18 फरवरी 2016, प्रथम महामस्तकाभिषेक

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दिनाँक-१८ फरवरी २०१६, प्रथम महामस्तकाभिषेक

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    तिथि माघ शु. ग्यारस को भगवान ऋषभदेव प्रतिमा का वह स्वर्णिम अवसर आया, जब पाषाण की प्रतिमा को भगवान बनने के उपरांत सर्वप्रथम भक्तों ने पंचामृत महामस्तकाभिषेक से सराबोर कर दिया। १८ फरवरी का दिवस हजारों-लाखों वर्ष के इतिहास में अत्यन्त स्वर्णिम दिवस के रूप में जाना जायेगा, जिस दिन भगवान की प्रतिमा पर इतिहास का सर्वप्रथम सिद्धि कलश करने का सौभाग्य श्री कमल कुमार जैन-


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सौ. अनुपमा जैन व सुपुत्र कुशाग्र जैन, अमन जैन-आरा (बिहार) परिवार को प्राप्त हुआ। ऐसे महान सौभाग्यशाली युवा दम्पत्ति एवं उनके पुत्रों का जन्म-जन्मातरों का महान पुण्य उदय में आया और कलश अर्चन के साथ पूज्य

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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के करकमलों से उन्होंने विशाल रजत कलश प्राप्त करके १०८ फुट ऊँची भगवान ऋषभदेव प्रतिमा की ओर अपने कदम बढ़ाए। वह घड़ी ११ बजकर १५ मिनट की अत्यन्त शुभ घड़ी थी, जब भगवान के मस्तक पर इतिहास का प्रथम कलश ढोरा गया। इसके साथ ही श्री सुरेश जैन कुलाधिपति-तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय-मुरादाबाद का परिवार भी महान सौभाग्यशाली रहा, जिन्होंने इस प्रतिमा पर अमृत कलश करने का सौभाग्य प्राप्त किया। आपको भी पूज्य माताजी ने मंत्रोच्चारपूर्वक अपने हाथों से मंगल कलश प्रदान किया और आपके साथ प्रथम हीरक कलश करने के

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सौभाग्यशाली जम्बूद्वीप एवं ऋषभगिरि-मांगीतुंगी के पीठाधीश कर्मयोगी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी को भी पूज्य माताजी ने कलश भेंट कर मंगल अभिषेक की बेला हेतु प्रस्थान कराया। इस अवसर पर विशेष रूप से विशिष्ट अतिथि के रूप में दिगम्बर जैन समाज के सिरमौर एवं राजा कहे जाने वाले डॉ० डी० वीरेन्द्र हेग्गड़े परिवार-धर्मस्थल का भी सानिध्य प्राप्त हुआ और उनके साथ लघु भ्राता श्री सुरेन्द्र हेग्गड़े व अन्य परिवारजन भी उपस्थित हएु , जिन्होंने भगवान के प्रथम महामस्तकााभिषेक में भाग लेकर स्वयं अपने जीवन में महान पुण्य अर्जित किया और महोत्सव की गरिमा को वृद्धिंगत किया। साथ ही भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की प्रथम महिला - अध्यक्ष तथा अंतर्राष्ट्रीय पच्ंकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति, ऋषभगिरि -मांगीतुंगी की उपाध्यक्ष सौ० सारिता एम.के . जैन- चेन्नई ने भी इस अवसर पर भगवान के मस्तकाभिषेक का पुण्य अर्जित किया।

    इस प्रकार भगवान के प्रथम कलश के उपरांत क्रमश: पंचकल्याणक महोत्सव के प्रमुख पात्रों द्वारा भगवान का अभिषेक किया गया और प्रतिमा निर्माण के विशिष्ट दातारों तथा विदेश से पधारे सैकड़ों एन.आर.आई. भक्तों द्वारा भगवान का अभिषेक किया गया।

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    इस दिन भगवान का भव्य पंचामृत महामस्तकाभिषेक भी हुआ, जिसमें विशेषरूप से दूध से अभिषेक करने का सौभाग्य श्री अनिल कुमार जैन-सौ. अनीता जैन, कमल मंदिर, प्रीतविहार- दिल्ली परिवार ने प्राप्त किया। इसी क्रम में हरिद्रा से अभिषेक का सौभाग्य श्री महावीर प्रसाद जैन- कुसुमलता जैन, बंगाली स्वीट्स, दिल्ली परिवार ने तथा लालचंदन व केसर से अभिषेक श्री कमलचंद जैन - मैनासुन्दरी जैन, खारीबावली-दिल्ली परिवार ने व सफेद चंदन से अभिषेक का सौभाग्य श्री दीपक जैन-सुभाषिनी जैन, वाराणसी ने प्राप्त किया। पंचामृत अभिषेक के क्रम में इस दिन भगवान के मस्तक पर शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री नीलेश अजमेरा-सौ. सोनाली अजमेरा परिवार-मुम्बई ने प्राप्त किया। सभी भक्तों में भगवान के पंचामृत अभिषेक को देखने का आकर्षण विशेष था, जिसके लिए हजारों नर-नारीजन ऊपर पर्वत पर एवं नीचे एल.ई.डी. स्क्रीन पर भगवान की मनोहारी प्रतिमा को निहार रहे थे।     १२५ पिच्छीधारी साधु-संतों के विशाल संघ समूह के मध्य जब भगवान के मस्तक पर दूध, लालचंदन, सपेâद चंदन, हरिद्रा, सर्वोषधि, केसर, पुष्पवृष्टि आदि सामग्री से अभिषेक किया गया, तब
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शिख से नख तक कल-कल बहती दूध व पंचामृत की धाराओं ने हजारों भक्तों के मनोमालिन्य को दूर करके आत्म शांति की प्राप्ति कराई। हर भक्त भगवान के अभिषेक को देखकर और करके अत्यन्त संतुष्ट और हर्षपूर्वक नजर आ रहा था। ऐसी महान प्रतिमा पर भगवान के अभिषेक से लाखों श्रद्धालु भक्तों ने अपने अंतरंग की पवित्री को प्राप्त किया और सुख का अनुभव किया। साधु-संतों के मन में भी हर्ष की लहर और भगवान की प्रतिमा के प्रति सौम्य आदर प्रस्तुत हो रहा था, जब उन्होंने इस प्रतिमा का भव्य महामस्तकाभिषेक अपने स्वत: नयनों से देखकर पुण्यार्जन किया।

