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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ पू.माताजी की जन्मभूमि टिकैत नगर (उ.प्र) में विराजमान है |

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन |

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शनि अमावस्या पर भगवान मुनिसुव्रतनाथ का विशेष अभिषेक
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आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक


आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-१
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-२
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-३
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-४

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मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष


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  • प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती श्री शांतिसागर जी अन्तर्राष्ट्रीय मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष-*
  • New Logo Launching*👆
  • इस लोगो* को आप अपनी *प्रिंटिंग सामग्री में उपयोग करें* और Whatsapp/Facebook के Profile आदि में भी उपयोग करके *शताब्दी वर्ष* के साथ जुड़े।
  • वर्ष की पावन प्रेरणास्रोत-*
  • भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ।🙏*
कुन्दकुन्द मणिमाला


गाथा - 1

परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी द्वारा पारस चैनल के माध्यम से श्री कुंदकुंद मणिमाला का अध्ययन कराया जा रहा है । अतः पूज्य माताजी द्वारा पढ़ाई गई अब तक की गाथा के ऑडियो सुनने लिए इस लिंक को खोलें।

*बालक एवं नवोदित युवा सम्मान समारोह*


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विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन


७ अप्रैल को डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैज़ाबाद के संत कबीरदास सभागार में श्री ऋषभदेव जैन शोध पीठ द्वारा आयोजित विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन में परम पूज्य भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ ने अपना मंगल सानिध्य प्रदान किया |

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समाचार


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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी


सम्यग्ज्ञान पत्रिका


चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पूजन


रचयित्री-प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती

-स्थापना-

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पूजन करो रे,
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श्रीशान्तिसिन्धु आचार्य प्रवर की, पूजन करो रे-२।
भारतवसुन्धरा ने जब, मुनियों के दर्श नहिं पाये।
सदी बीसवीं में तब श्री, चारित्रचक्रवर्ती आए।।
दक्षिण भारत भोजग्राम ने, एक लाल को जन्म दिया।
उसने ही सबसे पहले, मुनिपरम्परा जीवन्त किया।।
मुनिपरम्परा जीवन्त किया।।
पूजन करो रे,
श्रीशान्तिसिन्धु आचार्य प्रवर की, पूजन करो रे-।
ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती श्रीशान्तिसागरप्रथमाचार्यवर्य ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती श्रीशान्तिसागरप्रथमाचार्यवर्य ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनं।
ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती श्रीशान्तिसागरप्रथमाचार्यवर्य ! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणम्।

क्रमशः

गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी मंगल विहार सूचना


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  • पूज्य माताजी का स्वास्थ ठीक है केवल गर्मी की अधिकता से स्थान-स्थान पर विहार करने की बजाय एक स्थान पर विश्राम की आवश्यकता है।* अतः पूज्य माताजी टिकैतनगर (बाराबंकी) उ.प्र. में विराजमान हैं तथा *श्रुतपंचमी-7 जून तक टिकैतनगर में ही प्रवास रहेगा।* उसके बाद मौसम एवं स्वास्थ की अनुकूलता देखकर विहार का निर्णय लिया जायेगा।

जो भी महानुभाव पूज्य माताजी एवं जन्मभूमि टिकैतनगर के दर्शनार्थ एवं निकट में अयोध्या आदि तीर्थ के दर्शनार्थ आना चाहें, वे सादर आमन्त्रित हैं।

  • 25/4/2019*
  • -पीठाधीश रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी*
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कन्या सम्मान समारोह !


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पूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चन्दनामती माताजी का संक्षिप्त परिचय


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नाम - प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी
दीक्षा पूर्व नाम - ब्र. कु. माधुरी शास्त्री
जन्मतिथि - १८-५-१९५८ (ज्येष्ठ कृष्णा अमावस्या)
जन्मस्थान - टिकैतनगर (बाराबंकी) उ.प्र.
माता-पिता - श्रीमती मोहिनी देवी जैन एवं श्री छोटेलाल जी जैन
भाई - चार (कर्मयोगी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी, कैलाशचंद, स्व. प्रकाशचंद, सुभाषचंद)
बहन - आठ (गणिनी आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी एवं आर्यिका श्री अभयमती माताजी सहित)
ब्रह्मचर्य व्रत - २५ अक्टूबर १९६९ को जयपुर में २ वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत एवं सन् १९७१, अजमेर में आजन्म ब्रह्मचर्य सुगंधदशमी को गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी से।
धार्मिक अध्ययन - १९७२ में सोलापुर से ‘‘शास्त्री’’ की उपाधि, १९७३ में ‘‘विद्यावाचस्पति’’ की उपाधि।
द्वितीय एवं सप्तम प्रतिमा के व्रत - सन् १९८१ एवं १९८७ में गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी से।
आर्यिका दीक्षा - हस्तिनापुर में १३-८-१९८९, श्रावण शु. ११ को गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी से ।
प्रज्ञाश्रमणी की उपाधि - १९९७ में चौबीस कल्पद्रुम महामण्डल विधान के पश्चात् राजधानी दिल्ली में पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा।
पीएच.डी. की मानद उपाधि - तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय मुरादाबाद द्वारा ८ अप्रैल २०१२ को विश्वविद्यालय में।

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भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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भजन


वीरा वीरा, श्री महावीरा


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वीरा वीरा, श्री महावीरा, मेरे अतिवीरा, सन्मति शुभ नाम है।

सारे जग का सितारा वर्धमान है।। टेक.।।
हिंसा की तांडव लीला जब, सारे जग में छाई थी।
कुण्डलपुर नगरी में त्रिशला, के घर बजी बधाई थी।।
सिद्धारथ का, मनसिज हरषा, हुई रतन की वर्षा।
वीरा वीरा, श्री महावीरा, मेरे अतिवीरा, सन्मति तेरा नाम है।
सारे जग का सितारा वर्धमान है।।१।।
चैत्र सुदी तेरस के दिन जब, जन्मकल्याणक आया था।
स्वर्गों से इन्द्रों ने आकर, उत्सव खूब मनाया था।।
ऐरावत पर, तुमको लाकर, चला इन्द्र सह परिकर।
वीरा तुमको, सुमेरू पर्वत, की पांडुशिला पर, किया विराजमान है।
जन्म अभिषव कर पुकारा तेरा नाम है।।२।।

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प्रेरक विचार


ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास

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आज का दिन - २४ मई २०१९ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक २४ मई,२०१९
तिथी- ज्येष्ठ कृष्ण ६
दिन-शुक्रवार
वीर निर्वाण संवत- २५४५
विक्रम संवत- २०७६

सूर्योदय ०५.४८
सूर्यास्त १८.५९


अथ ज्येष्ठ मास फल विचार

भगवान श्रेयांशनाथ - गर्भ कल्याणक
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अयोध्या विहार 2018


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