५
विक्रम संवत- २०७५

सूर्योदय ०६.४७
सूर्यास्त १७.२४


अथ कार्तिक मास फल विचार


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०-९ अं
परिमार्जित क्ष त्र ज्ञ श्र अः


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