मुख्यपृष्ठ

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


जैन इनसाइक्लोपीडिया
जैन विश्वकोश
जैनधर्म के ज्ञान का महासागर


Diya.gif
हे रत्नमती मात तूमने कर दिया कमाल
बेसिक डिप्लोमा इन जैनोलोजी ऑनलाइन फॉर्म
बेसिक डिप्लोमा इन जैनोलोजी पुस्तक पढ़ें
प्रमुख विषय


जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



ज्योतिष-वास्तु एवं मंत्र विद्या· जैन भूगोल· जैन इतिहास· श्रावक संस्कार· ग्रन्थ भण्डार

रत्नों की खान आर्यिका श्री रत्नमती माताजी


पूज्य आर्यिका श्री रत्नमती माताजी का परिचय

Bhi 770.jpg

आदिब्रह्मा भगवान ऋषभदेव की जन्मभूमि अयोध्या और उसके आस-पास के क्षेत्र को भी अवध के नाम से जाना जाता है । वैसे इन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और उनके प्रथम पुत्र चक्रवर्ती सम्राट् भरत के समय वह अयोध्या नगरी १२ योजन लम्बी थी अत: ९६ मील होने से लखनऊ, टिकैतनगर, त्रिलोकपुर, बाराबंकी, महमूदाबाद आदि नगर उस समय अयोध्या नगरी की पवित्र भूमि की सीमा में विद्यमान थे । वस्तुत: आज भी अयोध्या तीर्थ की पवित्रता से सम्पूर्ण अवध का वातावरण सुवासित, धर्मपरायण एवं परम पवित्र है ।

अवधप्रान्त के महमूदाबाद में हुआ था जन्म

उसी अवधप्रान्त के जिला सीतापुर के अन्तर्गत महमूदाबाद नामक एक नगर है, जहाँ विशाल जिनमंदिर के निकट वर्तमान में ६०-७० जैन घर हैं । उसी नगरी में एक सुखपालदास जी नाम के श्रेष्ठी निवास करते थे । अग्रवाल जातीय लाला सुखपालदास जी की धर्मपत्नी का नाम मत्तोदेवी था । पूरे नगर में धर्मात्मा के रूप में प्रसिद्ध सुखपालदास जी भगवान की नित्य पूजन के साथ-साथ स्वाध्याय भी करते थे । सात्त्विक प्रवृत्ति वाले इन महामना श्रावक की धर्मपत्नी भी पतिव्रता आदि गुणों से सहित धर्मपरायण एवं अत्यन्त सरल प्रकृति की थीं।

पूरा पढ़ें...
विधान


इन्द्र ध्वज विधान

सिद्धचक्र विधान

भगवान श्री महावीर जिनपूजा


मनोकामना सिद्धि विधान

मंगलाचरण

शंभु छंद

प्रभु महावीर इस युग के अंतिम, तीर्थंकर उनको वंदूँ।
है वर्तमान में उनका शासन-काल उन्हें नितप्रति वन्दूँ।।
हैं पाँच नाम से युक्त तथा, वे पंचम बालयती भी हैं।
पंचांग प्रणाम करूँ उनको, पंचमगति प्रभु को प्राप्त हुई।।१।।

छब्बिस सौ वर्षों पूर्व उन्होंने, जन्म लिया कुण्डलपुर में।
इस हेतू प्रभु का छब्बिस सौवां, जन्मकल्याण मना जग में।।
प्रभु महावीर के २६०० वें, जन्मकल्याणक वर्ष में ही।
गणिनी श्री ज्ञानमती माता ने, महाविधान रचा सच ही।।२।।

इसमें छब्बिस सौ मंत्रों के, द्वारा प्रभुवीर की पूजा है।
यह ‘‘विश्वशांति महावीर विधान’’ अलौकिक और अनूठा है।।
इनमें से ही इक शतक आठ, मंत्रों के मोती चुन करके।
इक महावीर व्रत बतलाया, माता श्री ज्ञानमती जी ने।।३।।

इस मनोकामनासिद्धी व्रत की, चारों तरफ प्रसिद्धि हुई।
इस व्रत को करने वाले भक्तों की इच्छाएँ पूर्ण हुई।
मैंने भी प्रभु महावीर की भक्तीवश इस व्रत को ग्रहण किया।
कुण्डलपुर यात्रा की इच्छा को, चार व्रतों ने सफल किया।।४।।



पूरा पढ़ें

पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन


कुछ नए प्रजेंटेशन्स

सम्यग्ज्ञान पत्रिका


समाचार


घर बैठे करें ज्ञान का अर्जन

प्रतिदिन सायं 6:30 बजे से जूम एप पर जम्बूद्वीप के विभिन्न मंदिरों एवं पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की मंगल आरती

तत्पश्चात

सायं 7 बजे से जैन धर्म का प्रारम्भिक ज्ञान [Basic Knowledge of Jainism] की कक्षा में अवश्य भाग लें ।

*Zoom app link-*

Meeting Id - 87106540812

Password- 123456

विशेष सूचना - जैन धर्म का प्रारम्भिक ज्ञान की कक्षा का सीधा प्रसारण सायं 7 बजे से YouTube के Ganini Gyanmati चैनल पर भी किया जाता है । अत: आप जूम अथवा यूट्यूब के माध्यम से जुड़कर इस कक्षा में भाग ले सकते हैं ।

घर बैठें करें स्वाध्याय और जीतें पुरस्कार


🏘️🏘️👩🏻‍💻👨‍💻📖💯🎁🎁

  • श्री पद्मनन्दिपंचविंशतिका ग्रन्थ ऑनलाइन स्वाध्याय प्रतियोगिता*

बंधुओं !!!

