दीपावली पूजन (विधि नं.-२)

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दीपावली पूजन (विधि नं.-२)

(व्रततिथिनिर्णय से उद्धृत)

दुकान या बड़े फर्म के वसना मुहूर्त-लक्ष्मी पूजन करने के पूर्व अष्टद्रव्य तैयार कर चौकियों पर रख लें। एक चौकी पर मंगल कलश की स्थापना करें। गद्दी पर बहीखाता, दवात-कलम, नवीन वस्त्र, रुपयों की थैली आदि रखें। प्रथम मंगलाष्टक पढ़कर रखी हुई सभी वस्तुओं पर पुष्प अर्पण करें। अनन्तर स्वस्ति विधान, देवशास्त्र-गुरु का अर्घ, पंचपरमेष्ठी पूजन, नवदेवता पूजन, महावीर स्वामी पूजन, गणधर पूजन करें। अनन्तर बहियों पर साथिया बनाने के उपरांत ‘‘श्री ऋषभाय नमः’’, ‘‘श्री महावीराय नमः’’, ‘‘श्री गौतम गणधराय नमः’’, ‘‘श्री केवलज्ञानसरस्वत्यै नमः’’ और ‘‘श्री लक्ष्म्यै नमः’’ लिखकर ‘‘श्रीवर्धताम्’’ लिखें। अनन्तर निम्नाकार में श्री का पर्वत बनावें।

इसके पश्चात् ‘‘श्री देवाधिदेव श्री महावीरनिर्वाणात् ........तमे वीराब्दे श्री........तमे विक्रमाब्दे........ईसवीय संवत्सरे शुभलग्ने स्थिरमुहूर्ते श्री जिनार्चनं विधाय अद्य कार्तिक-कृष्णामावस्यायां शुभवासरे लाभवेलायां नूतनवसनामुहूर्तं करिष्ये’’।

सब बहियों पर यह लिखकर पान, लड्डू, सुपाड़ी, पीली सरसों, दूर्वा ओैर हल्दी रखें पश्चात् ‘‘श्री वर्धमानाय नमः, श्री महालक्ष्म्यै नमः, ऋ़द्धिः सिद्धिर्भवतुतराम्,’’ केवलज्ञानलक्ष्मीदेव्यै नमः, मम सर्वसिद्धिर्भवतु, काममांगल्योत्सवाः सन्तु, पुण्यं वर्धताम् धनं वर्धताम्’’ पढ़कर बहीखातों पर अर्घ चढ़ावें अनन्तर मंगल कलश वाली चौकी पर रुपयों की थैली को रखकर उसमें - ‘‘श्री लीलायतनं महीकुलगृहं कीर्तिप्रमोदास्पदं, वाग्देवीरतिकेतनं जयरमाक्रीडानिधानं महत्।
सः स्यात्सर्वमहोत्सवैकभवनं यः प्रार्थितार्थप्रदं, प्रातः पश्यति कल्पपादपदलच्छायं जिनांघ्रिद्वयम्’’।।
श्लोक पढ़कर साथिया बनावें। पश्चात् लक्ष्मीपूजन करें और लक्ष्मीस्तोत्र, पुण्याहवाचन, शान्ति, विसर्जन करें।