20 अगस्त 2017 प्रवचन

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प्रात:काल पारस चेेैनल के प्रवचन ....20 अगस्त 2017 (मुंबई में)

आज प्रात:कालीन मांगलिक बेला में मांगीतुंगी में निर्मित १०८ फुट के भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा पूज्य माताजी की प्रेरणा बनी है। आने वाले यात्री उन मूर्ति के दर्शन करके इतना हर्षायमान होते हैं कि किन शब्दों में ऋषभ भगवान का गुणानुवाद किया जाये। पूज्य आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने उनके भावों को लेकर बहुत सी सुन्दर पंक्तियों में छोटा सा गीत लिखा है-

ज्ञानमती माताजी से पूछे सभी भाई, माता तूने ऋषभदेव मूर्ति क्यों बनाई ?

बोली मुस्कराती माता सुनो मेरे भाई, मैंने तो जिनधर्म की प्राचीनता बनाई।
एक सौ अठ फुट जिनवर की, छवि मन को भाई, सुनो मेरे भाई-
सिद्धक्षेत्र मांगीतुंगी का कण-कण पवित्र है, वही ध्यान करके पाया प्रेरणा पवित्र है।
तभी माता तूने सबको बात ये बताई, मूर्ति क्यों बनाई।
काम था कठिन बहुत ही, किन्तु सरल हो गया।

मेरी तेरी साधना से पूरा सहज हो गया।
देखो ऋषभगिरि की महिमा सारे जग में छाई। सुनो मेरे भाई।।

आज गिनीज बुक में प्रभु का नाम दर्ज हो गया।
शिष्यों और भक्तों का पूरा कर्तव्य हो गया।।

चंदनामती प्रभु पद में, भक्ति पुण्य ताई, मूर्ति क्यों बनाई..

भारतगौरव गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी ने सर्वप्रथम प्रवचन मे प्रवचन भक्ति भावना’पर प्रकाश डाला-

श्रुतदेवता के प्रसाद से कठिनतम से प्राप्त होने वाले और मोक्ष महल पर आरोहण करने के लिए ऐसे प्रवचन में भावविशुद्धिपूर्वक अनुराग करना प्रवचनभक्ति है।

पूज्य माताजी ने व्रत के बारे में बताया-कि श्रुतज्ञान व्रत में दृष्टिवाद के अंग में सूत्र नाम का जो दूसरा अधिकार है, उसमें ८८ अधिकार हैं। इसमें १५८ उपवास करने होते हें। अपनी शक्ति के अनुसार एकासन भी कर सकते हैं। श्रुतज्ञान व्रत-मतिज्ञान के २८, ११ अंग के ११ भेद हैं।

परिकर्म के २ सूत्र के ८८ भेद माने हैं। इसमें ८८ मंत्र प्राप्त हुए हैं। माताजी ने बताया कि विस्तार से आज इसका विवेचन तो है नहीं, हम उसके अधिकारी भी नहीं है। आज वर्तमान में जो शास्त्र उपलब्ध है, वह सब अंशमात्र है। हमारा मतिज्ञान, श्रुतज्ञान बहुत अल्प है। जैसे समुद्र मेंसरसों के समान। जैन वाणी हमारे, आपके जीवन में मंगलकारी हों। यही प्रेरणा और आशीर्वाद है।

स्वामीजी ने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा-कि पूज्य माताजी के दर्शन और सैद्धान्तिक हजारों, लाखों लोगों को पारस टी.वी. के माध्यम से प्राप्त हो रहे हैं। पूज्य माताजी के सान्निध्य में प्रतिदिन कोई न कोई कार्यक्रम चलते रहते हैं।

२३ तारीख को आचार्य श्री की पुण्यतिथि का कार्यक्रम माताजी के सान्निध्य में प्रात: ६ बजे से ९.३० बजे तक युवा जागृति सेमिनार के रूप में मनाया जायेगा। १००० युवाओं की आने की सूचना प्राप्त हुई है। भगवान एवं आचार्य श्री की प्रतिमा का विशिष्ट अभिषेक अनेक फलों के रसों से होगा।