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२७ अप्रैल से २९ अप्रैल तक ऋषभदेवपुरम् मांगीतुंगी सिद्धक्षेत्र में लघु पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आयोजित की गई है |

२५ अप्रैल प्रातः ६:४० से प्रतिदिन पारस चैनल पर पूज्य श्री ज्ञानमती माताजी के द्वारा षट्खण्डागम ग्रंथ का सार प्रसारित होगा |

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भगवान मुनिसुव्रतनाथ के जन्म व तप कल्याणक पर विशेष अभिषेक

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जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



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गणिनी प्रमुख आर्यिकाश्री ज्ञानमती माताजी ससंघ द्वारा महाराष्ट्र तीर्थ दर्शन की झलकियाँ
अयोध्याजी 10 मार्च भाग-1
अयोध्याजी 10 मार्च भाग-2
अयोध्याजी 10 मार्च भाग-3
मांगी तुंगी 18 फरवरी 2016-1
मांगी तुंगी 18 फरवरी 2016-2

अन्य चैनलों से समाचार झलक देखें


मस्तकाभिषेक 2018
कैसा है कल्पद्रुम मंडल विधान

कैसा है कल्पद्रुम मंडल विधान

लेखिका - आर्यिका श्री चंदनामती माताजी

अकलंक—समझ में नहीं आता निकलंक। आज कल्पदु्रम मंडल विधान की बड़ी धूम मची हुई है। यह कौन सी पूजा है आज तक तो उसका नाम कभी सुना नहीं था ?

निकलंक—हाँ भैय्या! बात तो यही है। काफी दिनों से पोस्टरों में मैं पढ़ रहा था कि जम्बू्द्वीप हस्तिनापुर में कोई कल्पद्रुम मंडल विधान होेने जा रहा है लेकिन अभी जब मैं मम्मी के साथ पू० ज्ञानमती माताजी के दर्शन करने हस्तिनापुर गया तो वहाँ सब कुछ देख सुनकर बहुत ही सन्तोष हुआ।

अकलंक—अच्छा,तो क्या तुमने वह विधान करके देखा है ?

निकलंक—हाँ हाँ, अरे भाई! उसे तो देखकर इतना आनन्द आया कि घर वापस आने का मन ही नहीं कर रहा था।

अकलंकतब तो तुम्हें सब कुछ पता चल गया होगा कि इस विधान में क्या—क्या होता है ? पूरा पढ़ें...

अहिंसा प्रधान मेरी इण्डिया महान है...
AHIMSA PARMO DHARMA.jpg

अहिंसा प्रधान मेरी इण्डिया महान है।
इण्डिया में जन्मे महावीर और राम हैं।
यहाँ की पवित्र माटी बनीं चन्दन, उसे करो सब नमन।। टेक.।।
जहाँ कभी बहती थीं दूध की नदियाँ।
वहाँ अब करुणा की माँग करे दुनिया।।
अत्याचार पशुओं पे होगा कब खतम, उसे करो सब नमन।।१।।

प्रभु महावीर का अमर संदेश है।
लिव एण्ड लेट लिव का दिया उपदेश है।।
मानवों की मानवता की यही पहचान है।
जाने जो पराए को भी निज के समान है।।
तभी अहिंसा का होगा सच्चा पालन, उसे करो सब नमन।।२।।

अहिंसा के द्वारा ही इण्डिया फी हुई।
ब्रिटिश गवर्नमेंट की जब इति श्री हुई।।
चाहे हों पुराण या कुरान सभी कहते।
अहिंसा के पावन सूत्र सब में हैं रहते।।
यही मेरे देश की कहानी है पुरानी।
अहिंसक देशप्रेमियों की ये निशानी।।
‘चंदनामती’ यह देश ऋषियों का चमन, उसे करो सब नमन।।३।।

भगवान् महावीर

वैज्ञानिक भगवान महावीर

    विचार की दृष्टि से जिनाणी विज्ञान है और आचार की दृष्टि से आत्म विकास का मार्ग। जाति, व्यक्ति, सम्प्रदाय आदि संकीर्ण विचारों से परे भगवान् महावीर ने Science of Creation and Spiritual Evoluation का विकास जनकल्याण हेतु किया ‘नानस्स सारो आसरो’ के उद्घोष के साथ सर्वदर्शी सर्वज्ञ भगवान महावीर ने सहस्रों वर्ष पूर्व मानव समाज को संदेश दिया - ‘उप्पने ईवा विग्नेईवा, ध्रुवेई वा’ इस संसार का सत् है। भगवान के इन शब्दों में ज्ञान और साधना का इतना गूढ़ और गंभीर संदेश था कि गणधरों ने चौदह पूर्वों की रचना कर डाली। साथ में यथार्थता, तथा प्राकृतिक नियमों पर आधारित एक ऐसे धर्म की स्थापना हो गयी जिसमें जन्म-मृत्यु, सुख-दु:ख, आदि मानवीय समस्याओं का समाधान ईश्वर द्वारा न होकर स्वयं मनुष्य द्वरा किया जाता है। ईसा की सोलहवीं शताब्दी में युरोप में भगवान महावीर के इस निमय को Law of Conservation of Mass and Energy के नाम से प्रस्तुत कर आधुनिक विज्ञान की नीव रख दी। इसी नियम के कारण वैज्ञानिक युरोप में औद्योगिक क्रांति लाने में सफल हो गये। इस प्रकार विज्ञान के वास्तविक संस्थापक भगवान महावीर हैं, परन्तु पश्चिम जगत के साथ-साथ भारतीय भी इस ऐतिहासिक तथ्य से अनभिज्ञ हैं।

