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मंत्र आराधना


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सोलहकारण पूजा


सोलहकारण पूजा


-अथ स्थापना-गीता छंद-
दर्शनविशुद्धी आदि सोलह, भावना भवनाशिनी।
जो भावते वे पावते, अति शीघ्र ही शिवकामिनी।।
हम नित्य श्रद्धा भाव से, इनकी करें आराधना।
पूजा करें वसुद्रव्य ले, करके विधीवत थापना।।१।।

ॐ ह्रीं दर्शनविशुद्ध्यादिषोडशकारणभावनासमूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं दर्शनविशुद्ध्यादिषोडशकारणभावनासमूह! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं।
ॐ ह्रीं दर्शनविशुद्ध्यादिषोडशकारणभावनासमूह! अत्र मम सन्निहतो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।

क्रमशः...

"कर्म सिद्धान्त"


‘‘कर्मव्यवस्था पर टिका है जैन सिद्धान्त’’

प्रस्तुति- आर्यिका चंदनामती

संसार और मोक्ष की समस्त व्यवस्था कर्म के आधीन है। जिस सृष्टि की रचना में लोक परम्परानुसार ब्रह्माजी को कर्तारूप में माना जाता है, जैन सिद्धान्त के अनुसार वह ब्रह्मा और कोई नहीं, कर्म ही है। आचार्य श्री नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती ने कहा भी है—

देहोदयेण सहिओ जीवो आहरदि कम्म णोकम्मं।

पडिसमयं सव्वंगं तत्तायसिंपडओव्व जलं।।

अर्थात् यह जीव औदारिक आदि शरीर नामकर्म के उदय से योग सहित होकर ज्ञानावरणादिक आठ कर्मरूप होने वाली कर्म वर्गणाओं को तथा औदारिक आदि चार शरीर रूप होने वाली नोकर्म वर्गणाओं को हर समय चारों तरफ से ग्रहण करता है। जैसे कि आग से तपा हुआ लोहे का गोला पानी को सब ओर से अपनी तरफ खींचता है।

क्रमशः...

कार्यशाला


जैन इन्साइक्लोपीडिया : जैन समाज हेतु एक विशिष्ट उपलब्धि!

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दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापूर द्वारा संचालित इस बहुआयामी प्रोजेक्ट को देश की सर्वोच्च जैन साध्वी "पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी" की प्रेरणा एवं आशीर्वाद तथा योजनाप्रमुख "पूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका रत्न श्री चंदनामती माताजी" का संपादकत्व प्राप्त होने से इसकी सफलता एवं सार्थकता स्वतः ही स्पष्ट है।
प्रारंभिक रुप में यह ऑनलाइन विश्वकोश विकिपीडिया की तर्ज पर आधारित मीडिया विकी सॉफ्टवेयर में विकसित किया गया एक मात्र अनुपम प्रोजेक्ट है। इस विशाल प्रोजेक्ट से परिचित कराने हेतू पूज्य चंदनामती माताजी की प्रेरणा एवं आदेशानुसार रविवार दिनांक २० मार्च से दि. जैन त्रिलोक शोध संस्थान के तकनीकी "सचिव इंजि. रितेश जैन दोशी, भांडुप मुंबई" द्वारा कार्यशाला का आयोजन हर रविवार को ४:०० से ४:४५ तक भगवान ऋषभदेव झूम चॅनेल पर किया जा रहा है। भारत देश के अनेको प्रांत से युवा वर्ग🧑‍💻🧑‍💻👩‍💻👩‍💻 काफी रुचिपूर्वक इस कार्यशाला में भाग ले रहे है।
तो आइये! वर्तमान विश्व के लिए "जिओ और जीने दो" के सर्वाधिक आवश्यक सिद्धांत को इंटरनेट द्वारा जानने एवं उसके प्रचार-प्रसार हेतु अपनी इंटरनेट से जुड़ी युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित करें, योगदान करें और विज्ञान की इस देन का ज्ञान प्राप्ति हेतु लाभ उठाकर पूण्य प्राप्त करे www.encyclopediaofjainism.com

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सम्यग्ज्ञान पत्रिका


सूचना


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उपन्यास स्वाध्याय प्रतियोगिता


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स्वाध्याय के लिए क्लिक करें...

कृतिकर्म प्रयोग विधि


कृतिकर्म प्रयोग विधि /कायोत्सर्ग विधि

अथ देववन्दनाक्रियायां पूर्वाचार्यानुक्रमेण सकलकर्मक्षयार्थं भावपूजा-वंदनास्तवसमेतं चैत्यभक्तिकायोत्सर्गं करोम्यहम् ।

(इस प्रतिज्ञा वाक्य को बोलकर साष्टांग या पंचांग नमस्कार करके खड़े होकर मुकुलित हाथ जोड़कर तीन आवर्त एक शिरोनति करके मुक्ताशुक्ति मुद्रा से हाथ जोड़कर सामायिक दण्डक पढ़ें।)

सामायिक दण्डक

णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं
णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूणं||

चत्तारि मंगलं - अरिहंत मंगलं, सिद्ध मंगलं, साहु मंगलं, केवलि पण्णत्तो धम्मो मंगलं ।

चत्तारि लोगुत्तमा - अरिहंत लोगुत्तमा, सिद्ध लोगुत्तमा, साहु लोगुत्तमा, केवलिपण्णत्तो धम्मो लोगुत्तमा ।

चत्तारि सरणं पव्वज्जामि - अरिहंत सरणं पव्वज्जामि, सिद्ध सरणं पव्वज्जामि, साहु सरणं पव्वज्जामि, केवलि पण्णत्तो धम्मो सरणं पव्वज्जामि
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चक्रवर्ती भरत की 31फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित


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आज का दिन - २० अप्रैल २०२१ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक २० अप्रैल २०२१
तिथी- चैत्र शुक्ल ८
दिन- मंगलवार
वीर निर्वाण संवत- २५४७
विक्रम संवत- २०७८

सूर्योदय ०६.०९
सूर्यास्त १८.४४


अथ चैत्र मास फल विचार



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०-९ अं
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