Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


पू० गणिनी श्रीज्ञानमती माताजी ससंघ मांगीतुंगी के (ऋषभदेव पुरम्) में विराजमान हैं |

मुख्यपृष्ठ

ENCYCLOPEDIA से
Jainudai (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित ००:०९, १९ जून २०१७ का अवतरण

यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
जैन इनसाइक्लोपीडिया
जैन विश्वकोश
जैनधर्म के ज्ञान का महासागर




डिप्लोमा इन जैनोलोजी

आनलाइन फॉर्म भरने के लिए यहाँ क्लिक करें...
गोम्मटसार प्रवचन

लाइव टी वी
प्रमुख विषय

जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



ज्योतिष-वास्तु एवं मंत्र विद्या· जैन भूगोल· जैन इतिहास· श्रावक संस्कार· ग्रन्थ भण्डार

गणिनी प्रमुख आर्यिकाश्री ज्ञानमती माताजी ससंघ द्वारा महाराष्ट्र तीर्थ दर्शन की झलकियाँ

अन्य चैनलों से समाचार झलक देखें

विहार अपडेट

मंगल पदार्पण

21457786 2019253628294966 2207733459455641104 o.jpg

धर्मप्रेमी गुरुभक्तों!

हम सभी के महान पुण्योदय से सर्वोच्च जैन साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का महाराष्ट्र तीर्थ यात्रा हेतु मंगल विहार सानंद सम्पन्न हुआ।

पूज्य माताजी संघ ने पूरे 9 माह में लगभग 1500 किमी. की तीर्थ यात्रा करके अनेक तीर्थों के दर्शन का पुण्य अर्जित किया। साथ में पूज्य माताजी के सान्निध्य में औरंगाबाद, नाशिक, मुम्बई, सूरत जैसे महानगरों में ऐतिहासिक धर्मप्रभावना के अनेकानेक आयोजन सम्पन्न हुवे।

इस महाराष्ट्र तीर्थ यात्रा को सम्पन्न करते हुए पूज्य माताजी का मंगल पदार्पण 7 दिसम्बर को प्रातः 8 बजे ऋषभदेवपुरम-माँगीतुँग़ी में हो गया है ।

अतः आप सभी भक्तगण दिसंबर में आकर पुण्य लाभ अर्जित करे, ऐसा निवेदन है।

निवेदक-108 फ़ुट भगवान ऋषभदेव मूर्ति निर्माण कमेटी-माँगीतुँग़ी।

"खानदान और खानपान शुद्धि का महत्त्व
'खानदान और खानपान शुद्धि का महत्त्व-
-पं. शिवचरनलाल जैन, मैनपुरी (उ.प्र.)
वन्दे धर्मतीर्थेशं, श्रीपुरुदेवपरम् जिनम्।

दानतीर्थेशश्रेयासं चापि शुद्धिप्रदायकम्।।
जातिकुलशुद्धिमादाय, अशनपानपवित्रताम्।

परमस्थानसंप्राप्ता: विजयन्तु परमेष्ठिन:।।स्वोपक्ष।।

मैं धर्मतीर्थ, व्रत तीर्थकर्ता उत्कृष्ट प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान और शुद्धि प्रदायक दानतीर्थेश श्रेयांस को प्रणाम करता हूँ। जिन्होंने जाति, कुल शुद्धि और भोजनपान की शुद्धि प्राप्त कर सप्त परमस्थानों सहित मोक्षपद को प्राप्त किया है, वे परमेष्ठी जयवन्त हों। मानव जीवन में खानदान और खानपान शुद्धि का अत्यधिक महत्व है । नि:श्रेयस और लौकिक अभ्युदय दोनों ही दृष्टियों से यह मान्य है । प्रत्यक्ष, आगम और अनुमान तीनों ही प्रमाणों से यह प्रमाणित होता है । यह सर्वत्र दृष्टिगत होता है कि प्राय: उच्च वर्ण, जाति, गोत्र-कुल वाले श्रेष्ठ कार्यों को सम्पादित करते हुए प्रतिष्ठा को प्राप्त होते हैं। ज्ञान, ध्यान, तप की योग्यता भी श्रेष्ठ खानदान की अपेक्षा रखती है । मोक्षमार्ग में इसकी अनिवार्यता है

