पतिव्रता

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पतिव्रता के विषय में
प्रकाशक दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर
लेखक गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
पुस्तक के विषय में उपन्यासों की शृँखला में यह भी अपना विशेष महत्व रखता है। कुष्टरोग से पीड़ित अपने पति कोटिभट श्रीपाल का एवं उसके सात सौ योद्धा साथियों का कुष्ठ रोग दूर करने वाली शील शिरोमणि मैना सती को जैन समाज का ऐसा कौन व्यक्ति होगा, जो न जानता हो। जिसने सिद्धचक्र विधान रचाकर जिनेन्द्र भक्ति के प्रभाव स्वरूप अभिषेक का गंधोदक लगाकर महारोग को दूर किया। यह अतिरोमांचक कथानक है।
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