ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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20 सितम्बर 2017 आश्विन क्रष्णा अमावस्या को आचार्य श्री वीरसागर महाराज की 60वीं पुण्य तिथि मनाएं|

सम्मेदशिखर

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सम्मेदशिखर - Sammedashikhara.

The eternal & great reverential place of pilgrimage of Jains, which is the salvation place of 20 Tirthnkars (Jaina Lords) of the present era. 
शाश्रत तीर्थराज; अनादिकाल से अनंत तीर्थकरो की निर्वाणभूमि एंव वर्तमान चैबीसी मे भगवान आदिनाथ, वासुपूज्य, नेमिनाथ और महावीर को छोड़कर शेष बीस तीर्थकरो की निर्वाणभूमि। इस महान तीर्थ के बारे मे आचार्यों ने कहा है कि एक बार वंदे जो कोई। ताहिं नरक पशु गति नही होई। इसलिए जैन धर्म के सभी अनुयायी इसकी 27 किलोमीटर की पर्वतीय वंदना बड़ी श्रद्वापूर्वक करते है। यह वर्तमान मे झांरखण्ड प्रदेष मे पारसनाथ हिल के नाम से प्रसिद्व है।