और पढ़ें

सम्पादकीय

‘‘दिगम्बर जैन प्रोफेशनल फोरम’’ के उद्घाटन अवसर पर प्रस्तुत

Professional की सही परिभाषा मेरी दृष्टि में
-आर्यिका चन्दनामती

    जैसे सरोवर की शोभा कमल से होती है, पक्षी की शोभा उसके पंखों से है, भोजन की शोभा नमक से होती है, नारी की शोभा शील से होती है, सुन्दर गीत सुरीले कंठ से सुशोभित और आकर्षक बन जाता है, सर्वोदयी विश्वधर्म भी अहिंसा के पालन से ही शोभायमान एवं विश्ववंद्य होता है, भारत की शोभा आध्यात्मिक संतों से वृद्धिंगत होती है उसी प्रकार हमारे धर्मप्राण भारतीय समाज की शोभा विशिष्ट बुद्धिजीवियों से है।

    आप सभी दिगम्बर जैन समाज के विशेष बुद्धिजीवी व्यक्तित्व के रूप में पधारे हैं। आज की यह Conference मुम्बई DJPF अर्थात् Digambar Jain Professional Forum दिगम्बर जैन प्रोफेशनल फोरम के द्वारा organized है। पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से निर्मित इस फोरम के सभी Executive Members विशेष आशीर्वाद एवं बधाई के पात्र हैं। उन्हें इस फोरम के द्वारा आगे निरन्तर सामाजिक संगठन-एकता एवं जैनधर्म के संरक्षण आदि के कार्य करते हुए अपनी युवा शक्ति का सृजनात्मक (Constructive) परिचय देना है।

और पढ़ें...
गाय की रक्षा और हमारा कर्तव्य

गाय की रक्षा और हमारा कर्तव्य

गाय नाम के प्राणी को आज के समय में हर कोई, जल्दी से माता कहने, मानने के लिए तैयार तो हो जाते हैं , परंतु वास्तविक रूप से उसे माता स्वरूप मानकर उसका रक्षण या पालन—पोषण करने के लिए बहुत कम लोग तैयार होते हैं । सुबह में, दोपहर में या शाम को अगर हम चाय, काफी या दूध पीते हैं तो, निश्चित रूप से हमें यह जानना चाहिए की चाय, कॉफी में मिक्स किया हुआ ‘दूध’ गाय, भैंस और बकरी जैसे प्राणियों का होता है, जिसे डेयरी प्रोडक्ट के रूप में दूध उत्पादक डेरी से प्राप्त करते हैं। मनुष्य जाति में स्त्री जब बच्चा पैदा करती है तब उस बच्चे को स्त्री अपने स्तन में से ‘दुग्ध’ रूपी प्रवाही, जो बच्चे के लिए अमृत स्वरूप है—पिलाकर जीवित रखती है। उसी तरह अगर कोई भी मनुष्य किसी प्राणी में मादा (नारी जाती) प्राणी का ‘दुग्ध’ पीता है तो वह मादा प्राणी भी ‘माता’ समान ही कहलाती है। हम मनुष्य लोग हर रोज गाय, भैंस, बकरी जैसे मादा प्राणी के स्तन से निकला हुआ दूध पीते हैं,

.और पढ़ें


श्री वासुपूज्य पूजा

मंगलग्रह अरिष्ट निवारक

VasupujyaSwami.jpg
-दोहा-
Cloves.jpg
Cloves.jpg

वासुपूज्य जिनराज की, करूँ थापना आज।
मंडल पर तिष्ठो प्रभो, पूरो मेरे काज।।


ॐ ह्रीं मंगलग्रहारिष्टनिवारकश्रीवासुपूज्य जिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं मंगलग्रहारिष्टनिवारकश्रीवासुपूज्य जिनेन्द्र! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनं।
ॐ ह्रीं मंगलग्रहारिष्टनिवारकश्रीवासुपूज्य जिनेन्द्र! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं स्थापनं।

और पढ़े

जाति और वर्ण
आर्यिका श्री सुपार्श्वमती माताजी ( समाधिस्थ )

