मुख्यपृष्ठ

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


जैन इनसाइक्लोपीडिया
जैन विश्वकोश
जैनधर्म के ज्ञान का महासागर


Diya.gif
सरस्वती वंदना 12-02-2021
बेसिक डिप्लोमा इन जैनोलोजी ऑनलाइन फॉर्म
बेसिक डिप्लोमा इन जैनोलोजी पुस्तक पढ़ें
प्रमुख विषय


जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



ज्योतिष-वास्तु एवं मंत्र विद्या· जैन भूगोल· जैन इतिहास· श्रावक संस्कार· ग्रन्थ भण्डार

10 दिवसीय सहस्रनाम मंत्र आराधना



भगवान ऋषभदेव जूम चैनल लेकर आया है

  • 28 फरवरी* से भक्तों के लिए एक अपूर्व स्वर्णिम अवसर
  • भगवान ऋषभदेव केवलज्ञानकल्याणक*

(प्रथम देशना दिवस) के अवसर पर

  • 10 दिवसीय सहस्रनाम मंत्र आराधना*


आप पाएंगें एक महालक्ष्मी यंत्र
जिसे घर में रखने पर होगी धनलक्ष्मी की वृद्धि

  • तिथि-फाल्गुन कृ. एकम् से एकादशी*
  • दिनाँक-28 फरवरी से 9 मार्च 2021

समय-मध्यान्ह 3.15 से 3.45 बजे*

सान्निध्य -

  • गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी*

-समायोजन-

  • प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी*

-कुशल नेतृत्व एवं अध्यक्ष-

  • पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी*

🌈प्यारे भाईयों एवं बहनों!
फाल्गुन कृष्णा एकादशी को भगवान ऋषभदेव का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव आ रहा है। अत: आप सभी को 10 दिवसीय सहस्रनाम मंत्राराधनापूर्वक यह पर्व मनाना है। प्रतिदिन सहस्रनाम के 100-100 मंत्रों से भगवान ऋषभदेव की आराधना करते हुए आप भगवान के चरणों में अर्पित करेंगे लौंग-अंगूर-बादाम आदि फल और सहस्रनाम स्तोत्र की एक-एक अध्याय का होगा वाचन। पुन: 9 मार्च, फाल्गुन कृ. एकादशी को अपने ही घर में सुन्दर समवसरण की रचना करके मनाएंगे ज्ञानकल्याणक और उस दिन आप 108 रत्न (मोती या विभिन्न कलर के रत्न) से मंत्र आराधना करेंगे और उन रत्नों को अपने परिवार के अनेकानेक लोगों को वितरित कर आभूषण बनाकर पहनने की प्रेरणा देंगे। अथवा उनमें से 3-3 रत्न अपनी तिजोरी में रखेंगे।

हाँ! इस विशेष अवसर को चूकना नहीं है।

💠नोट - आपको वाट्सअप के माध्यम से हम प्रयाग तीर्थ में निर्मित भगवान के दीक्षाकल्याणक एवं केवलज्ञानकल्याणक से संबंधित चित्र भेज रहे हैं। उसका प्रिंट निकलवाकर फ्रेमिंग या लेमिनेशन कराकर एक टेबल पर विराजमान करें और उसके सम्मुख सहस्रनाम मंत्र आराधना करें।

-विशेष-
(1) आपको जो चित्र भेजा जा रहा है, उसके सामने मंडल बनाकर या थाली में प्रतिदिन 100-100 लवंग या अंगूर-बादाम या कोई भी फल चढ़ाना है, जो मंदिर के माली को या किसी अन्य को देवें अथवा पक्षियों को खाने हेतु छत पर डालें।
(2) प्रतिदिन एक कटोरी में गरम पानी रखें, उसे पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी विशेष मंत्र से मंत्रित कराएंगी। उस मंत्रित जल को अमृत के समान समझकर घर के सब लोग पी लेवें।
(3) सहस्रनाम मंत्राराधना के अंतिम दिवस (9 मार्च 2021 को) समवसरण रचना बनाकर उसके समक्ष १०८ रत्न (मोती या रंग-बिरंगे रत्न) रखें, तो वे भगवान ऋषभदेव के विशेष मंत्र से मंत्रित कराए जावेंगे, जिन्हें आप अपने लोगों को वितरित करेंगे।

*Rishabhdev zoom Channel link*

  • Meeting ID* : 871 0654 0812
  • Password* : 123456

-आयोजक-
तीर्थंकर ऋषभदेव प्रभावना महासंघ
अन्तर्गत-दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर (मेरठ) उ.प्र.

