यागमण्डल विधान

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यागमण्डल विधान के विषय में
प्रकाशक दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर
लेखक गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
पुस्तक के विषय में राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस के चातुर्मास में वी. नि. सं. २५२५, फाल्गुन कृष्णा चौदस सन् १९९९ में यह विधान लिखकर पूर्ण किया। प्रतिष्ठातिलक नामक प्राचीन प्रतिष्ठा ग्रंथ में
यह यागमण्डल विधान संस्कृत भाषा में निबद्ध है। श्री नेमिचन्द्र देव द्वारा रचित उसी यागमण्डल पूजा-विधान का पूर्ण आधार लेकर ही पूज्य माताजी ने अत्यल्प समय में उसकी हिन्दी पद्य रचना
प्राञ्जल भाषा में करके सर्वजन सुलभ बना दिया है। इस विधान में कुल ९ पूजाएँ हैं तथा २१० अघ्र्य और १२ पूर्णाघ्र्य हैं।
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