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परम पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का ऋषभदेवपुरम् मांगीतुंगी से अयोध्या की ओर मंगल विहार चल रहा है |

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Jainudai (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित २२:५२, २६ जून २०१८ का अवतरण

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*महामहिम राष्ट्रपति जी ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी में*
22 अक्टूबर 2018
प्रमुख विषय


जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



ज्योतिष-वास्तु एवं मंत्र विद्या· जैन भूगोल· जैन इतिहास· श्रावक संस्कार· ग्रन्थ भण्डार

विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन की फ्लशिंग न्यूज़


विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन की झलकियां


माताजी का मंगल विहार अवध की ओर


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👣 मंगल महाविहार सूचना 👣
भगवान ऋषभदेव इंटरनेशनल अवार्ड


जन्मजयन्ती पर प्रस्तुत-


स्वर्णिम व्यक्तित्व की धनी ज्ञानमती माताजी

लेखिका - आर्यिका चन्दनामती
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कुन्दकुन्दान्वयो जीयात्, जीयात् श्री शांतिसागर:।

जीयात् पट्टाधिपस्तस्य, सूरि: श्री वीरसागर:।।
श्री ब्राह्मी गणिनी जीयात्, जीयादन्तिमचन्दना।

जीयात् ज्ञानमती माता, गणिन्यां प्रमुखा कलौ।।

जैनशासन के वर्तमान व्योम पर छिटके नक्षत्रों में दैदीप्यमान सूर्य की भाँति अपनी प्रकाश-रश्मियों को प्रकीर्णित कर रहीं पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर उठी लेखनी की अपूर्णता यद्यपि अवश्यंभावी है, तथापि आत्मकल्याण की भावना से पूज्य माताजी के श्रीचरणों में उनके दीर्घकालीन त्यागमयी जीवन के प्रति विनम्र विनयांजलिरूप मेरा यह विनीत प्रयास है।

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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी


चंदनामती माताजी केशलोंच करते हुए


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अष्टान्हिका व्रत


अष्टान्हिका व्रत

कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिन यह व्रत किया जाता है। सप्तमी तिथि से प्रतिपदा तक ब्रह्मचर्य व्रत धारण करना आवश्यक होता है, भूमि पर शयन, संचित पदार्थों का त्याग, अष्टमी को उपवास, रात्रि को जागरण आदि क्रियाएँ की जाती हैं। अष्टमी तिथि को दिन में नंदीश्वर द्वीप का मण्डल माँडकर अष्टद्रव्यों से पूजा की जाती है। पूजा-पाठ के अनन्तर नंदीश्वर व्रत की कथा पढ़नी चाहिए।
व्रत का समुच्चय मंत्र- ॐ ह्रीं नंदीश्वरद्वीपजिनालयस्थ जिनबिम्बेभ्यो नम:।
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श्री ज्ञानमती स्तुति:


गणिनीप्रमुख आर्यिकारत्न श्री ज्ञानमती स्तुति:

डॉ. पं. दामोदर जी शास्त्री, दिल्ली
छंद—शार्दूलविक्रीडित

यस्या आप्तजिनोक्तधर्मविषया श्रद्धा दृढा कीत्र्यते,
यज्ज्ञानं बहुशास्त्रवारिधि—तलस्र्पिश प्रसिद्धं भुवि।
चारित्रं च यदीयमस्ति विमलं तीर्थंकराज्ञानुगम् ,
भक्त्याहं प्रणमामि लोकमहितां तां ज्ञाज्ञमत्र्याियकाम्।।१।।

शास्त्राधीति परप्रबोधककथा व्याख्यानरूपादिभि:,
स्वाध्याय प्रमुखैस्तपोभिरखिलै: सच्चर्यया पूतया।
नित्यं स्वात्महिते रताऽपि कुरुते भव्योपकारं च या,
भक्त्याहं प्रणमामि लोकमहितां तां ज्ञानमत्र्याियकाम्

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भगवान महावीर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार 2018


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श्री पावापुरी जी सिद्ध क्षेत्र में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव सोल्लास संपन्न हुआ।