  • आर्यिका श्री रत्नमती माताजी* '(माता मोहिनी-प.पू. गणिनीप्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी की जन्मदात्री माँ) के *50वें दीक्षा दिवस* (मगसिर वदी तृतीया, २०२०) एवं *जन्मदिवस*( मगसिर वदी पंचमी) के अवसर पर *जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर* से *श्री पद्मनन्दिपंचविंशतिका ग्रन्थ आॅनलाइन स्वाध्याय प्रतियोगिता* का आयोजन (प्रारम्भ दिनांक- 4/12/2020 से) पारस चैनल के सीधे प्रसारण {प्रातः ६ से ७ बजे} के माध्यम से किया गया है |

इसमें आपको पूज्य *आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी* द्वारा बताया जायेगा कि ग्रन्थ के किस अध्याय का स्वाध्याय आपको करना है, स्वाध्याय हेतु बताया गए मैटर का पीडीएफ आपको व्हाट्स एप📲 के माध्यम से भेजा भी जायेगा, ३ दिन के बाद पूज्य माताजी द्वारा उस अध्याय में से 5️⃣ प्रश्न पूछे जायेंगे | जिन स्वाध्यायियों के प्रत्येक स्वाध्याय प्रतियोगिता में पाँचों प्रश्नों के जवाब सही होंगे उनके नाम लकी ड्रा में शामिल किये जायेंगे | लकी ड्रा में चयनित विजेताओं को जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर से बहुत ही सुन्दर *पूजन के बर्तन* का सेट पुरस्कार🎁 रूप प्रदान किया जायेगा | अतः आप सभी भक्तगण घर बैठे इस स्वाध्याय प्रतियोगिता में भाग लेकर अपने ज्ञान की वृद्धि करें | इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए एवं ग्रन्थ का पीडीएफ प्राप्त करने के लिये हमें व्हाट्सएप के माध्यम से इस नंबर पर सूचित करें - *ज्ञानमती नेटवर्क 7599002108*

  • दिनांक 4-12-2020 को प्रदत्त स्वाध्याय हेतु मैटर*--

🙏 *श्री पद्मनंदिपंचविंशतिका ग्रंथ*🙏 प्रथम अध्याय -धर्मोपदेशामृत अधिकार श्लोक नं.१ से श्लोक १०० तक (पीडीएफ संलग्न है )

  • समय सीमा* > 5-12-2020शनिवार से 7-12-2020 सोमवार तक
(प्रश्न दिनांक 8-12-2020 सोमवार को पूछे जाएंगे ।)
पद्मनंदी पंचविंशतिका पढ़ें


वास्तु


घर का वास्तु कैसा हो

प्रस्तुति - पवन जैन पापड़ीवाल ( वास्तुशास्त्री )- औरंगाबाद ( महाराष्ट्र )

।। श्री वीतरागाय नमः ।।

आज के इस भागदौड की जिंदगी में इन्सान का सबसे बड़ा और सबसे सुंदर सपना (ख्वाब) होता है उसका एक छोटा सा प्यारा सा अपना एक घर ! बहुत बार ऐसा होता है कि अपनी जिंदगी की पूरी कमाई लगाने के बावजूद उसकी जिंदगी की शाम होने तक वो दो,तीन कमरे का ही मकान बना पाता है, लेकिन उसी छोटे से, प्यारे से अपने घर में अगर उसे सुख,शांती, समृद्धि मिले तो उसका मन बागबाग हो उठता है । इस तरह सोचना ये एक सहज (Normal) बात है ।

कुछ लोगों को तो ये सुख मिल पाता है पर कुछ लोग इन खुशियो से कोसों दूर दिखाई देते हैं । कोई गलती न होते हुए भी ईमानदारी से पूरी कोशिश करने के बावजूद उन्हें यह खुशी नही मिल पाती । ऐसे समय हमारी कहीं कोई गलती हो रही है क्या, हम कहीं पर चूक रहे हैं क्या, ये बात मन में आना भी सहज है । हमें हमारे इन सवालों का जवाब मिल सकता है । हमारे प्यारे से घर में जहां हमने सपने देखे, जिस घ रको, वास्तु को हमने अपने हाथो से संजोया,उस वास्तु में किसी प्रकार की त्रुटि रह गई हो तो जिसके बदलाव से हमारा जीवन एक नई मंजिल की ओर अपने कदम बढ़ा सकता है । हमारी एक छोटी सी कोशिश, एक छोटा सा बदलाव हमारी पूरी जिंदगी का रूप पलटकर रख सकता है ।

क्रमश:...


IMG-20201201-WA0001.jpg
आज का दिन - ५ दिसम्बर २०२० (भारतीय समयानुसार)


Icon.jpg तिथीदर्पण Icon.jpg

दिनाँक ५ दिसम्बर २०२०
तिथी- मार्गशीर्ष कृष्ण ५
दिन- शनिवार
वीर निर्वाण संवत- २५४७
विक्रम संवत- २०७७

सूर्योदय ०६.५५
सूर्यास्त १७.३७


अथ मार्गशीर्ष मास फल विचार



Calender.jpg



यदि दिनांक सूचना सही नहीं दिख रही हो तो कॅश मेमोरी समाप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें

०-९ अं
परिमार्जित क्ष त्र ज्ञ श्र अः


कुल पृष्ठ- २९,१६१  •   इस साइट पर कुल देखे गये पृष्ठ- १,५७,८९,८८४   •   कुल लेख- ९७०   •   कुल चित्र- 28,745