दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान,जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर के कतिपय स्वर्णिम पृष्ठ

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दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान,जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर के कतिपय स्वर्णिम पृष्ठ

चार दशकीय ऐतिहासिक कार्यकलाप : एक झलक

(१) सन् १९७२ में संस्थान की स्थापना (प्रेरणा-गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी)

(२) अप्रैल १९७९ में जम्बूद्वीप तीर्थ पर १०१ फुट ऊँचे सुमेरु पर्वत के भगवन्तों का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव।

(३) अक्टूबर १९८१ में जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर स्थल पर ‘जम्बूद्वीप ज्ञान ज्योति सेमिनार' का आयोजन।

(४) सन् १९८२ से १९८५ तक तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा उद्घाटित ‘जम्बूद्वीप ज्ञान ज्योति रथ' का भारत भ्रमण।

(५) अक्टूबर १९८२ में ‘‘जम्बूद्वीप सेमिनार’’ श्री राजीव गांधी (तत्कालीन सांसद) द्वारा दिल्ली में उद्घाटित

(६) अप्रैल-मई १९८५ में जम्बूद्वीप जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठापना महोत्सव।

(७) अप्रैल सन् १९८५ में जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर स्थल पर ‘जैन गणित और त्रिलोक विज्ञान' विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन।

(८) सन् १९८७ में जम्बूद्वीप के पीठाधीश एवं गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के प्रमुख शिष्यों में एक क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज की जम्बूद्वीप स्थल पर क्षुल्लक दीक्षा।

(९) सन् १९८९ में जम्बूद्वीप स्थल पर पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की पथ-अनुगामिनी एवं आज्ञाकारिणी शिष्या बाल ब्र. माधुरी जैन की आर्यिका दीक्षा, जिनका नाम आर्यिका श्री चंदनामती माताजी हैै।

(१०) सन् १९९२ में जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर में ‘अंतर्राज्यीय चरित्र निर्माण संगोष्ठी' का आयोजन।

(११) सन् १९९३ में संस्थान द्वारा अयोध्या में ‘भारतीय संस्कृति के आद्यप्रणेता भगवान ऋषभदेव’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन।

(१२) सन् १९९४ में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की जन्मभूमि अयोध्या में बड़ी मूर्ति स्थल पर विराजमान ३१ फुट उत्तुंग भगवान ऋषभदेव की खड्गासन प्रतिमा का महाकुंभ मस्तकाभिषेक महोत्सव। प्रति १० वर्षानुसार यहाँ सन् २००५ में भी महाकुंभ मस्तकाभिषेक सम्पन्न किया गया।

(१३) अक्टूबर १९९५ में जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर में ‘गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती साहित्य संगोष्ठी' का आयोजन।

(१४) अक्टूबर १९९७ में ४ से १३ अक्टूबर तक राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा द्वारा उद्घाटित ‘चौबीस कल्पद्रुम महामण्डल विधान' का ऐतिहासिक आयोजन।

(१५) अप्रैल १९९८ में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा तालकटोरा स्टेडियम-दिल्ली से ‘भगवान ऋषभदेव समवसरण श्रीविहार रथ' का भारत भ्रमण हेतु प्रवर्तन।

(१६) अक्टूबर १९९८ में जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर में ‘राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन' का आयोजन।

(१७) फरवरी २००० में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लालकिला मैदान-दिल्ली में ‘भगवान ऋषभदेव अंतर्राष्ट्रीय निर्वाण महामहोत्सव वर्ष' का उद्घाटन।

(१८) जून २००० में जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर में ‘जैनधर्म की प्राचीनता' विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन।

(१९) अगस्त २००० में यू.एन.ओ.-न्यूयार्क (यू.एस.ए.) में आयोजित ‘विश्वशांति शिखर सम्मेलन' में जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर की ओर से संस्थान के अध्यक्ष कर्मयोगी ब्र. रवीन्द्र कुमार जैन द्वारा धर्माचार्य के रूप में प्रतिनिधित्व।

