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हे रत्नमती मात तूमने कर दिया कमाल
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जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



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रत्नों की खान आर्यिका श्री रत्नमती माताजी


पूज्य आर्यिका श्री रत्नमती माताजी का परिचय

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आदिब्रह्मा भगवान ऋषभदेव की जन्मभूमि अयोध्या और उसके आस-पास के क्षेत्र को भी अवध के नाम से जाना जाता है । वैसे इन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और उनके प्रथम पुत्र चक्रवर्ती सम्राट् भरत के समय वह अयोध्या नगरी १२ योजन लम्बी थी अत: ९६ मील होने से लखनऊ, टिकैतनगर, त्रिलोकपुर, बाराबंकी, महमूदाबाद आदि नगर उस समय अयोध्या नगरी की पवित्र भूमि की सीमा में विद्यमान थे । वस्तुत: आज भी अयोध्या तीर्थ की पवित्रता से सम्पूर्ण अवध का वातावरण सुवासित, धर्मपरायण एवं परम पवित्र है ।

अवधप्रान्त के महमूदाबाद में हुआ था जन्म

उसी अवधप्रान्त के जिला सीतापुर के अन्तर्गत महमूदाबाद नामक एक नगर है, जहाँ विशाल जिनमंदिर के निकट वर्तमान में ६०-७० जैन घर हैं । उसी नगरी में एक सुखपालदास जी नाम के श्रेष्ठी निवास करते थे । अग्रवाल जातीय लाला सुखपालदास जी की धर्मपत्नी का नाम मत्तोदेवी था । पूरे नगर में धर्मात्मा के रूप में प्रसिद्ध सुखपालदास जी भगवान की नित्य पूजन के साथ-साथ स्वाध्याय भी करते थे । सात्त्विक प्रवृत्ति वाले इन महामना श्रावक की धर्मपत्नी भी पतिव्रता आदि गुणों से सहित धर्मपरायण एवं अत्यन्त सरल प्रकृति की थीं।

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विधान


इन्द्र ध्वज विधान

सिद्धचक्र विधान

भगवान श्री महावीर जिनपूजा


मनोकामना सिद्धि विधान

मंगलाचरण

शंभु छंद

प्रभु महावीर इस युग के अंतिम, तीर्थंकर उनको वंदूँ।
है वर्तमान में उनका शासन-काल उन्हें नितप्रति वन्दूँ।।
हैं पाँच नाम से युक्त तथा, वे पंचम बालयती भी हैं।
पंचांग प्रणाम करूँ उनको, पंचमगति प्रभु को प्राप्त हुई।।१।।

छब्बिस सौ वर्षों पूर्व उन्होंने, जन्म लिया कुण्डलपुर में।
इस हेतू प्रभु का छब्बिस सौवां, जन्मकल्याण मना जग में।।
प्रभु महावीर के २६०० वें, जन्मकल्याणक वर्ष में ही।
गणिनी श्री ज्ञानमती माता ने, महाविधान रचा सच ही।।२।।

इसमें छब्बिस सौ मंत्रों के, द्वारा प्रभुवीर की पूजा है।
यह ‘‘विश्वशांति महावीर विधान’’ अलौकिक और अनूठा है।।
इनमें से ही इक शतक आठ, मंत्रों के मोती चुन करके।
इक महावीर व्रत बतलाया, माता श्री ज्ञानमती जी ने।।३।।

इस मनोकामनासिद्धी व्रत की, चारों तरफ प्रसिद्धि हुई।
इस व्रत को करने वाले भक्तों की इच्छाएँ पूर्ण हुई।
मैंने भी प्रभु महावीर की भक्तीवश इस व्रत को ग्रहण किया।
कुण्डलपुर यात्रा की इच्छा को, चार व्रतों ने सफल किया।।४।।



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अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर एवं दीपावली पर्व


अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर एवं दीपावली पर्व

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जैनधर्म के अन्तिम चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म २६१८ वर्ष पूर्व बिहार प्रान्त के ‘‘कुण्डलपुर’’ नगरी के राजा सिद्धार्थ की महारानी त्रिशला की पवित्र कुक्षि से चैत्र शुक्ला त्रयोदशी तिथि में हुआ । वीर, महावीर, सन्मति, वर्धमान और अतिवीर इन पांच नाम से विख्यात तीर्थंकर महावीर बाल ब्रह्मचारी थे, जिनके गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष इन पंचकल्याणकों को मनाकर सौधर्म इन्द्रादि देवों ने अपने को धन्य-धन्य माना था ऐसे प्रभु महावीर ने तीस वर्ष की युवावस्था में पूर्व भव के जातिस्मरण हो जाने से जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर ली और उनका प्रथम आहार ‘‘कूल ग्राम’’ में राजा कूल के यहां हुआ । दीक्षा के १२ वर्ष पश्चात् प्रभु को दिव्य केवलज्ञान की प्राप्ति हुई उसी बीच में किसी एक दिन भगवान महावीर ‘‘कौशाम्बी’’ नगरी में आहार के लिए पहुंचे । वहां राजा ‘चेटक’ की सबसे छोटी पुत्री ‘‘चन्दना’’ एक सेठानी के द्वारा सताई हुई साकलों में बंधी थी और कोदों का तुच्छ भोजन ग्रहण करती थी किन्तु भगवान महावीर को देखते ही उसने भक्तिपूर्वक उनका पड़गाहन किया जिसके प्रभाव से सारे बंधन टूट गए, वह वस्त्राभूषणों से सुन्दर हो गई और कोदों का चावल ‘‘शालि’’ धान्य में परिवर्तित हो गया पुन: चन्दना ने श्रद्धा सहित भगवान महावीर को आहारदान दिया और देवताओं ने उस समय रत्नवृष्टि कर दान का महत्त्व प्रर्दिशत किया ।


