योगिभक्ति

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प्राकृत योगिभक्ति

थोस्सामि गुणधराणं, अणयाराणं गुणेहिं तच्चेहिं।

अंजलि-मउलिय-हत्थो, अभिवंदंतो सविभवेण।।१।।

सम्मं चेव य भावे, मिच्छाभावे तहेव बोधव्वा।
चइऊण मिच्छभावे, सम्मम्मि उवट्ठिदे वंदे।।२।।

दोदोसविप्पमुक्के, तिदंडविरदे तिसल्ल-परिसुद्धे।
तिण्णिय-गारव-रहिये, तियरण-सुद्धे णमंसामि।।३।।

चउविह-कसायमहणे, चउगइ-संसारगमण-भयभीए।
पंचासव-पडिविरदे, पंचिंदिय-णिज्जिदे वंदे।।४।।

छज्जीव-दयावण्णे, छडायदण-विवज्जिदे समिदभावे।
सत्तभय-विप्पमुक्के, सत्ता-णभयंकरे वंदे।।५।।

णट्ठट्ठ - मयट्ठाणे, पणट्ठ - कम्मट्ठ - णट्ठसंसारे।
परमट्ठ - णिट्ठियट्ठे, अट्ठगुणड्ढीसरे वंदे।।।६।।

णवबंभचेरगुत्ते, णवणय-सब्भावजाणगे वंदे।
दहविधम्मट्ठाई, दससंजमसंजदे वंदे।।७।।

एयारसंग-सुदसायर-पारगे बारसंग-सुदणिउणे।
बारसविहतव-णिरदे, तेरस-किरियादरे वंदे।।८।।

भूदेसु दयावण्णे, चउदस चउदस सुगंथ-परिसुद्धे।
चउदसपुव्व-पगब्भे, चउदस-मलवज्जिदे वंदे।।९।।

वंदे चउत्थ-भत्तादि-जावछम्मास-खवण-पडिवण्णे।
वंदे आदावंते, सूरस्स य अहिमुहट्ठिदे सूरे।।१०।।

बहुविहपडिमट्ठाई, णिसिज्ज-वीरासणेक्कवासी य।
अणिट्ठीव - वंâडुवदीवे, चत्तदेहे य वंदामि।।११।।

ठाणी मोणवदीए, अब्भोवासी य रूक्खमूली य।
धुदकेसमंसुलोमे, णिप्पडियम्मे य वंदामि।।१२।।

जल्ल-मल्ल-लित्तगत्ते, वंदे कम्ममल-कलुसपरिसुद्धे।
दीहणह-मंसुलोमे, तवसिरिभरिए णमंसामि।।१३।।

णाणोदया-हिसित्ते, सीलगुण-विहूसिए तवसुगंधे।
ववगयराय-सुदड्ढे सिवगइ-पहणायगे वंदे।।१४।।

उग्गतवे दित्ततवे, तत्ततवे, महातवे य घोरतवे।
वंदामि तवमहंते, तवसंजम - इड्ढिसंजुत्ते।।१५।।

आमोसहिए खेलोसहिए जल्लोसहिए तवसिद्धे।
विप्पोसहिए सव्वोसहिए वंदामि तिविहेण।।१६।।

अमय-महु-खीर-सप्पिसवीए अक्खीण-महाणसे वंदे।
मणबलि-वचबलि-कायबलिणो य वंदामि तिविहेण।।१७।।

वरकुट्ठ-बीयबुद्धी पदाणुसारीय भिण्णसोदारे।
उग्गह-ईह-समत्थे, सुत्तत्थ-विसारदे वंदे।।१८।।

आभिणिबोहिय-सुद-ओहिणाणि-मणणाणि-सव्वणाणी य।
वंदे जगप्पदीवे, पच्चक्ख - परोक्खणाणी य।।१९।।

आयास-तंतु-जल-सेढिचारणे जंघचारणे वंदे।
विउवण-इड्ढिपहाणे, विज्जाहर-पण्णसवणे य।।२०।।

गइचउरंगुल-गमणे, तहेव फलपुâल्ल-चारणे वंदे।
अणुवम - तवमहंते, देवासुरवंदिदे वंदे।।२१।।

जियभय-जियउवसग्गे, जियइंदिय-परीसहे जियकसाए।
जियराय-दोसमोहे, जियसुह-दुक्खे णमंसामि।।२२।।

एवं मए भित्थुया, अणयारा रागदोसपरिसुद्धा।
संघस्स वरसमाहिं, मज्झवि दुक्खक्खयं दिंतु।।२३।।

अंचलिका-इच्छामि भंते! योगिभत्ति-काउस्सग्गो कओ तस्सालोचेउं, अड्ढाइज्ज-दीव-दोसमुद्देसु पण्णारस-कम्मभूमिसु आदावण-रुक्खमूल-अब्भोवास-ठाण-मोणवीरासणेक्क-पास-कुक्कुडासण-चउत्थ-पक्ख-खवणादियोगजुत्ताणं सव्वसाहूणं णिच्चकालं अंचेमि पूजेमि वंदामि णमंसामि, दुक्खक्खओ, कम्मक्खओ बोहिलाहो सुगइगमणं, समाहिमरणं, जिणगुणसंपत्ति होउ मज्झं।