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माता जी के सानिध्य में लघु पंचकल्याणक प्रतिष्ठा टिकैतनगर में 10 जून से 14 जून तक|

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन |

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जैन इनसाइक्लोपीडिया
जैन विश्वकोश
जैनधर्म के ज्ञान का महासागर


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जन्मदिवस - स्वामी रवीन्द्रकीर्ति जी
प्रमुख विषय


जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



ज्योतिष-वास्तु एवं मंत्र विद्या· जैन भूगोल· जैन इतिहास· श्रावक संस्कार· ग्रन्थ भण्डार

आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक


आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-१
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-२
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-३
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-४

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मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष


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  • प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती श्री शांतिसागर जी अन्तर्राष्ट्रीय मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष-*

  • वर्ष की पावन प्रेरणास्रोत-*
  • भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ।🙏*
कुन्दकुन्द मणिमाला


गाथा - 1

परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी द्वारा पारस चैनल के माध्यम से श्री कुंदकुंद मणिमाला का अध्ययन कराया जा रहा है । अतः पूज्य माताजी द्वारा पढ़ाई गई अब तक की गाथा के ऑडियो सुनने लिए इस लिंक को खोलें।

पुस्तक पढने के लिए क्लिक करें...

*बालक एवं नवोदित युवा सम्मान समारोह*


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कर्मयोगी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी का परिचय


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जन्म
आपका जन्म ज्येष्ठ शुक्ला पंचमी (श्रुतपंचमी) को सन् १९५० में हुआ
जन्म स्थान
टिकैतनगर (बाराबंकी) उ.प्र.
माता-पिता
माता मोहिनी देवी (आर्यिका श्री रत्नमती माताजी हुईं ) एवं पिता श्री छोटेलाल जैन
जन्म नाम
रवीन्द्र कुमार जैन
शिक्षा
लखनऊ यूनिवर्सिटी से बी.ए. तक अध्ययन
भाई बहन
९ बहनें एवं ३ भाई
त्याग की प्रेरणा
सन् १९६८ में पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा २ वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत
आजन्म ब्रह्मचर्य व्रत
सन् १९७२ में आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज द्वारा, नागौर (राज.) में
सप्तम प्रतिमा के व्रत एवं गृह त्याग
सन् १९८७ में पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा
दशम प्रतिमा एवं पीठाधीश पदारोहण के संस्कार
मगसिर कृष्णा दशमी, २० नवम्बर २०११, पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा

उपाधि अलंकरण
  • ‘कर्मयोगी’ (सन् १९९२ में अ.भा. दि. जैन शास्त्री परिषद द्वारा
  • ‘धर्मसंरक्षणाचार्य’ (सन् १९९६ में मांगीतुंगी-महा. में पंचकल्याणक के अवसर पर वीर सेवा दल द्वारा)
  • ‘धर्मालंकार’ (सन् १९९६, मांगीतुंगी में)
  • ‘संस्कृति संरक्षक’ (सन् २००६ में भट्टारकवृंद द्वारा)
  • ‘संस्कृति सार्थवाह’ (१२ जून २०१०, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर में आयोजित ज्ञान ज्योति विद्वत् प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर समस्त विद्वत्जनों द्वारा)
  • ‘तीर्थोद्धारक’ (३० नवम्बर २०११, औरंगाबाद-महा.में)

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समाचार


गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी संघ की दैनिक चर्या

  • प्रातः 5:00 बजे - उषा वंदना
  • प्रातः 5:15 बजे - योग प्राणायाम एवं ध्यान की क्लास (पूज्य प्रज्ञा श्रमणी आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी द्वारा)
  • प्रातः 6:00 से 7:00 - पारस चैनल के सीधे प्रसारण में भगवान का पंचामृत अभिषेक व पूज्य माता जी के प्रवचन
  • प्रातः 7:00 बजे - गुरु वंदना
  • प्रातः 7:45 बजे - तत्वार्थ सूत्र क्लास
  • प्रातः 9:30 बजे - संघ की आहार चर्या
  • मध्यान्ह 12:00 से 3:00 तक - सामयिक, विश्राम एवं निजी अध्ययन - स्वाध्याय
  • मध्यान्ह 3:00 से 4:00 बजे तक - गौतम गणधर वाणी का स्वाध्याय एवं आप्तमीमांसा की क्लास
  • मध्यान्ह 4:00 बजे से - बालक एवं बालिकाओं के लिए शिक्षाप्रद क्लास (बेसिक शिक्षा क्लास)
  • सांय 6:00 से 6:30 तक - प्रतिक्रमण एवं गुरु वंदना
  • रात्रि 8:00 बजे - मंगल आरती (भगवान एवं पूज्य माता जी की )
  • रात्रि 8:30 बजे - द्रव्य संग्रह की कक्षा (पूज्य स्वामी जी द्वारा )
  • रात्रि 9:00 बजे - बाल संघ, बालिका संघ, महिला मंडल के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम / प्रतियोगिता आदि