(२०) फरवरी २००१ में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की दीक्षा एवं केवलज्ञान भूमि प्रयाग-इलाहाबाद में ‘तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली तीर्थ' का ऐतिहासिक नवनिर्माण।

(२१) जनवरी २००१ में प्रयाग-इलाहाबाद के महाकुंभ मेले में विश्व हिन्दू परिषद द्वारा आयोजित नवम धर्मसंसद में पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ द्वारा जैनधर्म का अद्भुत शंखनाद।

(२२) सन् २००३-२००४ में भगवान महावीर जन्मभूमि कुण्डलपुर (नालंदा) बिहार में ‘नंद्यावर्त महल तीर्थ' का भव्य निर्माण एवं ‘भगवान महावीर ज्योति रथ' का भारत भ्रमण हेतु प्रवर्तन।

(२३) दिसम्बर २००३ में भगवान मुनिसुव्रतनाथ की जन्मभूमि राजगृही (नालंदा) बिहार व भगवान महावीर स्वामी की निर्वाणभूमि पावापुरी (नालंदा) बिहार में जिनमंदिरों के निर्माण एवं विशाल प्रतिमाओं की स्थापना।

(२४) नवम्बर २००४ में गणधर गौतम स्वामी की निर्वाणभूमि गुणावां जी सिद्धक्षेत्र में जिनमंदिर का निर्माण।

(२५) सन् २००५-२००७ में ‘भगवान पार्श्वनाथ जन्मकल्याणक तृतीय सहस्राब्दि महोत्सव' का ६ जनवरी २००५ को बनारस में उद्घाटन एवं ४ जनवरी २००८ को अहिच्छत्र में समापन।

(२६) जनवरी २००५ में भगवान श्रेयांसनाथ की जन्मभूमि सिंहपुरी (सारनाथ) में पूज्य माताजी ससंघ के सान्निध्य मेें भगवान श्रेयांसनाथ की विशाल प्रतिमा का भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव।

(२७) दिसम्बर २००५ में शाश्वत तीर्थ सम्मेदशिखर जी में ९ फुट उत्तुंग भगवान ऋषभदेव की पद्मासन प्रतिमा से समन्वित सुन्दर कमल मंदिर का निर्माण।

(२८) अप्रैल २००६ में पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के ‘आर्यिका दीक्षा स्वर्ण जयंती महोत्सव’ का राष्ट्रीय स्तर पर भव्य आयोजन।

(२९) अप्रैल-मई २००७ में तेरहद्वीप जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव।

(३०) अक्टूबर २००८ में पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के हीरक जन्मजयंती महोत्सव का भव्य आयोजन।

(३१) दिसम्बर २००८ में २१ दिसम्बर को जम्बूद्वीप स्थल पर पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल द्वारा ‘विश्वशांति अहिंसा सम्मेलन' का उद्घाटन।

(३२) अगस्त २००९ में संसद भवन-दिल्ली में गृहमंत्री श्री प्रणव मुखर्जी द्वारा उद्घाटित ‘‘श्री जे.के. जैन अभिनंदन समारोह का आयोजन।

(३३) वर्ष २००९ से इस संस्थान के अन्तर्गत भगवान महावीर जन्मभूमि कुण्डलपुर दिगम्बर जैन समिति के सहयोग से प्रतिवर्ष बिहार सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन नालंदा द्वारा भगवान महावीर जन्मजयंती के अवसर पर ‘कुण्डलपुर महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है।

(३४) फरवरी २०१० में जम्बूद्वीप स्थल पर ‘जम्बूद्वीप रजत जयंती महोत्सव' के साथ भगवान शांतिनाथ-कुंथुनाथ-अरहनाथ की ३१-३१ फुट उत्तुंग विशाल खड्गासन प्रतिमाओं तथा नवनिर्मित तीनलोक रचना के भगवन्तों का ‘अंतर्राष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं तीर्थंकरत्रय महामस्तकाभिषेक महोत्सव'।

