12. क्षीणमोह गुणस्थान

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१२. क्षीणमोह गुणस्थान

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मोहनीय कर्म के सर्वथा नष्ट हो जाने से क्षीणकषाय मुनि निर्ग्रंथ वीतराग कहलाते हैं ।