06. राजस्थानी विवाह

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राजस्थानी विवाह

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राजस्थानी विवाह बहुत ही धूमधाम के साथ रीति रिवाजों एवं परम्पराओ का पालन करते हुए सम्पन्न होते हैं, यहां सजातीय विवाह का दृढ़ता से निर्वाह किया जाता है।

सगाई' — पत्रिका मिलान के बाद वर के घर पर सगाई की जाती है, जिसमें महिलाएँ सम्मिलित नहीं होतीं, वधू का भाई, वर को तिलक लगाकर तलवार, वस्त्र, मिठाई आदि उपहार स्वरूप देता है।

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गणपति स्थापना' — विवाह पूर्व यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण आयोजन है, जिसमें गणपति की प्रतिमा की स्थापना के साथ, गृह शांति के लिए हवन भी किया जाता है।

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पीठी' — चंदन एवं हल्दी के लेप को विवाह के कुछ दिन पूर्व, कन्या तथा वर को लगाना शुरू कर दिया जाता है, इसे पीठी कहते हैं। पीठी लगने के बाद वर—वधू घर से बाहर नहीं निकलते। पीठी समारोह, विवाह के दिन तक चलता है।

महफिल' — राजस्थानी विवाह में महफिलों का बहुत महत्व है। महिलाओं एवं पुरुषों की अलग—अलग महफिलें आयोजित की जाती हैं, महिलाओं की महफिल में पारंपरिक घूमर नृत्य किया जाता है।

जनेऊ एवं पल्ला दस्तूर' — विवाह के एक दिन पूर्व जनेऊ का कार्यक्रम होता है और वर पक्ष द्वारा वधू के घर, पल्ला दस्तूर लाया जाता है। इस अवसर पर वर पक्ष द्वारा वस्त्र आभूषण एवं विभिन्न वस्तुएं, वधू को भेंट की जाती हैं। राजस्थानी विवाह में केवल पुरुष ही गाजे बाजे के साथ विवाह स्थल तक जाते हैं।

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विवाह — बारात के विवाह स्थल तक पहुँचने पर, वर को महिलाओं के कक्ष में ले जाया जाता है, जहाँ वधू की मां वर की आरती करती हैं। इसके पश्चात् वर को मण्डप में लाया जाता है। यहां कन्यादान सम्पन्न होता है, मंत्रोच्चारण के बीच वर—वधू हवन कुण्ड की अग्नि के फेरे लेते हैं।

विवाहोपरांत समारोह — बारात के साथ वर—वधू के घर पहुंचने पर वधू को उसके पति के घर में गृह प्रवेश कराया जाता है, इसके पश्चात् दिन भर पूजा अर्चना एवं विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।