(३५) मार्च २०१० में शोभित युनिवर्सिटी-मेरठ एवं जम्बूद्वीप संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ‘इंटरनेशनल कॉन्प्रेंस ऑन इण्डियन सिविलाइजेशन थ्रू मिलेनिया' का सफल आयोजन।

(३६) जून २०१० में भगवान पुष्पदंतनाथ की जन्मभूमि काकंदी (देवरिया, निकट-गोरखपुर) उ.प्र. का ऐतिहासिक विकास कार्य करके विशाल जिनमंदिर एवं कीर्तिस्तंभ का निर्माण तथा मंदिर जी में सवा ९ फुट उत्तुंग भगवान पुष्पदंतनाथ की पद्मासन प्रतिमा का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव, शिखर कलशारोहण एवं ध्वजारोहण समारोह।

(३७) अक्टूबर २०१० में शरदपूर्णिमा महोत्सव के शुभ अवसर पर विश्व में प्रथम बार निर्मित तीनलोक रचना का भव्य उद्घाटन समारोह।

(३८) नवम्बर २०१० में गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की दीक्षा भूमि माधोराजपुरा (जयपुर) राज. में ‘गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी दीक्षा तीर्थ' पर सम्मेदशिखर की अति सुन्दर प्रतिकृति का निर्माण करके चौबीस तीर्थंकर भगवन्तों की प्रतिमाओं से समन्वित चौबीस चैत्यालय एवं सबसे ऊपर भगवान पार्श्वनाथ की १५ उत्तुंग खड्गासन प्रतिमा का विशाल स्तर पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव।

(३९) सन् २०१०-२०११ में राष्ट्रीय स्तर पर ‘‘प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर वर्ष’’ की घोषणा। जिसके उपरांत सफलतापूर्वक देशभर में इस वर्ष को मनाते हुए विभिन्न स्थानों पर बीसवीं सदी के प्रथम आचार्य महाराज का गुणगान कर उनके अवदानों को याद किया।

(४०) फरवरी २०११ में भगवान ऋषभदेव के जन्मस्थान प्रथम टोंक-अयोध्या जी में अत्यन्त सुन्दर एवं कलात्मक जिनमंदिर का निर्माण करके विशाल स्तर पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं भगवान ऋषभदेव महामस्तकाभिषेक का आयोजन।

(४१) सन् २०११-२०१२ में राष्ट्रीय स्तर पर ‘‘प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर वर्ष’’ के उपलक्ष्य में सफलतापूर्वक देशभर में विभिन्न स्थानों पर आचार्य महाराज का गुणगान किया गया।

(४२) फरवरी २०१२ में श्री महावीर जी (राज.) के महावीर धाम परिसर में पंचबालयति दिगम्बर जैन मंदिर का भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव कर संस्थान द्वारा निरंतर मंदिर जी का संचालन।

(४३) मई २०१३ में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिर्डी (महा.) में ‘‘ज्ञानतीर्थ’’ का विकास एवं तीर्थ पर निर्माणाधीन ८१ फुट ऊँचे कमल मंदिर में विराजमान १५ फुट के पद्मासन भगवान पार्श्वनाथ का राष्ट्रीय स्तर पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव।

(४४) जुलाई २०१३ में शाश्वत तीर्थ अयोध्या में भगवान अनंतनाथ जन्मभूमि टोंक पर विशाल जिनमंदिर निर्माण तथा भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं महामस्तकाभिषेक का आयोजन।

(४५) अगस्त २०१३ में १७ अगस्त को ‘प्रज्ञापुंज’ ग्रंथ समर्पण के साथ राष्ट्रीय स्तर पर ‘‘प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती रजत दीक्षा महोत्सव’’ एवं १८ अगस्त को संसद भवन एनेक्सी-दिल्ली में मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित के मुख्य आतिथ्य में श्री जे.के. जैन को अभिनंदन समारोहपूर्वक ‘अहिंसारत्न’ उपाधि अलंकरण एवं टी.एम.यू. द्वारा ‘विजिटर’ पद अलंकरण।

