05. भारतीय संविधान में भगवान् वर्धमान

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भारतीय संविधान में भगवान वर्धमान

भगवान महावीर

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भारतीय संविधान की सुलिखित प्रति के ६३वें पृष्ठ पर अंकित जैनों के २४ वे तीर्थंकर वर्धमान—महावीर की तप में लीन मुद्रा का एक चित्र

Vardhmana Mahavir, the 24th Tirthankara in a meditative posture, another illustration form the Calligraphed edition of the Constitution of India. Jainism is another stream of spiritual renaissance which seeks to refine and sublimate man's conduct and emphasis's Ahinsa, (nonviolence) as the means to achieve it. This became a potent weapon in the hands of Mahatma Gandhi in his political struggle against the British Empire.

भारत को अहिंसा परमो धर्म: की संस्कृति प्रदान करने वाले जैनधर्म देश में आध्यात्मिक जागरण का एक और प्रवाह है, जिसने जीवन में आचार को सर्वाधिक महत्त्व दिया। महावीर की अहिंसा के अमोघ अस्त्र को महात्मा गाँधी ने अपनाया और भारत को शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य की दासता से मुक्त कराया।

भगवान महावीर का प्रभाव— ‘‘रिश्वतखोरी, बेईमानी, अत्याचार अवश्य नष्ट हो जायें, यदि हम भगवान महावीर की सुन्दर और प्रभावशाली शिक्षाओं का पालन करें। बजाय इसके कि हम दूसरों को बुरा कहें और उनमें दोष निकालें। अगर भगवान महावीर के समान हम सब अपने दोषों और कमजोरियों को दूर कर लें तो सारा संसार खुद ब खुद सुधर जाए।’’