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दिगम्बर-परम्परा में गौतम स्वामी

दिगम्बर-परम्परा में गौतम स्वामी

-डॉ. अनिल कुमार जैन

जैनों की दिगम्बर एवं श्वेताम्बर दोनों परम्पराओं में गौतम स्वामी का महत्वपूर्ण स्थान है। ये भगवान महावीर के प्रथम गणधर थे। गौतम स्वामी वर्तमान जैन वाङ्मय के आद्य-प्रणेता थे। दिगम्बर आर्ष ग्रंथों में भगवान् महावीर को भाव की अपेक्षा समस्त वाङ्मय का अर्थकर्ता अथवा मूलतंत्र कर्ता अथवा द्रव्य श्रुत का कर्ता बतलाया है और गौतम गणधर को उपतन्त्र कर्ता अथवा द्रव्य श्रुत का कर्ता कहा गया है। भगवान महावीर की दिव्य ध्वनि को सुनकर आपने द्वादशांग की रचना की। जिनवाणी की पूजन में निम्न प्रकार कहा गया है-


‘तीर्थंकर की धुनि, गणधर ने सुनि, अंग रचे चुनि ज्ञानमयी।

सो जिनवर वाणी, शिवसुखदानी, त्रिभुवन मानी पूज्य भयी।।’’

इसीलिए गौतम गणधर को मंगलाचरण में भी भगवान् महावीर के तुरंत बाद ही स्मरण किया जाता है-


‘‘मंगलम् भगवान् वीरो मंगलम् गौतमो गणी।

मंगलम् कुन्दकुन्दाद्यो, जैन धर्मोस्तु मंगलम् ।।’’

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वृहत्पल्य व्रत विधि

वृहत्पल्य व्रत विधि

वृहत्पल्य व्रत की तिथियाँ, व्रतों के नाम एवं माहात्म्य

तिथि व्रत का नाम फल

पौष कृष्णा ३ पंक्तिमान छह पल्य उपवास

पौष कृष्णा १२ सूर्य सात पल्य उपवास

पौष सुदी ५ पराक्रम नौ पल्य उपवास

पौष सुदी ११ जयपृथु दस पल्य उपवास

माघ कृष्णा २ अजित आठ पल्य उपवास

माघ कृष्णा ५ स्वयंप्रभ ग्यारह पल्य उपवास

माघ कृष्णा १५ रत्नप्रभ बारह पल्य उपवास

माघ सुदी ४ चतुर्मुख तेरह पल्य उपवास

माघ सुदी ७ शील चौदह पल्य उपवास

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विश्वशांति वर्ष में क्या क्या करे

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लघु पंचकल्याणक
Laghu panch kalyanak2018.jpg
खेल में भी कैसा मेल

वीरकुमार-चलो चलें राजकुमार! कुछ देर पार्क में चलकर खेलकूद में ही मनोरंजन किया जाए। राजकुमार-मुझे तो पढ़ाई करनी है वर्ना स्कूल में पिटाई होगी। वैसे भी मेरे पिताजी रोज मुझे यही शिक्षा देते है- खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब। पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नबाब।। वीरकुमार-यह तो ठीक है मित्र! पढ़ने लिखने से ही व्यक्ति महान बन सकता है। किन्तु हर चीज का अपना—अपना समय होता है। विद्यार्थी जीवन में जहाँ अध्ययन ही जीवन होता है, वहां शारीरिक एवं मानसिक पुष्टता के लिए खेल का भी महत्त्वपूर्ण स्थान है। फिर सायंकाल भोजन के पश्चात् तो अवश्य ही कुछ देर टहलना और खेलना चाहिए ताकि स्वास्थ्य ठीक बना रहे। सुनो राजकुमार! मैंने तो कल एक शास्त्र में पढ़ा कि प्राचीनकाल में एक महाज्ञानी श्रुतकेवली भद्रबाहु भी अपनी बाल्यावस्था में गोली का खेल खेला करते थे। राजकुमार-अरे! तुम कहाँ की बात करते हो ? महापुरुषों का जीवन तो बचपन से ही महानता को लिए हुए होता है, उन्हें इन खेलों से क्या प्रयोजन। वीरकुमार-तुम्हें विश्वास नहीं होता तो मैं तुम्हें उनका चरित्र सुनाता हूँ— पुण्ड्रवद्र्धन देश के कोटीपुर नामक नगर में सोमशर्मा नामक एक ब्राह्मण रहते थे, उनकी पत्नी का नाम श्रीदेवी था। इन दोनों के भद्रबाहु नाम का एक पुत्र था।

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आज का दिन - २५ अप्रैल २०१८ (भारतीय समयानुसार)
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दिनाँक २५ अप्रैल,२०१८
तिथी- वैशाख शुक्ल १०
दिन-बुधवार
वीर निर्वाण संवत- २५४४
विक्रम संवत- २०७५

सूर्योदय ०६.०५
सूर्यास्त १८.४५

भगवान महावीर - ज्ञान कल्याणक


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गुरु माँ का महाराष्ट्र दर्शन हेतु मंगल विहार
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