    इन सबके साथ हर व्यक्ति के मन में सर्वोच्च जैन साध्वी, दिव्यशक्ति, महासाधिका, गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के प्रति भी अनंत उपकार की भावनाएँ जन्म ले रही थीं, जिनकी प्रेरणा से दिगम्बर जैन धर्म के ऐसे महाजिनबिम्ब का निर्माण हुआ है, जिसके द्वारा इस विश्वलोक में लाखों-लाख वर्षों तक जैनधर्म में बताये गये दिगम्बरत्व तथा अहिंसा परमो धर्म की परिभाषा गुंजायमान होती रहेगी। यह प्रतिमा इस संसार में जैनधर्म को शाश्वत बनाये रखने के लिए एक बहुमूल्य रत्न के समान समाज को प्राप्त हुई है, जिसके लिए पूज्य माताजी के प्रति यह समाज लाखों वर्ष तक कभी उनके उपकार चुका नहीं पायेगी। ऐसी भावनाओं के साथ ओतप्रोत होते हुए ऋषभगिरि, मांगीतुंंगी में आये हजारों-लाखों दिगम्बर जैन श्रद्धालुओं ने भगवान के महामस्तकाभिषेक का पुण्य अर्जित किया।

१९ फरवरी से ६ मार्च २०१६ तक लगातार हुआ भगवान का महामस्तकाभिषेक

    १९ फरवरी से १०८ फुट विशाल भगवान ऋषभदेव प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक सम्पूर्ण भारत देश के दिगम्बर जैन भक्त परिवारों द्वारा लगातार ६ मार्च तक चलता रहा। इस क्रम में १९ व २० फरवरी को पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में भाग लेने वाले प्रथम व द्वितीय श्रेणी के इन्द्र- इन्द्राणियों द्वारा एवं विभिन्न स्थानों के रत्न कलश, स्वर्ण कलश व रजत कलश के पुण्यशाली भक्तों द्वारा भगवान का महामस्तकाभिषेक किया गया। इसके पश्चात् प्रतिदिन भारत देश के विभिन्न प्रान्तों की निर्धारित तिथियों के आधार पर अलग-अलग प्रदेश से आकर भक्तों ने भगवान के अभिषेक का पुण्य अर्जित किया।

    इस क्रम में २१ फरवरी को सूरत महानगर एवं गुजरात प्रदेश के कलश आरक्षण वाले भक्तों द्वारा महाभिषेक हुआ। विशेषरूप से २१ फरवरी को प्रथम कलश करने का सौभाग्य दीवान परिवार के श्रीमती वंâचन देवी जैन व उनके सुपुत्र श्री विद्या प्रकाश जैन, श्री संजय जैन, श्री अजय जैन दीवान (सीकर वाले), सूरत (गुजरात) ने प्राप्त किया।

    २२ फरवरी को राजधानी दिल्ली, मुम्बई महानगर, पंजाब एवं हिमाचल के भक्तों द्वारा, २३ फरवरी को महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड के भक्तों द्वारा, २४ फरवरी को पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, आसाम आदि पूर्वांचल प्रदेशों के भक्तों द्वारा, २५ फरवरी को राजस्थान प्रदेश के भक्तों द्वारा, २६ फरवरी को हरियाणा, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल, पाण्डीचेरी आदि विभिन्न प्रान्तों के भक्तों द्वारा, २७ फरवरी को अहमदाबाद, गुजरात, दमनदीव के भक्तों द्वारा, २८ फरवरी को प्रमुख रूप से इन्दौर एवं सम्पूर्ण मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के भक्तों द्वारा, २९ फरवरी को विशेषरूप से महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के सांगली, कोल्हापुर, बेलगांव आदि जिले के भक्तों द्वारा एवं १ मार्च को दक्षिण उपाध्याय मण्डल, विद्वत् गण एवं ब्रह्मचारी-ब्रह्मचारिणियों के द्वारा भगवान का अभिषेक सम्पन्न हुआ। इसके उपरांत लगातार विभिन्न स्थानों के भक्तों ने ६ मार्च तक भगवान का अभिषेक किया।

नई घोषणा के आधार पर ७ मार्च से पुन: महामस्तकाभिषेक सतत जारी हुआ

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    समिति द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव निर्धारित तिथियों के आधार पर ११ फरवरी से ६ मार्च तक अत्यन्त धूमधाम के साथ ठाट-बाटपूर्वक मनाया गया। लेकिन हजारों भक्तों के प्रतिदिन आवागमन की सूचना को देखते हुए तथा बच्चों की परीक्षाओं के कारण आने में असमर्थ परिवारों की सुविधा हेतु समिति द्वारा ७ मार्च से पुन: महामस्तकाभिषेक नियमित घोषित किया गया, जिसमें प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्तजन ने आकर भगवान का अभिषेक किया और अप्रैल-मई-जून २०१६ तक भी महामस्तकाभिषेक करने वाले भक्तों की सूचनाएं स्वीकृत की गर्इं।

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