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मेरी माँ की सिर्फ एक ही आँख थी और इसीलिए मैं उनसे बेहद नफ़रत करता था ! वो फुटपाथ पर एक छोटी सी दुकान चलाती थी ! उनके साथ होने पर मुझे शर्मिंदगी महसूस होती थी ! एक बार वो मेरे स्कूल आई और मैं फिर से बहुत शर्मिंदा हुआ ! वो मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती है ? अगले दिन स्कूल में सबने मेरा मजाक उड़ाया !
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मैं चाहता था मेरी माँ इस दुनिया से गायब हो जाये ! मैंने उनसे कहा, ‘ माँ तुम्हारी दूसरी आँख क्यों नहीं है ? तुम्हारी वजह से हर कोई मेरा मजाक उड़ाता है ! तुम मर क्यों नहीं जाती ?’ माँ ने कुछ नहीं कहा ! पर, मैंने उसी पल तय कर लिया कि बड़ा होकर सफल आदमी बनूँगा ताकि मुझे अपनी एक आँख वाली माँ और इस गरीबी से छुटकारा मिल जाये !
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उसके बाद मैंने मेहनत से पढाई की ! माँ को छोड़कर बड़े शहर आ गया ! यूनिविर्सिटी की डिग्री ली ! शादी की ! अपना घर ख़रीदा ! बच्चे हुए ! और मैं सफल व्यक्ति बन गया ! मुझे अपना नया जीवन इसलिए भी पसंद था क्योंकि यहाँ माँ से जुड़ी कोई भी याद नहीं थी ! मेरी खुशियाँ दिन – ब – दिन बड़ी हो रही थीं , तभी अचानक मैंने कुछ ऐसा देखा जिसकी कल्पना भी नहीं की थी ! सामने मेरी माँ खड़ी थी , आज भी अपनी एक आँख के साथ ! मुझे लगा कि मेरी पूरी दुनिया फिर से बिखर रही है ! मैंने उनसे पूछा, ‘ आप कौन हो ? मैं आपको नहीं जनता ! यहाँ आने कि हिम्मत कैसे हुई ? तुरंत मेरे घर से बाहर निकल जाओ !’ और माँ ने जवाब दिया ‘माफ़ करना , लगता है गलत पते पर आ गयी हूँ!’ वो चली गयी और मैं यह सोचकर खुश हो गया कि उन्होंने मुझे पहचाना नहीं !
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एक दिन स्कूल री – यूनियन की चिठ्ठी मेरे घर पहुंची और मैं अपने पुराने शहर पहुँच गया ! पता नहीं मन में क्या आया कि मैं अपने पुराने घर चला गया !
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वहाँ माँ जमीन मर मृत पड़ी थी ! मेरे आँख से एक बूंद आंसू तक नहीं गिरा ! उनके हाथ में एक कागज का टुकड़ा था .... वो मेरे नाम उनकी पहली और आखिरी चिठ्ठी थी !
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उन्होंने लिखा था – मेरे बेटे ........
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मुझे लगता है मैंने अपनी जिंदगी जी ली है ! मैं अब तुम्हारे घर कभी नहीं आउंगी ..... पर क्या यह आशा करना कि तुम कभी – कभार मुझसे मिलने आ जाओ .... गलत है ? मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है ! मुझे माफ़ करना कि मेरी एक आँख की वजह से तुम्हे पूरी जिंदगी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी ! जब तुम छोटे थे , तो एक दुर्घटना में तुम्हारी एक आँख चली गयी थी ! एक माँ के रूप में मैं यह नहीं देख सकती थी कि तुम एक आँख के साथ बड़े हो , इसीलिए मैंने अपनी एक आँख तुम्हे दे दी ! मुझे इस बात का गर्व था कि मेरा बेटा मेरी उस आँख की मदद से पूरी दुनिया के नए आयाम देख पा रहा है ! मेरी तो पूरी दुनिया ही तुमसे है !
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चिठ्ठी पढ़ कर मेरी दुनिया बिखर गयी ! और मैं उसके लिए पहली बार रोया जिसने अपनी जिंदगी मेरे नाम कर दी ......... मेरी माँ !