(४६) श्रावण कृ. एकम्, १३ जुलाई २०१३-२०१४ हेतु ‘‘श्री गौतम गणधर वर्ष’’ मनाने हेतु राष्ट्रीय घोषणा।

-अन्य विशेष गतिविधियाँ-

वार्षिक मेला-प्रतिवर्ष संस्थान द्वारा जम्बूद्वीप तीर्थ, हस्तिनापुर में ‘‘शरदपूर्णिमा महोत्सव’’, तपस्थली तीर्थ, प्रयाग-इलाहाबाद में ‘‘ऋषभदेव जन्मजयंती महोत्सव’’ तथा महावीर जयंती पर नंद्यावर्त महल तीर्थ, कुण्डलपुर (नालंदा) बिहार में सरकारी स्तर पर ‘‘कुण्डलपुर महोत्सव’’ का आयोजन ‘‘वार्षिक मेला’’ के रूप में किये जाते हैं।

वीर ज्ञानोदय ग्रंथमाला-इस संस्थान द्वारा सन् १९७२ में स्थापित वीर ज्ञानोदय ग्रंथमाला के माध्यम से प्रतिवर्ष लाखों ग्रंथों का प्रकाशन किया जाता है। इस ग्रंथमाला द्वारा जैनधर्म पर आधारित लगभग ३५० प्रकार के ग्रंथ/किताबें प्रकाशित हो चुके हैं।

सम्यग्ज्ञान मासिक पत्रिका-सन् १९७४ से संस्थान द्वारा जैन आगम ग्रंथों पर आधारित चारों अनुयोगों के आलेखों से संबद्ध सम्यग्ज्ञान मासिक पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है। ३८ वर्षीय यह पत्रिका आध्यात्मिक स्वाध्याय हेतु पाठकोें में लोकप्रियता को प्राप्त है।

णमोकार महामंत्र बैंक-इस संस्थान के द्वारा सन् १९९५ में स्थापित णमोकार महामंत्र बैंक का भी संचालन किया जाता है, जिसमें प्रतिवर्ष देश-विदेश के भक्तों द्वारा करोड़ों णमोकार महामंत्र लिखकर जमा कराये जाते हैं। णमोकार महामंत्र लेखकों को संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष शरदपूर्णिमा के अवसर पर हीरक, स्वर्ण एवं रजत पदक से सम्मानित किया जाता है।

इंटरनेट पर इन्साइक्लोपीडिया निर्माण-अप्रैल २०१३ से संस्थान द्वारा इंटरनेट पर का निर्माण प्रारंभ किया गया है, जिसके द्वारा दिगम्बर जैन धर्म व समाज की समग्र जानकारी इस इन्साइक्लोपीडिया पर ऑनलाइन प्राप्त की जा सके, ऐसा लक्ष्य निर्धारित है।

गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती दिगम्बर जैन शिक्षा केन्द्र-इस केन्द्र के अन्तर्गत दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान तथा तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद के संयुक्त तत्त्वावधान में जैनधर्म के ‘‘प्रवेशिका’’, ‘‘मध्यमा’’, ‘‘विशारद’’, ‘‘शास्त्री’’ व ‘‘आचार्य’’ इन कोर्स का संचालन किया जा रहा है, जिसमें उत्तीर्ण श्रावकों को विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त सर्टीफिकेट, डिप्लोमा, बैचलर डिग्री व पी.जी. डिग्री के समकक्ष प्रमाणपत्र प्रदान किये जाते हैं।