विशेष

प्रत्येक रविवार को मध्यान्ह 3:00 बजे से बालक बालिकाओं को इंटरनेट पर जैन इनसाइक्लोपीडिया सिखाया जाएगा |

पवार पॉइंट प्रजेंटेशन


कुछ नए प्रजेंटेशन्स

सम्यग्ज्ञान पत्रिका


वर्ष-४५ (सन् २०१८-२०१९)

शारदा व्रत


शारदा व्रत

शारदा - सरस्वती की आराधना उपासना भक्ति आदि से भव्य जीव समीचीन ज्ञान की वृद्धि करते हुए परंपरा से श्रुत केवली, केवली पद को प्राप्त करेंगे | यह व्रत ज्येष्ठ मास में शुक्लपक्ष में एकम से आषाढ़ कृष्ण एकम तक 16 दिन करना है | इसी प्रकार आश्विन मास में शुक्ल एकम से कार्तिक कृष्ण एकम तक पुनः माघ मास में शुक्ल एकम से फागुन कृष्ण एकम तक ऐसे वर्ष में तीन बार व्रत करना है | इस व्रत में शास्त्रों की पूजा-द्वादसांग जिनवाणी की पूजा, सरस्वती की मूर्ति की पूजा - जिनके मस्तक पर भगवान अरहंत देव की मूर्ति विराजमान हैं - ऐसी सरस्वती शारदा देवी की पूजा करना |

इस व्रत में ज्येष्ठ शुक्ल 5 अश्विन शुक्ल 5 और माघ शुक्ल 5 को व्रत उपवास या एकासन करना और उन दिनों विशेष रूप से सरस्वती की आराधना करना है तथा शेष दिनों में एक बार अन्न का भोजन करना शक्ति के अनुसार दूसरी बार अल्पाहार - फल, दूध, औषधि आदि लेना चाहिए | रात्रि में चतुर्विध आहार का त्याग करना है | प्रतिदिन सरस्वती के साथ-साथ महालक्ष्मी देवी की तथा चक्रेश्वरी, पद्मावती आदि शासन देवियों की भी आराधना करना है |

सरस्वती महापूजा नाम से पुस्तक जंबूद्वीप हस्तिनापुर से मंगा कर उसमें लिखे अनुसार सरस्वती के 108 मंत्र विधि से आराधना करना चाहिए |

इस व्रत में ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा, आश्विन शुक्ल पूर्णिमा - शरद पूर्णिमा और माघ शुक्ल पूर्णिमा को उपवास एकादशी व्रत करके हस्तिनापुर, अयोध्या, प्रयाग आदि तीर्थों पर जाकर उन-उन केवलज्ञान भूमि की पूजा करके सरस्वती की विशेष आराधना करें | आज उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ - षटखण्डागम ग्रंथों की पूजा करके अगले दिन एकम-प्रतिपदा को पारणा करना है | यह व्रत सम्यकज्ञान की वृद्धि में तो निमित्त है ही, इसके प्रभाव से तत्काल में संसारी नाना प्रकार के सुख शांति संपत्ति, संतति आदि की वृद्धि होती है और आगे परंपरा से द्वादसांग का ज्ञान प्राप्त कर नियम से केवलज्ञान को तथा मोक्ष को प्राप्त करेंगे |

इसका मंत्र -
ॐ ह्रीं द्वादसांगवाणीसरस्वती देव्यै नमः |
अथवा
ॐ ह्रीं श्रीं वद वद वागवादिनि भगवति सरस्वति ह्रीं नमः |
लक्ष्मी मंत्र -
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ब्लूं ऐं महालक्ष्मयै नम: |
चक्रेश्वरी मंत्र -
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं श्री चक्रेश्वरी देव्यै नमः |
पद्मावती मंत्र -
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं श्री पद्मावती देव्यै नमः मम ईप्सितं कुरु कुरु स्वाहा |