शास्त्रकारों ने ‘जाति’ शब्द का प्रयोग तीन अर्थों में किया है। एक अर्थ है-नाम कर्म के उदय से होने वाली जाति, जैसे-गतिजातिशरीरांगोपांग.......इत्यादि। इसके पाँच भेद हैं-१. एकेन्द्रिय जाति, २. द्वीन्द्रिय जाति, ३. त्रीन्द्रिय जाति, ४. चतुरिन्द्रिय जाति, ५. पंचेन्द्रिय जाति। इसमें पंचेन्द्रिय जाति की अपेक्षा मानव, देव, नारकों और पंचेन्द्रिय तिर्यंचों की जाति एक ही है। जाति का दूसरा अर्थ योनि है जिसके कुल चौरासी लाख भेद हैं। सात लाख प्रश्नीकाय, सात लाख जलकाय, सात लाख नित्य-निगोद, दस लाख वनस्पतिकाय, दो लाख दो इन्द्रिय, लाख तीन इन्द्रिय, दो लाख चतुरिन्द्रिय, चार लाख पंचेन्द्रिय पशु, चार लाख देव, चार लाख नारकी, चौदह लाख मनुष्य आदि। आठ मदों में एक जातिमद भी है, इसमें पिता की वंश-शुद्धि को कुल और माता की अन्वयशुद्धि को जाति कहा है। यह जाति का तीसरा अर्थ है।

जैन शास्त्रों में जाति और वर्ण का पृथक्-पृथक् उल्लेख मिलता है। यद्यपि कोई-कोई विचारक दोनों को एक मानते हैं परन्तु आदिपुराण के अनुसार जाति और वर्ण में अन्तर है। एक ही वर्ण के अन्तर्गत कई जातियाँ-उपजातियाँ होती हैं। अत: वर्ण व्यापक और जाति व्याप्य है । वर्ण का आधार आजीविका है और जाति का आधार विवाह संंबंध। इसलिए जिनसेनाचार्य ने जाति व्यवस्था के लिए विवाह संबंधी नियमों का पालन आवश्यक माना है।

और पढ़े

सूरत विहार
Surat11.jpg

अन्य फोटोज देखें...

छह सौ साल से देश को जोड़ रही है हिंदी

स्वाधीनता के लिए जब जब आन्दोलन तेज हुआ तब तब हिन्दी की प्रगति का रथ भी तेज गति से आगे बढ़ा। हिन्दी राष्ट्रीय चेतना की प्रतीक बन गई। स्वाधीनता आन्दोलन का नेतृत्व जिन नेताओं के हाथों में था, उन्होंने यह पहचान लिया था कि विगत ६००—७०० वर्षों से हिन्दी सम्पूर्ण भारत की एकता का कारक रही है यह संतो , फकीरों, व्यापारियों, तीर्थ यात्रियों, सैनिकों आदि के द्वारा देश के एक भाग से दूसरे भाग तक प्रयुक्त होती रही है। मैं यह बात जोर देकर कहना चाहता हूँ कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा की मान्यता उन नेताओं के कारण प्राप्त हुई जिनकी मातृभाषा हिन्दी नहीं थी। बंगाल के केशवचन्द्र सेन, राजा राम मोहनराय, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस पंजाब के विपिनचन्द्र पाल, लाला लाजपत राय, गुजरात के स्वामी दयानन्द, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, महाराष्ट्र के लोकमान्य तिलक तथा दक्षिण भारत के सुब्रह्मण्यम भारती, मोटूरि सत्यनारायण आदि नेताओं के राष्ट्रभाषा हिन्दी के सम्बंध में व्यक्त विचारों से मेरे मत की संपुष्टि होती है। हिन्दी भारतीय स्वाभिमान और स्वातंत्र्य चेतना की अभिव्यक्ति का माध्यम बन गई । हिन्दी राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक हो गई । इसके प्रचार प्रसार में सामाजिक,धार्मिक तथा राष्ट्रीय नेताओं ने सार्थक भूमिका का निर्वाह किया।

और पढ़ें...

आज का दिन - १२ दिसम्बर २०१७ (भारतीय समयानुसार)
Icon.jpg तिथीदर्पण Icon.jpg

दिनाँक १२ दिसम्बर,२०१७
तिथी- पौष कृष्ण १०
दिन-मंगलवार
वीर निर्वाण संवत- २५४४
विक्रम संवत- २०७४

सूर्योदय ०६.०१
सूर्यास्त १७.३९



Calender.jpg



यदि दिनांक सूचना सही नहीं दिख रही हो तो कॅश मेमोरी समाप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें

गुरु माँ का महाराष्ट्र दर्शन हेतु मंगल विहार
Spl (48).jpg
फोटो - ऑडियो एवं वीडियो गैलरी

.....अन्य फोटोज देखें . .....ऑडियो श्रंखला के लिए क्लिक करें . .....वीडियो श्रंखला के लिए क्लिक करें


०-९ अं
परिमार्जित क्ष त्र ज्ञ श्र अः


कुल पृष्ठ- २७,२३९   •   देखे गये पृष्ठ- ५६,३८,१४६   •   कुल लेख- ८४२   •   कुल चित्र- ०