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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ पू.माताजी की जन्मभूमि टिकैत नगर (उ.प्र) में विराजमान है |

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन |

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आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक


आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-१
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-२
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-३
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-४

और देखें...

मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष


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  • प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती श्री शांतिसागर जी अन्तर्राष्ट्रीय मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष-*
  • New Logo Launching*👆
  • इस लोगो* को आप अपनी *प्रिंटिंग सामग्री में उपयोग करें* और Whatsapp/Facebook के Profile आदि में भी उपयोग करके *शताब्दी वर्ष* के साथ जुड़े।
  • वर्ष की पावन प्रेरणास्रोत-*
  • भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ।🙏*
*राजकीय अतिथि सम्मान*


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🎉👑💐🎉👑💐🎉👑💐

सम्पूर्ण जैन समाज का बड़ा गौरव

————————————

  • उत्तरप्रदेश मंगल आगमन पर भारतगौरव गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के प्रति उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा 3 मार्च को राजकीय अतिथि सम्मान*-HONOUR OF STATE GUEST *समर्पित किया गया है।*👆

अतः पूज्य माताजी के चरणों में शत-शत नमन एवं उत्तरप्रदेश सरकार के *मुख्यमंत्री माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रति विनम्र आभार।*

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏


श्री दिगम्बर जैन अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी एवं समस्त गणिनी ज्ञानमती भक्तमण्डल।

विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन


७ अप्रैल को डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैज़ाबाद के संत कबीरदास सभागार में श्री ऋषभदेव जैन शोध पीठ द्वारा आयोजित विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन में परम पूज्य भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ ने अपना मंगल सानिध्य प्रदान किया |

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समाचार


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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी


सम्यग्ज्ञान पत्रिका


चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पूजन


रचयित्री-प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती

-स्थापना-

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पूजन करो रे,
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श्रीशान्तिसिन्धु आचार्य प्रवर की, पूजन करो रे-२।
भारतवसुन्धरा ने जब, मुनियों के दर्श नहिं पाये।
सदी बीसवीं में तब श्री, चारित्रचक्रवर्ती आए।।
दक्षिण भारत भोजग्राम ने, एक लाल को जन्म दिया।
उसने ही सबसे पहले, मुनिपरम्परा जीवन्त किया।।
मुनिपरम्परा जीवन्त किया।।
पूजन करो रे,
श्रीशान्तिसिन्धु आचार्य प्रवर की, पूजन करो रे-।
ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती श्रीशान्तिसागरप्रथमाचार्यवर्य ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती श्रीशान्तिसागरप्रथमाचार्यवर्य ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनं।
ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती श्रीशान्तिसागरप्रथमाचार्यवर्य ! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणम्।

क्रमशः

चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर चालीसा


रचयित्री-प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती
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-दोहा-

सन्मति शासन को नमूँ, नमूँ शारदा सार।

कुन्दकुन्द आचार्य की, महिमा मन में धार।।१।।

इसी शुद्ध आम्नाय में, हुए कई आचार्य।
सदी बीसवीं के प्रथम, शान्तिसागराचार्य।।२।।

ये चारित चक्री मुनी, गुरूओं के गुरू मान्य।
चालीसा इनका कहूँ, पढ़ो सुनो कर ध्यान।।३।।

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गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी मंगल विहार सूचना