इस प्रकार से जाप्य करें | सरस्वती के 108 मंत्रों से विधान आराधना आदि करें | 1 वर्ष में 3 बार इस व्रत को करके बड़े रूप में सरस्वती की आराधना करके सरस्वती की प्रतिमा बनवा कर मंदिरों में विराजमान करें | यह सब प्रकार के मनोरथों को सफल करने वाला है |

गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के चातुर्मास की सूचना


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जन्मभूमि टिकैतनगर बाराबंकी उत्तरप्रदेश में जैन समाज के हर वर्ग (बालक बालिकाएं युवा प्रौढ़)की भावनाओं को देखते हुए जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी भारत गौरव दिव्यशक्ति गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी ने सन 2019 के वर्षा योग (चातुर्मास) स्थापना के लिए 99% स्वीकृति प्रदान की।

ये जन्मभूमि वासियों के लिए ऐतिहासिक, स्वर्णिम और अविष्मरणीय पल हैं।

जन्मभूमिवासी पूज्य माता जी ससंघ के श्री चरणों मे कोटि कोटि नमन करते है और स्वयं को गौरवान्वित मानते है कि ऐसी महान साध्वी,साक्षात सरस्वती की अवतार,जिन धर्म रक्षिका गुरु मां के चातुर्मास का अवसर सभी को प्राप्त हो रहा है।

चित्रावली


श्रुतपंचमी कि कथा


कथा सुनों भाई कथा सुनों , श्रुत पञ्चमी की कथा सुनों |
   षट्खंडागम हुआ आगम , उसकी रोमांचक कथा सुनों|
श्री मानतुंगाचार्य स्वामी आपकी कथा सुनने मात्र से प्राणियों के पाप नष्ट हो जाते है |
सरस्वती जिनवाणी माँ की महिमा बड़ी निराली ,
 जिनने श्रुत को प्रथम लिखा है,उसकी सुनो कहानी |
  गुरुवर पुष्पदन्त की जय , गुरुवर भूतबलि की जय|
महावीर शासन में केवल श्रुतकेवली हुवे है | ११ अंग व १४ पुर्व ज्ञान से सहित हुए है |
घटने लगा ज्ञान फिर आगे हुए न केवलज्ञानी |
जिनने श्रुत को प्रथम लिखा है ,उसकी सुनो कहानी |
भगवान महावीर के पश्चात गौतम गणधर को लेकर अन्तिम केवली हुए जम्बूस्वामी|
जिन्होनें चतुर्थकाल में जन्म लिया , पंचमकाल में केवलज्ञान हुआ|
अंतिम श्रुत केवली हुए भद्रबाहु , जिनकी सेवा चन्द्रगुप्त मुनिराज ने किया |
केवली भगवान अपने केवलज्ञान से लोक अलोक भी जानते है |
एक धरसेन नाम के आचार्य थे वह गिरिनार की चन्द्र गुफा में रहते थे
एक बार धरसेनसूरी को चिंता हो गयी कि श्रुत का विच्छेद हो जायेगा |
मेरी आंशिक पूर्वज्ञान की धारा चलेगी कैसी
चिंता को चिंतन में बदलकर , श्रुतरक्षा की ठानी |
जिनने ...............
भगवान महावीर के मोक्ष जाने के ६८३ वर्ष तक ज्ञान अंग की प्रवर्ति रही |उसके बाद ज्ञान काम होने लगा ,चार मुनि अंग पुर्व के ज्ञाता हुवे |वे मुनिराज अपनें शिष्यों को ज्ञान आदि देते हुवे देखते हुवे समझ गये ,की ज्ञान का ह्रास होने को आया है अर्हत बलि नाम का आचार्य हुवे जो मुनि का निग्रह पूर्वक शासन करते थे |जितने मुनि हर जगह भ्रमण कर रहें थे सबको समाचार भिजवाया |कि 5 साल का युग प्रतिक्रमण सब एक साथ मिल कर किया जाये |महा साधू सम्मेंलन करते थे|अर्हत बलि मुनिराज ने पूछा ,सब साधू आ गये|हा महाराज हम सब अपने -अपनें संघ के साथ आ गये |मुनि ने सोचा ! अब कलियुग आ गया है अब सब साधू अपना -अपना संघ बनाकर रहना चाहते हैं |सम्मेंलन हो रहा था धरसेना नाम के आचार्य ने ब्रह्मचारी को पत्र भेजा |
गुरुवर ने युग प्रतिक्रमण में ब्रह्मचारी को भेजा |
दो शिष्यों को विद्या दूँगा यह संदेशा भेजा |
तब मुनियों ने सोच-समझकर दो मुनि भेजे ज्ञानी |
जिननेश्रुत को प्रथम लिखा है ,उनकी सुनो कहानी |

भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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आलेख लेखन प्रतियोगिता


📒🗂✒🖌🔏🖋🖊 आलेख लेखन प्रतियोगिता

परमपूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से एक आलेख लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है । जिसमें आलेख का विषय है अहिंसा से विश्वशांति एवं पर्यावरण में शुद्धि लेख संबंधी ध्यान रखने योग्य बातें- 1 A4 साइज के पेपर पर अधिकतम 5 पेज का लेख आप लिख सकते हैं।* (पेज के दोनों तरफ न लिखें) 2- लेख स्पष्ट अक्षरों में अथवा कम्प्यूटर टाइप होना चाहिए । 3- अपना लेख 7 जून 2019 तक नीचे दिए गए पते पर भेज दें । पता- गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी संघ श्री पार्श्वनाथ दि . जैन मंदिर, टिकैतनगर जिला बाराबंकी (उ.प्र.)

भजन


वीरा वीरा, श्री महावीरा

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वीरा वीरा, श्री महावीरा, मेरे अतिवीरा, सन्मति शुभ नाम है।

सारे जग का सितारा वर्धमान है।। टेक.।।
हिंसा की तांडव लीला जब, सारे जग में छाई थी।
कुण्डलपुर नगरी में त्रिशला, के घर बजी बधाई थी।।
सिद्धारथ का, मनसिज हरषा, हुई रतन की वर्षा।
वीरा वीरा, श्री महावीरा, मेरे अतिवीरा, सन्मति तेरा नाम है।
सारे जग का सितारा वर्धमान है।।१।।
चैत्र सुदी तेरस के दिन जब, जन्मकल्याणक आया था।
स्वर्गों से इन्द्रों ने आकर, उत्सव खूब मनाया था।।
ऐरावत पर, तुमको लाकर, चला इन्द्र सह परिकर।
वीरा तुमको, सुमेरू पर्वत, की पांडुशिला पर, किया विराजमान है।
जन्म अभिषव कर पुकारा तेरा नाम है।।२।।

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ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


भारत गौरव गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के

दीक्षित जीवन के 66 चातुर्मास (1953-2018)

*वर्ष 1953 टिकैत नगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1954 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1955 महेश्वर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1956 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1957 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1958 ब्यावर (राजस्थान)

*वर्ष 1959 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1960 सुजानगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1961 सीकर (राजस्थान)

*वर्ष 1962 लाडनूं (राजस्थान)

*वर्ष 1963 कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

*वर्ष 1964 हैदराबाद (आंध्र प्रदेश)

*वर्ष 1965 श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)

*वर्ष 1966 सोलापुर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1967 सनावद (मध्य प्रदेश)

*वर्ष 1968 प्रतापगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1969 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1970 टोंक (राजस्थान)

*वर्ष 1971 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1972 दिल्ली (पहाड़ी धीरज)

*वर्ष 1973 दिल्ली (नजफगढ़)

*वर्ष 1974 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1975 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1976 खतौली (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1977 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1978 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1979 दिल्ली (मोरी गेट)

*वर्ष 1980 दिल्ली (कूचा सेठ)

*वर्ष 1981 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1982 दिल्ली (मोदी धर्मशाला)

*वर्ष 1983 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1984 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1985 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1986 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1987 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1988 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1989 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1990 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1991 सरधना (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1992 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1993 अयोध्या (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1994 टिकैतनगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1995 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1996 मांगी तुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1997 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1998 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1999 दिल्ली (कनॉट प्लेस)

*वर्ष 2000 दिल्ली (प्रीत विहार)

*वर्ष 2001 दिल्ली (अशोक विहार)

*वर्ष 2002 प्रयाग इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 2003 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2004 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2005 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2006 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2007 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2008 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2009 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2010 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2011 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2012 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2013 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2014 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2015 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2016 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2017 मुंबई (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2018 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

चातुर्मास के विषय में पढ़ें

आज का दिन - १९ जून २०१९ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक १९ जून,२०१९
तिथी- आषाढ़ कृष्ण २
दिन-बुधवार
वीर निर्वाण संवत- २५४५
विक्रम संवत- २०७६

सूर्योदय ०५.४६
सूर्यास्त १९.०९


अथ आषाढ़ मास फल विचार

भगवान आदिनाथ - गर्भ कल्याणक
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अयोध्या विहार 2018


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