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रक्षा बंधन भजन
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जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



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चातुर्मास सूची 2020
चतुर्मास सूची 2020
आचार्य परमेष्ठि स्थान
आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज ससंघ रेवती रेंज, इंदौर (म.प्र.)
आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ससंघ बेलगांव (कर्णाटक)
आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ससंघ (दक्षिण) सतना (म.प्र.)
गणधराचार्य श्री कुंथु सागर जी महाराज ससंघ कुंथुगिरी (महाराष्ट्र)
गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ससंघ पुष्पगिरी तीर्थ, सोनकच्छ (म.प्र.)
गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज ससंघ भिण्ड (म.प्र.)
गणाचार्य श्री सिद्धांत सागर जी महाराज ससंघ बेला जी, दमोह (म.प्र.)
आचार्य श्री संभव सागर जी महाराज ससंघ त्रियोग आश्रम, श्री सम्मेद शिखर जी (झारखण्ड)
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दशलक्षण धर्म

दशलक्षण धर्म

यह भादों मास सभी महीनों, में राजा है उत्तम जग में।

यह धर्म हेतु है और अनेक, व्रत रत्नों का सागर सच में।।

यह महापर्व है दशलक्षण, दशधर्म मय मंगलकारी।

रत्नत्रय निधि को देता है, सोलहकारणमय सुखकारी।।

उत्तम क्षमा

सब कुछ अपराध सहन करके, भावों से पूर्ण क्षमा करिये।

यह उत्तम क्षमा जगन्माता, इसकी नितप्रति अर्चा करिये।।
कमठासुर ने भव भव में भी, उपसर्ग अनेकों बार किया।
पर पाश्र्वप्रभू ने सहन किया, शान्ति का ही उपचार किया।।१।।

क्या बैर से बैर मिटा सकते, क्या रज से रज धुल सकता है?
क्या क्रोध से भी शान्ति मिलती, क्या क्रोध सुखी कर सकता है?
यदि अपकारी पर क्रोध करो, तो क्रोध महा अपकारी है।
इस क्रोध पे क्रोध करो बंधु, यह शत्रु महा दुखकारी है।।२।।

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अकम्पनाचार्यादि सात सौ मुनियों की पूजन

अकम्पनाचार्यादि सात सौ मुनियों की पूजन

रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर *अकंपनाचार्य आदि 700 मुनियोंकी पूजन* अवश्य करें प्रेरणा:-गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी

तर्ज - धीरे-धीरे बोल कोई सुन ना ले.

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स्थापना

सात शतक मुनिवरों की अर्चना करूँ, अर्चना करूँ इनकी वंदना करूँ।
ये अकम्पनाचार्यादि थे, उपसर्गजयी मुनिराज थे।।सात शतक.।।टेक.।।

हस्तिनागपुर नगरी के उद्यान में,
एक बार इन मुनि के चातुर्मास थे।
अग्नी का उपसर्ग किया बलि आदि ने,
दूर किया उपसर्ग विष्णु मुनिराज ने।।
वे सब मुनी, ध्यानस्थ थे, निज आत्म में, अनुरक्त थे।
उनके पद में वन्दन करूँ, उन मुनियों का अर्चन करूँ।।सात.।।१।।

रक्षाबंधन पर्व तभी से चल गया,
यति रक्षा का भाव हृदय में भर गया।
उनकी पूजन हेतू स्थापना किया,
पुण्य हाथ में लेकर आह्वानन किया।।
वे सब मुनी, ध्यानस्थ थे, निज आत्म में, अनुरक्त थे।
उनके पद में वंदन करूँ, उन मुनियों का अर्चन करूँ।।सात.।।२।।


ॐ ह्रीं उपसर्गविजयि-अकम्पनाचार्यादिसप्तशतकमुनिसमूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं उपसर्गविजयि-अकम्पनाचार्यादिसप्तशतकमुनिसमूह! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं।
ॐ ह्रीं उपसर्गविजयि-अकम्पनाचार्यादिसप्तशतकमुनिसमूह! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।


पूरी पूजा पढ़ें
विष्णुकुमार महामुनि पूजा पढ़ें

णमोकार भजन

तर्ज—तन डोले......

णमोकार बोलो, फिर आँख खोलो, सब कार्य सिद्ध हो जाएँगे,

नर जन्म सफल हो जाएगा।। टेक.।।

प्रात:काल उषा बेला में, बोलो मंगल वाणी।
हर घर में खुशियाँ छाएँगी, होगी नई दिवाली।। हे भाई......
प्रभु नाम बोलो, निजधाम खोलो, सब कार्य सिद्ध हो जाएँगे।
नर जन्म सफल हो जाएगा।। णमोकार ......।।१।।

परमब्रह्म परमेश्वर की, शक्ती यह मंत्र बताता।
णमोकार के उच्चारण से, अन्तर्मन जग जाता।। हे भाई......
नौ बार बोलो, सौ बार बोलो, सब कार्य सिद्ध हो जाएँगे,
नर जनम सफल हो जाएगा।। णमोकार ......।।२।।

ॐ शब्द का ध्यान ‘चंदना-मति’ मन स्वस्थ बनाता।
इसके ध्यान से मानव इक दिन, परमेष्ठी पद पाता।। हे भाई......
नौ बार बोलो, सौ बार बोलो, सब कार्य सिद्ध हो जाएँगे।
नर जनम सफल हो जाएगा।। णमोकार ......।।३।।

पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन

कुछ नए प्रजेंटेशन्स

सम्यग्ज्ञान पत्रिका
जम्बूद्वीप समाचार
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दशलक्षण धर्म पूजा

प्रबन्ध सम्पादक की कलम से

वर्षायोग २०२०

जैन संतों के चातुर्मास में आप के कर्तव्य-
जैन मुनि आर्यिका क्षुल्लक क्षुल्लिका आदि चतुर्विध संघ वर्षा ऋतु में एक जगह रहने का नियम कर लेते हैं। अन्यत्र बिहार नहीं करते हैं, इसलिए इसे वर्षायोग कहा है तथा श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक इन 4 महीने पर्यंत एक जगह रहना होता है। अतः इसे चातुर्मास भी कहते हैं।

जैसा कि सभी को विदित है कि देश की सर्वोच्च साध्वी गणिनी आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास हस्तिनापुर की पावन धरा पर चल रहा है। सभी का बहुत पुण्य है कि ऐसी साध्वी का आशीर्वाद हम सभी को पारस चैनल के माध्यम से प्रतिदिन प्रात: ६ बजे से ७ बजे तक प्राप्त होता है और दिन प्रतिदिन नए-नए महोत्सव भी होते रहते हैं।

अभी आष्टान्हिका पर्व में पूज्य माताजी के सानिध्य में इंद्रध्वज महामंडल विधान का आयोजन हुआ। श्रावण मास के शुक्लपक्ष सप्तमी को भगवान पार्श्वनाथ का मोक्षकल्याणक पूज्य माताजी की प्रेरणा से धूमधाम से मनाया जाएगा। सभी लोग अपने-अपने मंदिरों में निर्वाण लाडू चढ़ाएं और पुण्य अर्जन करें।

कुछ ही दिनों बाद रक्षाबंधन पर्व आने वाला है यह पर्व हस्तिनापुर की धरती से प्रारंभ हुआ। रक्षाबंधन के कुछ दिन पूर्व पूज्य माताजी की प्रमुख शिष्या प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी का दीक्षा दिवस श्रावण शुक्ला ग्यारस को आ रहा है। इसी धरा पर पूज्य माता जी ने पहली बार अपने केशोंं का लोचन किया था। सभी लोग पूज्य माताजी का दीक्षा दिवस धूमधाम से मनाएं।

इसके पश्चात भाद्रपद महीने में दशलक्षण पर्व के पावन अवसर पर अपने नगरों एवं शहरों में मंदिरों में विधान पूजा सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि का आयोजन करें। यह दश धर्म बहुत ही पवित्र और पावन होते हैं। सभी लोग खूब पूजा आहार आदि देकर अपने जीवन को सफल बनाएं। जहां-जहां भी साधु संत का चातुर्मास चल रहा है, प्रयास करके वहां जाकर साधु को आहार दान शास्त्रदान वैय्यावृत्ति आदि करके अपने पुण्य को जागृत करें और ऐसी धरती को नमन करें जहां पर शांतिनाथ - कुंथुनाथ - अरहनाथ भगवान के चार-चार कल्याणक हुए हैं एवं ऐसी सरस्वती स्वरूपा माता को नमन करें जिन्होंने देश को ही नहीं पूरे विश्व को अपने ज्ञान से सभी को अभिसिंचित कर रही हैं। ऐसी माता के चरणों में कोटिश: नमन करते हुए सभी के लिए मंगल कामना।

प्रबंध सम्पादिका (ब्र0 दीपा जैन)

रत्नत्रय पूजा

रत्नत्रय पूजा

[रत्नत्रय व्रत में]

-अथ स्थापना (गीता छंद)-

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वर रत्नत्रय जिनधर्म हैं, सम्यक्त्वरत्न प्रधान है।
अष्टांगयुत सम्यक्त्व है, सम्पूर्ण गुण की खान है।।
आचार आठ समेत सम्यग्ज्ञान रत्न महान है।
तेरह विधों युत रत्न सम्यक्-चरित पूज्य निधान है।।


-दोहा-


भरतैरावत क्षेत्र में, चौथे पाँचवें काल।
शाश्वत रहे विदेह में, धर्म जगत प्रतिपाल।।२।।


ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मक धर्म! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मक धर्म! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं।
ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मक धर्म! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।


-अष्टक-

चाल-नन्दीश्वर पूजा


रेवानदि को जल लाय, कंचन भृंग भरूँ।
त्रयधार करूँ सुखदाय, आतम शुद्ध करूँ।।
जिनधर्म विश्व का धर्म, सर्व सुखाकर है।
मैं जजूँ सार्वहित धर्म, गुण रत्नाकर है।।१।।

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ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मकधर्माय जलं निर्वपामीति स्वाहा।
पूरी पूजा पढ़ें

आज का दिन - ३ अगस्त २०२० (भारतीय समयानुसार)
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दिनाँक ३ अगस्त २०२०
तिथी- श्रावण शुक्ल १५/पूर्णिमा
दिन- सोमवार
वीर निर्वाण संवत- २५४६
विक्रम संवत- २०७७

सूर्योदय ०६.०१
सूर्यास्त १९.०५

भगवान श्रेयांसनाथ - मोक्ष कल्याणक
अथ श्रावण मास फल विचार

रक्षाबंधन
षोडशकारण व्रत प्रारम्भ
मेघमाला व्रत प्रारम्भ
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०-९ अं
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