बाल विकास भाग 3 पढ़ें


सरस्वती माता की स्तुति


रचयित्री-प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती
By231.jpg
By232.jpg

शेर छन्द-



कमलासिनी श्रुतधारिणी माता सरस्वती।
जिनशासनी अनुगामिनी माता सरस्वती।।

है द्वादशांग रूप से निर्मित तेरी काया।
सम्यक्त्व तिलक माथे पे चारित्र की छाया।।
विद्वानों से भी पूज्य तुम माता सरस्वती।
जिनशासनी अनुगामिनी माता सरस्वती।।१।।

जिनवर की मूर्ति तेरे मस्तक पे राजती।
वन्दन करें जो उनकी ज्ञान शक्ति जागती।।
हे श्वेतवस्त्र धारिणी माता सरस्वती।
जिनशासनी अनुगामिनी माता सरस्वती।।२।।

हे शारदा तू ज्ञान की गंगा बहाती है।
वागीश्वरी तू ब्रह्मचारिणी कहाती है।।
कर में है वीणा पुस्तक माला सरस्वती।
जिनशासनी अनुगामिनी माता सरस्वती।।३।।

जो भी तेरी आराधना में लीन होता है।
मिथ्यात्वतिमिर हटा ज्ञान लीन होता है।।
है ‘‘चन्दनामती’’ विनत माता सरस्वती।
जिनशासनी अनुगामिनी माता सरस्वती।।४।।


जैनधर्म में सरस्वती का महत्त्व
पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन


कुछ नए प्रजेंटेशन्स

सम्यग्ज्ञान पत्रिका


समाचार


🛕 *Bhagvan Rishabhdev Zoom channel* 🛕

▶️ *Daliy Schedule🙏-*

7:15AM....Samaysar Swadhyay

2:00PM....Gommatsar Jeevkand By - Mr.Pankaj ji Shah, Pune (Mh.)

3:15 PM....Saraswati Aradhana From Jambudweep-Hastinapur

7:00PM...Jinwar Aarti

7:10.PM...HH Gyanmati Mataji Aarti

7:25 PM...Padmanandi Granth Swadhyay

7:40 PM...Basic Knowledge of Jainism

▶️ *zoom पर जुड़ने के लिए लिंक👇-*

*Zoom app link-*

Meeting Id - 87106540812

Password- 123456

घर बैठें करें स्वाध्याय और जीतें पुरस्कार


🏘️🏘️👩🏻‍💻👨‍💻📖💯🎁🎁

  • श्री पद्मनन्दिपंचविंशतिका ग्रन्थ ऑनलाइन स्वाध्याय प्रतियोगिता*

🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆

🙏 *श्री पद्मनंदिपंचविंशतिका ग्रंथ*🙏

🪁🎤🪁🎤🪁🎤🪁🎤🪁🎤🪁

📖 -06-02-2021 को नवें स्वाध्याय संबंधी पूछे गए प्रश्न ।

❓❓❓❓❓❓❓❓❓👇

📌प्रश्न1- अरिहंत भगवान कौन से कर्मों को जीतने वाले होते हैं?

📌प्रश्न2 - आचार्य श्री पद्मनंदि ने संसार को किसकी उपमा प्रदान की है?

📌प्रश्न 3- सर्वज्ञ भगवान की वाणी कैसी होती है?

📌प्रश्न 4 - माॅं मोहिनी ने कितनी संतानों को जन्म दिया था? संख्या और नाम लिखो?

📌प्रश्न 5 –मोहिनी जी ने किस सन् में कहाॅं और किससे दीक्षा ली थी?

