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पू० गणिनी श्रीज्ञानमती माताजी ससंघ मांगीतुंगी के (ऋषभदेव पुरम्) में विराजमान हैं |

वीरसागर महाराज

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वीरसागर

बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के प्रथम शिष्य एवं उनकी परम्परा के प्रथम पट्टाचार्य थे | आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज ने गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजीको आर्यिका दीक्षा प्रदान की |