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पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन


कुछ नए प्रजेंटेशन्स

सम्यग्ज्ञान पत्रिका


समाचार


घर बैठे करें ज्ञान का अर्जन

प्रतिदिन सायं 6:30 बजे से जूम एप पर जम्बूद्वीप के विभिन्न मंदिरों एवं पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की मंगल आरती

तत्पश्चात

सायं 7 बजे से जैन धर्म का प्रारम्भिक ज्ञान [Basic Knowledge of Jainism] की कक्षा में अवश्य भाग लें ।

*Zoom app link-*

Meeting Id - 87106540812

Password- 123456

विशेष सूचना - जैन धर्म का प्रारम्भिक ज्ञान की कक्षा का सीधा प्रसारण सायं 7 बजे से YouTube के Ganini Gyanmati चैनल पर भी किया जाता है । अत: आप जूम अथवा यूट्यूब के माध्यम से जुड़कर इस कक्षा में भाग ले सकते हैं ।

नंदीश्वर पूजा का आयोजन


कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी अष्टान्हिका पर्व के शुभ अवसर पर 29-11-2020 के दिन जंबूद्वीप हस्तिनापुर में चल रहे इंद्रध्वज महामंडल विधान में नंदीश्वर द्वीप के बावन अकृत्रिम जिनालयों की पूजा संपन्न होगी। गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से जंबूद्वीप हस्तिनापुर में निर्मित स्वर्णिम तेरहद्वीप की रचना में चारों दिशाओं में 13 -13 ऐसे बावन जिनालयों के सामने श्रीफल चढ़ाकर पूजा संपन्न होगी। तो आप भी इस पूजा में घर बैठे सम्मिलित हो सकते हैं, मात्र 5200/- की राशि में। विधान में नाम लिखवाने के लिए संपर्क नंबर:-

📱09717331008, 📱 07060049160, 📱 07895712431.

जो महानुभाव विधान में अपना नाम लिखवाएंगे उनका नाम 📺पारस चैनल के सीधे प्रसारण में प्रातः 6:00 बजे से होने वाली शांतिधारा में लिये जाएंगेे। देखे पूजन का दृश्य 30-11-2020 प्रातः 6:00 बजे से पारस चैनल पर🎥। Whatsapp number 7️⃣5️⃣9️⃣9️⃣0️⃣0️⃣2️⃣1️⃣0️⃣8️⃣

विधान फोटोज


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वास्तु


घर का वास्तु कैसा हो

प्रस्तुति - पवन जैन पापड़ीवाल ( वास्तुशास्त्री )- औरंगाबाद ( महाराष्ट्र )

।। श्री वीतरागाय नमः ।।

आज के इस भागदौड की जिंदगी में इन्सान का सबसे बड़ा और सबसे सुंदर सपना (ख्वाब) होता है उसका एक छोटा सा प्यारा सा अपना एक घर ! बहुत बार ऐसा होता है कि अपनी जिंदगी की पूरी कमाई लगाने के बावजूद उसकी जिंदगी की शाम होने तक वो दो,तीन कमरे का ही मकान बना पाता है, लेकिन उसी छोटे से, प्यारे से अपने घर में अगर उसे सुख,शांती, समृद्धि मिले तो उसका मन बागबाग हो उठता है । इस तरह सोचना ये एक सहज (Normal) बात है ।

कुछ लोगों को तो ये सुख मिल पाता है पर कुछ लोग इन खुशियो से कोसों दूर दिखाई देते हैं । कोई गलती न होते हुए भी ईमानदारी से पूरी कोशिश करने के बावजूद उन्हें यह खुशी नही मिल पाती । ऐसे समय हमारी कहीं कोई गलती हो रही है क्या, हम कहीं पर चूक रहे हैं क्या, ये बात मन में आना भी सहज है । हमें हमारे इन सवालों का जवाब मिल सकता है । हमारे प्यारे से घर में जहां हमने सपने देखे, जिस घ रको, वास्तु को हमने अपने हाथो से संजोया,उस वास्तु में किसी प्रकार की त्रुटि रह गई हो तो जिसके बदलाव से हमारा जीवन एक नई मंजिल की ओर अपने कदम बढ़ा सकता है । हमारी एक छोटी सी कोशिश, एक छोटा सा बदलाव हमारी पूरी जिंदगी का रूप पलटकर रख सकता है ।

क्रमश:...

Jain Alphabet


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आज का दिन - ४ दिसम्बर २०२० (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक ४ दिसम्बर २०२०
तिथी- मार्गशीर्ष कृष्ण ४
दिन- शुक्रवार
वीर निर्वाण संवत- २५४७
विक्रम संवत- २०७७

सूर्योदय ०६.५५
सूर्यास्त १७.३७


अथ मार्गशीर्ष मास फल विचार



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०-९ अं
परिमार्जित क्ष त्र ज्ञ श्र अः


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