दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप हस्तिनापुर

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दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान - संक्षिप्त परिचय

दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान की स्थापना पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से सन् १९७२ में राजधानी दिल्ली में हुई थी। संस्थान का मुख्य कार्यालय सन् १९७४ से हस्तिनापुर में प्रारंभ हुआ। इस संस्थान के अन्तर्गत राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जैनधर्म की प्रभावना हेतु अनेकानेक कार्यक्रम, महोत्सव, सेमिनार आदि सम्पन्न किये जाते हैं। वर्तमान में सर्वाधिक महत्वपूर्ण ‘‘विश्वशांति अहिंसा सम्मेलन’’ का आयोजन संस्थान द्वारा २१ दिसम्बर २००८ को जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर तीर्थ पर किया गया, जिसका उद्घाटन पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के सान्निध्य में भारत गणतंत्र की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटील के करकमलों द्वारा सम्पन्न हुआ। इसके अतिरिक्त संस्थान के अन्तर्गत हस्तिनापुर में चलने वाली विभिन्न गतिविधियाँ इस प्रकार हैं-

  1. सन् १९७२ से वीर ज्ञानोदय ग्रंथमाला के अन्तर्गत लाखों ग्रंथ प्रकाशित हो रहे हैं।
  2. सन् १९७४ से इस संस्थान के मुखपत्र के रूप में ‘सम्यग्ज्ञान’ हिन्दी मासिक पत्रिका का निरंतर प्रकाशन हो रहा है।
  3. सन् १९७४ से १९८५ तक हस्तिनापुर में जम्बूद्वीप रचना का निर्माण कार्य हुआ।
  4. सन् १९७४ से अब तक जम्बूद्वीप रचना के अतिरिक्त अनेक जिनमंदिरों का निर्माण हुआ है-कमल मंदिर, तीन मूर्ति मंदिर, ध्यान

मंदिर, शांतिनाथ मंदिर, वासुपूज्य मंदिर, ॐ मंदिर, सहस्रट मंदिर, विद्यमान बीस तीर्थंकर मंदिर, आदिनाथ मंदिर, अष्टापद मंदिर, ऋषभदेव कीर्तिस्तंभ, स्वर्णिम तेरहद्वीप रचना, तीन लोक रचना, नवग्रहशांति जिनमंदिर, चौबीस तीर्थंकर मंदिर, भगवान चन्द्रप्रभ जिनमंदिर ,श्री शांतिनाथ-कुन्थुनाथ-अरहनाथ की ३१-३१ कूट उत्तुंग प्रतिमाओं की स्थापना व उत्तर भारत में शिल्पकला का प्रथम सबसे विशाल जिनमंदिर ।

  1. जम्बूद्वीप पुस्तकालय जिसमें लगभग १५००० ग्रंथ संग्रहीत हैं।
  2. णमोकार महामंत्र बैंक जिसमें भक्तों द्वारा लिखकर भेजे गये करोड़ों णमोकार मंत्र जमा किये जाते हैं।
  3. समय-समय पर शिक्षण-प्रशिक्षण शिविरों तथा संगोष्ठियों के आयोजन किये जाते हैं।
  1. यात्रियों के शुद्ध भोजन के लिए राजा श्रेयांस भोजनालय का संचालन।
  2. यात्रियों के ठहरने के लिए आधुनिक सुविधायुक्त डीलक्स फ्लैट्स वाली कई धर्मशालाओं तथा कोठियों एवं बंगलों का निर्माण किया गया है।
  3. जम्बूद्वीप परिक्रमा के लिए नौका विहार, ऐरावत हाथी तथा मनोरंजन हेतु मिनी ट्रेन, झूले आदि हैं।
  4. ज्ञानमती कला मंदिरम् में हस्तिनापुर के प्राचीन इतिहास से संबंधित झाँकियाँ हैं।
  5. तीर्थंकर जन्मभूमियों की वंदना एवं धार्मिक फिल्मों का प्रदर्शन करने वाले थियेटर से समन्वित गणिनी ज्ञानमती हीरक जयंती एक्सप्रेस।

दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, हरिद्वार, झाँसी, तिजारा आदि से जम्बूद्वीप स्थल तक आने के लिए दिन भर बसें मिलती रहती हैं। हस्तिनापुर राजधानी दिल्ली से ११० किमी. तथा मेरठ से ३४ किमी. की दूरी पर स्थित है।

दि. जैन त्रिलोक शोध संस्थान के अन्तर्गत भगवान महावीर जन्मभूमि कुण्डलपुर (नालंदा) बिहार में भव्य नंद्यावर्त महल तीर्थ तथा प्रयाग-इलाहाबाद (उ.प्र.) में निर्मित तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली तीर्थ का भी संचालन होता है।

जम्बूद्वीप एवं अन्य रचनाओं के दर्शन हेतु अवश्य ही एक बार हस्तिनापुर पधारकर आध्यात्मिक एवं भौतिक सुख की प्राप्ति करें।