25 अगस्त 2017 प्रवचन

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उषा वंदना के साथ आप सभी लोगों का सुप्रभात हुआ है। दशलक्षण पर्व में २४ कल्पद्रुम महामण्डल विधान १ नहीं २४-२४ महामण्डल विधान रचाये जायेंगे। समवसरण के २४ समवसरण निर्मित हो चुके हैं। कल भादों शुक्ला तृतीया को जैनम हॉल के विशाल प्रांगण के अंदर ध्वजारोहण हुआ। पूज्य माताजी ने सभी को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। हम लोगों ने शांतिसागर महाराज को नहीं देखा जिन्होंने अपने चतुर्थकालीन गुरु के दर्शन करके अपना जीवन धन्य किया है, ऐसी पूज्य माताजी के दर्शन करके हम लोग यह समझ रहे हैं कि हमने शांतिसागर जी, वीरसागर जी महाराज के दर्शन कर लिए हैं। समवसरण की भक्ति क तुच्छ प्राणी मेंढक ने किया रास्ते में उसका देवलोक हो गया था, उसने अपने देवलोक नाम को सार्थक किया था। वह देव महावीर भगवान के समवसरण में चला गया। दशलक्षण पर्व में पूज्य माताजी हर वर्ष तत्त्वार्थसूत्र का प्रतिदिन १-१ अध्याय की वाचना करवाती है। इसके साथ ही चतुर्थकालीन गौतम गणधर की वाणी जो दश अध्याय हैं, १-१ अध्याय की वाचना दोपहर में होती हैं आत्मा में इतनी विशुद्धि आयेगी, इतना पुण्य का संचय होगा। आप इस वाणी को चाहे प्रवचन के माध्यम से चाहे अपने स्वाध्याय के माध्यम से गौतम गणधर की वाणी को पढ़ सकते हैं। १ अध्याय पढ़ने से १०० उपवास का फल मिलता है। जैन विद्या का कोई अंत नहीं है। आज तो मात्र उसका अंश ही है। चारों अनुयोगों में निबद्ध यही है, जिज्ञासुओं के लिए शास्त्र यही है। अरे भव्यों हम शास्त्रों का सदुपयोग करना है। इसी अग्नि में तपकर शुद्ध सोना सम चमकना हैं। गुरु मुख से करे अध्ययन तो पथ से नहीं भटक सकते। आर्ष गुरु शांतिसागर को हमें निज गुरु समझना है। आर्ष गुरु ज्ञानमती माँ को हमें निज गुरु समझना है। पूजय ज्ञानमती माताजी ने अपने जीवन में जिनवाणी से हटकर एक शब्द का उच्चारण अपनी जिह्वा से नहीं किया, जो भी अपने गुरु से पाया, वहीं बोलती हैं। छपी हुई वाणी को छपाकर जिन्होंने हमें दिया है, ऐसी माताजी के मुखारविंद से गौतम गणधर की वाणी को सुनते हैं। पूज्य गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी ने अपने उद्बोधन में कहा! दशलक्षण पर्व २६ तारीख से शुरू हो रहा है, मुम्बई के पंचाग में दशमी दो होने से दशलक्षण पर्व ११ दिन का है।

कल्पद्रुम विधान चतुर्थकालीन चक्रवर्तियों के द्वारा हुआ करता था। तीर्थंकर से बढ़कर कोई पुण्यशाली नहीं हो सकता। आज पंचमकाल में चक्रवर्ति नहीं है, लेकिन स्थापना निक्षेप से आप लोग ही चक्रवर्ति बनकर कल्पद्रुम विधान करेंगे। सभी भक्तों के लिए पूज्य माताजी ने कहा! अपने सम्यग्ज्ञान को दृढ़ करना, यह हमारे मोक्ष के लिए मूल कारण है। दशलक्षण पर्व हमारे और आप सभी के जीवन में मंगलकारी हो, यही सभी के लिए मंगल आशीर्वाद है।