09. नवमाँ भव

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(नवमाँ भव)

प्रश्न १ -अच्युतेन्द्र की आयु कितने सागर की थी?

उत्तर -२० सागर।

प्रश्न २ -कितने वर्ष बाद उनका मानसिक आहार होता था?

उत्तर -२० हजार वर्ष बाद।

प्रश्न ३ -कितने वर्ष बाद वे श्वासोच्छ्वास लेते थे?

उत्तर -बीस पक्ष (१० माह) बीत जाने पर।

प्रश्न ४ -उनका शरीर कितने हाथ का था?

उत्तर -साढ़े तीन हाथ का।

प्रश्न ५ -अच्युत स्वर्ग में जन्म लेने के बाद सर्वप्रथम उन्होंने क्या किया?

उत्तर -अपने दिव्य अवधिज्ञान के व्दारा सारी बातें जानकर वे इन्द्र मंगल स्नान आदि विधिवत् करके सबसे पहले जिनेन्द्रदेव की पूजा करते हैं।

प्रश्न ६ -उसके पश्चात् उन्होंने क्या किया?

उत्तर -उसके पश्चात् उन्होंने अपनी विभूति का, देवांगनाओं का अवलोकन किया।

प्रश्न ७ -देवों में क्या विशेषता होती है?

उत्तर -उनके शरीर में मल-मूत्र, पसीना आदि नहीं निकलता है, न उनकी पलकें झपकतीं हैं, न नख और केश ही बढ़ते हैं। बुढ़ापा, अकालमृत्यु और व्याधि भी उनके नहीं है।

प्रश्न ८ -अच्युतेन्द्र की चर्या क्या है?

उत्तर -इन्द्रराज अपने परिवार देवों के साथ कभी नन्दीश्वर में पूजा रचाते हैं, कभी सुमेरु पर्वतों की वंदना के लिए चले जाते हैं, कभी सीमंधर आदि तीर्थंकर के समवसरण में दिव्य ध्वनि के व्दारा दिव्य धर्मामृत का पान करते हैं तो कभी ऋषि, मुनियों के दर्शन का लाभ लेते हैं। कभी नंदनवन में क्रीड़ा करते हैं तो कभी सभा में बैठकर देव-देवांगनाओं को संतुष्ट करते हुए मनोविनोद करते हैं। कभी-कभी उन्हें धर्म का उपदेश देते हुए कृतार्थ हो जाते हैं।

प्रश्न ९ -इतने अतुल वैभव को प्राप्त कर क्या उसमें आसक्त हो जाते हैं?

उत्तर -नहीं, भावी तीर्थंकर वे देवेन्द्र इस अतुल वैभव को भोगते हुए भी उसमें आसक्त नहीं होते हैं।

प्रश्न १०-अच्युतेन्द्र अपनी आयु पूर्ण कर कहाँ जन्मे?

उत्तर -अच्युतेन्द्र अपनी आयु पूर्ण कर वाराणसी नगरी में महाराजा अश्वसेन के घर जन्मे।

प्रश्न ११-कमठ का जीव वह नारकी मरकर कहाँ गया?

उत्तर -वह नारकी अपनी नरकायु पूर्ण कर भगवान पार्श्वनाथ की माता वामा देवी का पिता हुआ।