रंग छलके ज्ञान गगरिया से रंग छलके

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रंग छलके ज्ञान


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तर्ज—रंग बरसे भीगे चुनरवाली......

रंग छलके ज्ञान गगरिया से रंग छलके...... हो......
रंग छलके ज्ञान गगरिया से रंग छलके...... हो......।। टेक.।।

जग को होली का, रंग सुहाता-२।
तुमको सुहाती ज्ञान गंग, जगत तरसे रंग छलके...... हो......

जग को सुहाती, जयपुर की चुनरिया-२।
तुम्हें भाती चरित्र चुनरिया, जो मन हरषे रंग छलके...... हो......

जग को सुहाते, रत्नन के गहने-२।
तुम्हें भाते ज्ञान के गहने, रतन बरसे रंग छलके...... हो......

जग को सुहाती, विषयों की लाली-२।
तुमको सुहाती जिनवाणी, जगत झलके रंग छलके...... हो......

गणिनी माता, ज्ञानमती जी-२।
कहती हैं हितकर वाणी, सरल मन से रंग छलके...... हो......