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  • जन्मभूमि पर जन्म जयंती* चैत्र शुक्ला त्रयोदशी दिनांक 17 अप्रैल 2019 को जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जन्म जयंती परम पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सानिध्य में परमपूज्य श्री ज्ञानमती माताजी की जन्मभूमि टिकैतनगर जिला बाराबंकी में बड़े ही हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई । जिसमें प्रातः 6:00 भगवान महावीर मंदिर में भगवान महावीर की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक और शांति धारा हुई तत्पश्चात पूज्य माताजी ने भगवान महावीर के जीवन परिचय से पारस चैनल के माध्यम से सभी भक्तों को परिचित कराया।
  • मध्यान्ह 1:00 बजे* भगवान महावीर को रथ में विराजमान कर पूरे नगर में रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा में भक्तों को परम पूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामति माताजी का सानिध्य प्राप्त हुआ । पश्चात नगर के चौराहे पर पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने अपनी मंगलमय वाणी के माध्यम से भगवान महावीर का संदेश जैन और जैनेत्तर समाज तक पहुँचाया । पूज्य चंदनामती माताजी ने एक काव्य कथानक के माध्यम से भगवान महावीर के परिचय से सभी को अवगत कराया । कार्यक्रम के अंत में आर्यिका श्री स्वर्णमती माताजी ने भी एक सुंदर भजन के माध्यम से टिकैतनगर समाज की पूज्य माताजी के प्रति भक्ति को दर्शाते हुए सभी को प्रेरणा प्रदान की कि सभी श्रावक आर्ष परम्परा को जीवंत रखे और त्याग में आगे बढ़ें।

कार्यक्रम के मध्य में ही टिकैत नगर निवासी अयोध्या में भगवान सुमतिनाथ का मंदिर बनवाने वाले श्रीमान अतुल जी जैन राधा जैन एवं अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी की ओर से पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती गुरु मां को *मनोकामना सिद्धि मां* की उपाधि से अलंकृत कर उनके करकमलों में प्रशस्ति भेंट की । पीठाधीश स्वस्ति श्री रवीन्द्रकीर्त स्वामी जी को भी प्रशस्ति देकर *कुशल शिल्पी* की उपाधि से सम्मानित किया । जुलूस वापस आने के बाद भगवान महावीर मंदिर में भगवान महावीर की प्रतिमा का अभिषेक किया गया एवं फुलमाल पच्चीसी गाकर भगवान को अर्घ्य चढाया गया

  • रात्रि* में भगवान महावीर की आरती हुई और पालना का कार्यक्रम भी आयोजित हुआ नगर के बच्चों द्वारा जन्मजयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए ।
महामस्तिकाभिषेक की झलक !


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भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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डाक्यूमेंट्री


ऋषभगिरि (महा.) डाक्यूमेंट्री क्लिप

भजन


अयोध्यापुरी में मस्तकाभिषेक



अयोध्यापुरी में मस्तकाभिषेक

जय-जय आदिनाथ जी-२।
पूर्व दिशा में सूरज जैसे......ऽऽ
मरुदेवी मां के सुत जैसे......ऽऽ
नाभिराय प्रभु तात श्री,
जय-जय आदिनाथ जी।। अयोध्यापुरी में......।।१।।
तीर्थंकर बन तीर्थ चलाया......ऽऽ
धर्म तीर्थ का अर्थ बताया......ऽऽ
बने ऋषभ भगवान जी
जय-जय आदिनाथ जी।। अयोध्यापुरी में......।।२।।
वृषभेश्वर की ऊँची प्रतिमा......ऽऽ
कहती मानो निज गुण गरिमा......ऽऽ
महिमा अपरम्पार जी,
जय-जय आदिनाथ जी।। अयोध्यापुरी में......।।३।।
ज्ञानमती माताजी के मन में......ऽऽ
इक विचार आया चिन्तन में......ऽऽ
होवे तीर्थ प्रचार जी,
जय-जय आदिनाथ जी।। अयोध्यापुरी में......४।।
ब्राह्मी माँ का रूप है मानो......ऽऽ
इनको जिनवर कन्या मानो......ऽऽ
युग निर्मात्री मातश्री,
जय-जय आदिनाथ जी।। अयोध्यापुरी में......।।५।।

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प्रेरक विचार


नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर...

ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास

Chaturmas1953-2018.jpg


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आज का दिन - १८ अप्रैल २०१९ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक १८ अप्रैल,२०१९
तिथी- चैत्र शुक्ल १४
दिन-गुरुवार
वीर निर्वाण संवत- २५४५
विक्रम संवत- २०७५

सूर्योदय ०६.१०
सूर्यास्त १८.४४


अथ चैत्र मास फल विचार

दश लक्षण व्रत पूर्ण
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अयोध्या विहार 2018


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