२०:२१, २२ मार्च २०२० के समय का अवतरण

मेरी माँ

मेरी माँ की सिर्फ एक ही आँख थी और इसीलिए मैं उनसे बेहद नफ़रत करता था ! वो फुटपाथ पर एक छोटी सी दुकान चलाती थी ! उनके साथ होने पर मुझे शर्मिंदगी महसूस होती थी ! एक बार वो मेरे स्कूल आई और मैं फिर से बहुत शर्मिंदा हुआ ! वो मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती है ? अगले दिन स्कूल में सबने मेरा मजाक उड़ाया !

मैं चाहता था मेरी माँ इस दुनिया से गायब हो जाये ! मैंने उनसे कहा, ‘ माँ तुम्हारी दूसरी आँख क्यों नहीं है ? तुम्हारी वजह से हर कोई मेरा मजाक उड़ाता है ! तुम मर क्यों नहीं जाती ?’ माँ ने कुछ नहीं कहा ! पर, मैंने उसी पल तय कर लिया कि बड़ा होकर सफल आदमी बनूँगा ताकि मुझे अपनी एक आँख वाली माँ और इस गरीबी से छुटकारा मिल जाये !

उसके बाद मैंने मेहनत से पढाई की ! माँ को छोड़कर बड़े शहर आ गया ! यूनिविर्सिटी की डिग्री ली ! शादी की ! अपना घर ख़रीदा ! बच्चे हुए ! और मैं सफल व्यक्ति बन गया ! मुझे अपना नया जीवन इसलिए भी पसंद था क्योंकि यहाँ माँ से जुड़ी कोई भी याद नहीं थी ! मेरी खुशियाँ दिन – ब – दिन बड़ी हो रही थीं , तभी अचानक मैंने कुछ ऐसा देखा जिसकी कल्पना भी नहीं की थी ! सामने मेरी माँ खड़ी थी , आज भी अपनी एक आँख के साथ ! मुझे लगा कि मेरी पूरी दुनिया फिर से बिखर रही है ! मैंने उनसे पूछा, ‘ आप कौन हो ? मैं आपको नहीं जनता ! यहाँ आने कि हिम्मत कैसे हुई ? तुरंत मेरे घर से बाहर निकल जाओ !’ और माँ ने जवाब दिया ‘माफ़ करना , लगता है गलत पते पर आ गयी हूँ!’ वो चली गयी और मैं यह सोचकर खुश हो गया कि उन्होंने मुझे पहचाना नहीं !

एक दिन स्कूल री – यूनियन की चिठ्ठी मेरे घर पहुंची और मैं अपने पुराने शहर पहुँच गया ! पता नहीं मन में क्या आया कि मैं अपने पुराने घर चला गया ! वहाँ माँ जमीन मर मृत पड़ी थी ! मेरे आँख से एक बूंद आंसू तक नहीं गिरा ! उनके हाथ में एक कागज का टुकड़ा था .... वो मेरे नाम उनकी पहली और आखिरी चिठ्ठी थी !

उन्होंने लिखा था – मेरे बेटे ........

मुझे लगता है मैंने अपनी जिंदगी जी ली है ! मैं अब तुम्हारे घर कभी नहीं आउंगी ..... पर क्या यह आशा करना कि तुम कभी – कभार मुझसे मिलने आ जाओ .... गलत है ? मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है ! मुझे माफ़ करना कि मेरी एक आँख की वजह से तुम्हे पूरी जिंदगी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी ! जब तुम छोटे थे , तो एक दुर्घटना में तुम्हारी एक आँख चली गयी थी ! एक माँ के रूप में मैं यह नहीं देख सकती थी कि तुम एक आँख के साथ बड़े हो , इसीलिए मैंने अपनी एक आँख तुम्हे दे दी ! मुझे इस बात का गर्व था कि मेरा बेटा मेरी उस आँख की मदद से पूरी दुनिया के नए आयाम देख पा रहा है ! मेरी तो पूरी दुनिया ही तुमसे है !

चिठ्ठी पढ़ कर मेरी दुनिया बिखर गयी ! और मैं उसके लिए पहली बार रोया जिसने अपनी जिंदगी मेरे नाम कर दी ......... मेरी माँ !