संस्थान संचालन एवं सहभागिता-इस संस्थान की स्थापना पूज्य माताजी की प्रेरणा से राजधानी दिल्ली में सन् १९७२ में की गई थी, जिसके उपरांत सन् १९७४ से संस्थान का मुख्य कार्यालय जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर में संचालित हो रहा है। इस संस्थान के अन्तर्गत नंद्यावर्त महल तीर्थ, कुण्डलपुर (नालंदा), भगवान ऋषभदेव तपस्थली तीर्थ, प्रयाग-इलाहाबाद एवं आचार्य श्री शांतिसागर धाम, सम्मेदशिखर जी का संचालन किया जाता है तथा पूज्य माताजी की प्रेरणा से स्थापित तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ, अ.भा. दि. जैन महिला संगठन, भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थंकर जन्मभूमि विकास कमेटी व मांगीतुंगी सिद्धक्षेत्र में बन रही १०८ फुट उत्तुंग मूर्ति निर्माण कमेटी आदि की समस्त गतिविधियों में भी यह संस्थान महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करती है। इन सभी संस्थाओं का मुख्य कार्यालय जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर तीर्थ पर संचालित किया जाता है। पूज्य माताजी के आशीर्वाद से महावीर जी (राज.) में महावीर धाम परिसर में पंचबालयति दिगम्बर जैन मंदिर तथा धारूहेड़ा (हरियाणा) में श्री शांतिनाथ दि. जैन मंदिर का संचालन भी इस संस्थान द्वारा ही किया जा रहा है तथा गणिनी ज्ञानमती दीक्षा तीर्थ-माधोराजपुरा (जयपुर) राज. के निर्माण एवं विकास में भी संस्थान का महत्वपूर्ण सहयोग है। इसके साथ ही अ.भा.दि. जैन युवा परिषद का प्रधान कार्यालय जम्बूद्वीप से संचालित होता है व शाश्वत तीर्थ अयोध्या जी में दि. जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी-अयोध्या के अन्तर्गत विभिन्न टोंक का जीर्णोद्धार, विकास भी इस संस्थान के सहयोग से सम्पन्न हो रहा है।

पुरस्कार समर्पण-संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष शरदपूर्णिमा के अवसर पर विशिष्ट महानुभावों को गणिनी ज्ञानमती पुरस्कार (१०००००/-रु.), आर्यिका रत्नमती पुरस्कार (२५०००/-रु.), जम्बूद्वीप पुरस्कार (२५०००/-रु.), नंद्यावर्त महल पुरस्कार (२५०००/-रु.), श्री छोटेलाल जैन स्मृति पुरस्कार (२५०००/-रु.), श्री प्रकाशचंद जैन स्मृति पुरस्कार (२५०००/-रुपये), जम्बूद्वीप बाल प्रतिभा पुरस्कार (११०००/-रु.) व संस्थान के अन्तर्गत विद्वत् महासंघ द्वारा चंदारानी जैन स्मृति पुरस्कार (१५०००/-रु.) से भी सम्मानित किया जाता है। तथा पूर्व में विशेष पुरस्कारों में गणिनी ब्राह्मी पुरस्कार (११०००/-रुपये), रूपाबाई जैन स्मृति पुरस्कार (११०००/-रुपये), महावीर जन्मभूमि कुण्डलपुर पुरस्कार (२५०००/-रुपये), भगवान ऋषभदेव नेशनल अवार्ड (२५१०००/-रु.), गणिनी ज्ञानमती हीरक जयंती पुरस्कार (७५०००/-रु.), आर्यिका दीक्षा स्वर्ण जयंती पुरस्कार (५१०००/-रु.) तथा पूज्य माताजी की ८०वीं जन्मजयंती-शरदपूर्णिमा-२०१३ में गणिनी ज्ञानमती अमृत महोत्सव पुरस्कार (८०,०००/-रु.) आदि भी समय-समय पर प्रदान किये जा चुके हैं।

इस प्रकार यह संस्थान अपनी विभिन्न सर्मिपत कार्य योजनाओं द्वारा समाज की सेवा में प्रतिक्षण संलग्न है। मानसिक शांति, आध्यााqत्मक विकास, प्राकृतिक सौन्दर्य एवं अन्य अनेक लाभ एक साथ प्राप्त करने हेतु यह संस्थान जंबूद्वीप आदि जैन भूगोल की रचनाओं के दर्शन हेतु आपको हस्तिनापुर में जम्बूद्वीप तीर्थ पर सादर आमंत्रित करती है।