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16.भगवान शांतिनाथ वन्दना

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श्री शांतिनाथ वन्दना

दोहा- हस्तिनागपुर में हुये, गर्भ जन्म तप ज्ञान।

सम्मेदाचल मोक्ष थल, गाऊँ प्रभु गुणगान।।१।।

-स्रग्विणी छंद-

मैं नमूँ मैं नमूँ शांति तीर्थेश को।

नाथ मेरे हरो सर्व भवक्लेश को।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।२।।

विश्वसेन प्रिया मात ऐरावती।

वर्ष इक लाख आयू कनक वर्ण ही।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।३।।

देह चालीस धनु चिन्ह मृग ख्यात है।

जन्म भू हस्तिनापूरि विख्यात है।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।४।।

नाथ के समवसृति में सभा मध्य ये।

साधु बासठ सहस मूलगुणधारि थे।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।५।।

चक्र आयुध प्रमुख गणपती श्रेष्ठ थे।

ऋद्धि संयुक्त छत्तीस मुनिज्येष्ठ थे।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।६।।

आर्यिका हरीषेणा प्रधाना तथा।

साठ हज्जार त्रय सौ सभी आर्यिका।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।७।।

दोय लक्षा सुश्रावक प्रभू भाक्तिका।

चार लक्षा कहीं श्राविका सद्व्रता।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।८।।

सौख्य हेतू भटकता फिरा विश्व में।

किन्तु पाई न साता कहीं रंच मैं।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।९।।

नाथ ऐसी कृपा कीजिए भक्त पे।

शुद्ध सम्यक्त्व की प्राप्ति होवे अबे।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।१०।।

स्वात्म पर का मुझे भेद विज्ञान हो।

पूर्ण चारित्र धारूँ जो निष्काम हो।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।११।।

पूर्ण शांती जहाँ पे वहीं वास हो।

भक्त ये आपका आपके पास हो।।

पूरिये नाथ मेरी मनोकामना।

फेर होवे न संसार में आवना।।१२।।

दोहा- तीर्थंकर चक्री मदन, तीनों पद के ईश।

पूर्ण ‘‘ज्ञानमति’’ हेतु मैं, नमूँ नमूँ नतशीश।।१३।।