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श्रेणी:साधू-साध्वियां

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इस जैन साधू एवं साध्वियाँ नाम की श्रेणी में सम्पूर्ण दिगम्बर जैन समाज के प्राचीन एवं अर्वाचीन साधु-साध्वियों (चतुर्विध संघ) के परिचय प्रस्तुत किये जाएँगे ।

भारत की धरती पर सदा- सदा से साधू-साध्वियों का जन्म होता रहा है ।
उनकी त्याग-तपस्या से देश का मस्तक सदैव गौरव से ऊँचा रहा है ।

जैन रामायण पद्मपुराण में आचार्य श्री रविषेण स्वामी ने कहा है-

यस्य देशं समाश्रित्य, साधवः कुर्वते तपः ।
षष्ठमंशं नृपस्तस्य,लभते परिपालनात् ।।१।।

अर्थात् जिस देश का आश्रय लेकर साधुजन तपस्या करते हैं, उस देश के राजा को उनकी तपस्या का छठा भाग पुण्य स्वयमेव प्राप्त हो जाता है ।
साधु-सन्तों की श्रृंखला में अनगिनत साधुओं ने विभिन्न माध्यमों से समाज के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभाया है ।

उनमें से ही कतिपय प्राचीन एवं अर्वाचीन साधु- साध्वियों के परिचय यहाँ प्रस्तुत किये जा रहे हैं ।

उपश्रेणियाँ

इस श्रेणी में निम्नलिखित १४ उपश्रेणियाँ हैं, कुल उपश्रेणियाँ १४