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पू० गणिनी श्रीज्ञानमती माताजी ससंघ मांगीतुंगी के (ऋषभदेव पुरम्) में विराजमान हैं |

सरस्वती

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सरस्वती - Sarasvatee.

Goddess of learning, Resonant preaching of Tirthankars (Jaina-Lords), mother’s name of the 11th Jaina-Lord of Videh (region), the female beloved divinity of an Indra in peripatetic deities of Gandharva type.
विद्या की देवी, द्वादशांग जिनवाणी के प्रतीक रुप मे देवी के आकार की सरस्वती की मूर्ति जैन आगम मे मान्य है। अकृत्रिम जिनप्रतिमाओं के आजू-बाजू श्रीदेवी (लक्ष्मी) एवं श्रुतदेवी (सरस्वती) की प्रतिमा विराजमान रहने का आगम मे वर्णन है। तीर्थकरों की दिव्यध्वनि, विदेहक्षेत्रस्थ 11 वे तीर्थकर की माता, गंधर्व व्यंतरो के इन्द्र की वल्लभिका देवी।