❓❓✅✅📱📱📱👇👇

इन प्रश्नों के उत्तर हमें वाट्स एप के माध्यम स् इस नं. पर भेजे -👇 *8171351392*

⌛⌛⏳⏳⏳

उत्तर भेजने की आखिरी तारीख 08-02-2021 है।

  • और सभी से अनुरोध है कि उत्तर देने के बाद अपना नाम पूरा पता और पिन कोड नंबर और मोबाइल नंबर भी उत्तर के नीचे लिखकर भेजें। अन्यथा मान्य नहीं किया जाएगा ।* धन्यवाद
पद्मनंदी पंचविंशतिका पढ़ें


श्री विमलनाथ भगवान


विमलनाथ भगवान का परिचय
Vimalnath.jpg

परिचय

पश्चिम धातकीखंड द्वीप में मेरू पर्वत से पश्चिम की ओर सीता नदी के दक्षिण तट पर रम्यकावती नाम का एक देश है। उसके महानगर में पद्मसेन राजा राज्य करता था। किसी एक दिन राजा पद्मसेन ने प्रीतिंकर वन में स्वर्गगुप्त केवली के समीप धर्म का स्वरूप जाना और यह भी जाना कि ‘मैं तीसरे भव में तीर्थंकर होऊँगा।' उस समय उसने ऐसा उत्सव मनाया कि मानों मैं तीर्थंकर ही हो गया हूँ। अनन्तर सोलहकारण भावनाओं द्वारा तीर्थंकर प्रकृति का बन्ध कर लिया। अन्त में सहस्रार स्वर्ग में सहस्रार इन्द्र हो गया।

गर्भ और जन्म

इसी भरत क्षेत्र के कांपिल्य नगर में भगवान ऋषभदेव का वंशज कृतवर्मा नाम का राजा राज्य करता था। जयश्यामा उसकी प्रसिद्ध महादेवी थी। उसने ज्येष्ठ कृष्ण दशमी के दिन उनका नाम ‘विमलनाथ' रखा।

क्रमशः

भक्तामर स्तोत्र


भक्तामर स्तोत्र-संस्कृत(आचार्य श्री मानतुंग कृत)

भक्तामर-प्रणत-मौलि-मणि-प्रभाणा-

मुद्योतकं दलित-पाप-तमो-वितानम्।
सम्यक्प्रणम्य जिन-पाद-युगं युगादा-
वालम्बनं भव-जले पततां जनानाम् ।।१।।

य: संस्तुत: सकल-वाङ्मय-तत्त्वबोधा-
दुद्भूत-बुद्धि-पटुभि: सुरलोक-नाथै:।
स्तोत्रैर्जगत्त्रितय-चित्त-हरै-रुदारै:,
स्तोष्ये किलाहमपि तं प्रथमं जिनेन्द्रम् ।।२।।

बुद्ध्या विनापि विबुधार्चित-पाद-पीठ,
स्तोतुं समुद्यत-मतिर्विगत-त्रपोऽहम्।
बालं विहाय जल-संस्थित-मिन्दु-बिम्ब-
मन्य: क इच्छति जन: सहसा ग्रहीतुम्।।३।।

वक्तुम गुणान् गुण-समुद्र शशांक-कान्तान्,
कस्ते क्षम: सुर-गुरु-प्रतिमोऽपि बुद्ध्या।
कल्पान्त-काल-पवनोद्धत-नक्र-चक्रम,
को वा तरीतु-मलमम्बुनिधिं भुजाभ्याम्।।४।।

सोऽहं तथापि तव भक्ति-वशान्मुनीश,
कर्तुं स्तवं विगत-शक्ति-रपि प्रवृत्त:।
प्रीत्यात्म-वीर्य-मविचार्य मृगी मृगेन्द्रं,
नाऽभ्येति किम निज-शिशो: परि-पालनार्थम्।।५।।
क्रमशः

आज का दिन - ६ मार्च २०२१ (भारतीय समयानुसार)


Icon.jpg तिथीदर्पण Icon.jpg

दिनाँक ६ मार्च २०२१
तिथी- फाल्गुन कृष्ण ८
दिन- शनिवार
वीर निर्वाण संवत- २५४७
विक्रम संवत- २०७७

सूर्योदय ०६.५१
सूर्यास्त १८.२७


अथ फाल्गुन मास फल विचार



Calender.jpg



यदि दिनांक सूचना सही नहीं दिख रही हो तो कॅश मेमोरी समाप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें

०-९ अं
परिमार्जित क्ष त्र ज्ञ श्र अः


कुल पृष्ठ- २९,२८८  •   इस साइट पर कुल देखे गये पृष्ठ- १,७२,८३,८५१   •   कुल लेख- ९७९   •   कुल चित्र- 29,407