णमो सिद्धाणं

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णमो सिद्धाणं

सिद्धों (सिद्ध परमेष्ठी) को नमस्कार हो । जो अरिहंत परमेष्ठी अघातिया कर्मों को नष्ट करके सिद्धशिला पर अमूर्तिक आत्मा के रूप में विराजमान हो जाते हैं और अनंत काल तक वहाँ अपनी आत्मा के अनंत सुख में निमग्न रहते हैं , वे सिद्ध परमात्मा कहे जाते हैं ।