18 अगस्त 2017 प्रवचन

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प्रात:काल पारस चेेैनल के प्रवचन ....18 अगस्त 2017 (मुंबई में)
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प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी द्वारा प्रात:कालीन मंगल बेला में लक्ष्मी और सरस्वती माता का स्मरण कराया। आज पूज्य माताजी ने जैनम हॉल में हो रहे सिद्धचक्र महामण्डल विधान एवं दशलक्षण पर्व में २४ कल्पद्रुम महामण्डल विधान के बारे में सभी भक्तगणों को विस्तृत जानकारी प्रदान की। सिद्धचक्र विधान में पूज्य बड़ी माताजी ने बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ संजोई हैं-

"मिलता है सिद्ध भक्ति का अवसर, यह पुण्य का कमल तो खिलता कभी-कभी"

इतने सुन्दर शब्द भक्ति के धागे में पिरोये गये हैं, यह एक सुंदर माला बन जाती है। पूज्य माताजी ने कल्पद्रुम महामण्डल विधान के बारे में बताया कि यह विधान तो किसी भी महीने में किया जाता है। लेकिन यह विधान सोलहकारण, भाद्रपद में किया जाये वह अनंतगुणा फलीभूत होता है। जो चक्रवर्तियों के द्वारा यह विधापन किया जाता है, जो किमिच्छक दान बांटते हैं, उनको कितने उपवास का फल मिलता है। आप विधान के माध्यम से पुण्य का संचय करेंगे।

स्वामीजी ने कहा कि अनादिकाल से यह आठ कर्म हमें और आप को संसार में घुमा रहे हैं, कर्म के निमित्त से जीव संसारी होकर किसी भी गति में पहुंच सकता है। जैन संस्कृति के अनुसार यह आत्मा सिद्धशिला पर जाने के बाद दोबारा वापस नहीं आती है। पंचमकाल में सिद्ध अवस्था नहीं प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन उस मार्ग पर चल सकते हैं। स्वामीजी ने शांतिसागर जी की पुण्यतिथि मनाने की प्रेरणा सब भक्तों को दी। २३ अगस्त को पुण्यतिथि पर १००० युवा मुम्बई महानगर की कालोनियों से आ रहे हैं। माताजी के सान्निध्य में यह कार्यक्रम सम्पन्न होगे।

पूज्य आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने बहुत श्रुतभक्ति पर अपने उद्बोधन पारस टी.वी. के माध्यम से भक्तों को सुनाया। क्या है बहुश्रुतभक्ति भावना-

स्व-समय पर-समय पर विस्तार से जानने वाले बहुतश्रुत उपाध्यायों परमेष्ठियों में भावों की विशुद्धिपूर्वक अनुराग होना बहुश्रुतभक्ति है। बहुश्रुत को धारण करने वाले महामुनि ही हम लोगों को सच्चा मोक्षमार्ग दिखलाते है। कुन्दकुन्द आचार्य ने रयणसार में श्रावकों की चर्या, मूलाचार में मुनियों की चर्या बताई। भव्यात्माओं! गौतम गणधर की वाणी साक्षात् उपलब्ध है। अर्हन्त तीर्थंकर भगवान महातीर्थ है, जीवन्त तीर्थ है। तीर्थंकरों के पदरज से तीर्थ बनते हैं। उन तीर्थ एवं तीर्थंकरों की भक्ति की प्रेरणा देते हुए सबको अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।