इस महोत्सव में पावापुरी जी का सर्वोच्च पुरस्कार भगवान महावीर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार 2018 बिहार के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय श्री नीतीश कुमार जी को प्रदान किया गया।

वीर गाँव के वीरसागर


‘‘वीर गाँव के वीरसागर’’

-ब्र. कु.इंदु जैन
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(महाराष्ट्र प्रांत के औरंगाबाद जिले में एक छोटे से कस्बे वीर नामक ग्राम में रामसुख नाम के एक श्रेष्ठी रहा करते थे। उन्होंने ‘‘भाग्यवती’’ नाम की धर्मपत्नी को पाकर मानो सचमुच ही राम जैसे सुख को प्राप्त कर लिया था। गंगवाल गोत्रीय ये दम्पत्ति श्रावक कुल के शिरोमणि थे। प्रतिदिन मंदिर में जाकर देवदर्शन करना, भक्ति, पूजा आदि उनके जीवन के आवश्यक अंग थे। बंधुओं! माता-पिता के संस्कार बालक के ऊपर आना स्वाभाविक बात है। एक रात्रि में भाग्यवती सुख की निद्रा में सोई हुई थीं, तभी रात्रि के पिछले प्रहर में उन्होंने स्वप्न में सफेद बैल को देखा और प्रसन्नमना हो उठी |

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भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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काव्य कथानक


माता मोहिनी और पुत्री मैना का संवाद

तर्ज-बार-बार तोहे क्या समझाऊँ.......

माता मोहिनी - बार-बार समझाऊँ बेटी, मान ले मेरी बात।
तेरे जैसी सुकुमारी की, दीक्षा का युग है न आज।।
मैना - भोली भाली माता मेरी, सुन तो मेरी बात।
हम और तुम मिलकर ही, युग को बदल सकते आज।।
माता मोहिनी - तूने तो बेटी अब तक, संसार न कुछ देखा है।
फिर भी मान लिया क्यों इसको, यह सब कुछ धोखा है।।
खाने और खेलने के दिन, क्यों करती बर्बाद।
तेरे जैसी सुकुमारी की, दीक्षा का युग है न आज।।१।।

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नवनिधि व्रत


नवनिधि व्रत

हस्तिनापुर में भगवान शांतिनाथ, भगवान कुंथुनाथ एवं भगवान अरनाथ ये तीन तीर्थंकर जन्मे हैं। ये तीनों ही तीर्थंकर तीन-तीन पद के धारक हुए हैं। ये ही इन तीनों तीर्थंकर भगवन्तों की एवं हस्तिनापुर तीर्थ की विशेषता है। इन तीनों तीर्थंकरों के तीन-तीन पदों की अपेक्षा यह ‘नवनिधि व्रत’ किया जाता है। इस व्रत के प्रभाव से नवनिधि-ऋद्धि से भंडार भरेगा। सर्व लौकिक संपत्ति के साथ-साथ अलौकिक आध्यात्मिक संपत्ति भी प्राप्त होगी।
आषाढ़, कार्तिक और फाल्गुन मास में आष्टान्हिक पर्व में एक दिन पहले सप्तमी से पूर्णिमा तक नवदिन व्रत करना-उत्तम विधि नव उपवास करना, मध्यम में अल्पाहार और जघन्य में एकाशन-एक बार शुद्ध भोजन करना है। व्रत के दिन भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरहनाथ तीर्थंकरों की समुच्चय पूजन या पृथक्-पृथक् पूजन करके उनके जीवन चरित्र को पढ़ना है।
समुच्चय मंत्र- ॐ ह्रीं अर्हं तीर्थंकर चक्रवर्ति कामदेव पद धारक शांतिनाथ - कुंथुनाथ - अरनाथ तीर्थंकरेभ्यो नम:।
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इन्द्रध्वज विधान


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ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास

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आज का दिन - २१ नवम्बर २०१८ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक २१ नवम्बर,२०१८
तिथी- कार्तिक शुक्ल १३
दिन-बुधवार
वीर निर्वाण संवत- २५४५
विक्रम संवत- २०७५

सूर्योदय ०६.५३
सूर्यास्त १७.२१


अथ कार्तिक मास फल विचार


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०-९ अं
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