5 सितम्बर 2017 प्रवचन दशलक्षण पर्व के

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दशलक्षण पर्व पर-उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म

मुम्बई शहर का चमका भाग्य सितारा

आज २४ कल्पद्रुम महामण्डल विधान मंडप में जहाँ ९६ प्रतिमाएँ विराजमान हैं और सरस्वतीस्वरूपा गणिनी ज्ञानमती माताजी के सान्निध्य में विधान चल रहा है। वहीं पर एक भक्ति नृत्य कु. भारती जैन-दरियाबाद (उ.प्र.) ने प्रस्तुत किया।

रंग छलके ज्ञान गगरिया से रंग छलके,

यह भजन आर्यिका श्री चंदनामती माताजी द्वारा रचित है। नृत्य के पश्चात् आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी ने क्रम प्राप्त उत्तम ब्रह्मचर्य व्रत के बारे में बताया कि आत्मा ही ब्रह्म है, उस ब्रह्मस्वरूप आत्मा में चर्या करना सो ब्रह्मचर्य है। इस विधचर्या को करने वाला ब्रह्मचारी कहलाता है। दिगम्बर मुद्रा ही ब्रह्मचर्य की पराकाष्ठा को बतलाता है।

पूज्य गणिनी ज्ञानमती माताजी ने दशलक्षण पूजा में प्रतिपादित करते हुए लिखती है-

दशलक्षण मय सार्वभौम को, नितप्रति शीश नमाते हैं।

उत्तम ब्रह्मचर्य प्रगटित हो, यही भावना भाते हैं।।

ब्रह्मचर्य व्रत ऐसा है, गुण अनन्त भर देता है।

मुनिगण पूर्ण ब्रह्मचारी, मुक्तिवधू के भरतारी,

सीता के व्रत शील भले, अग्नि हुई जल कमल खिले।

सेठ सुदर्शन शीलव्रती, शूली से सिंहासन भी।

महानुभाव! ब्रह्मचर्य व्रत सारे गुणों में सिरमौर है, उसके बिना कितने ही गुण ही,सब शून्य के समान हैं, ब्रह्मचर्य व्रत ऐसा है जिसमें १०० से अधिक संख्या की पूर्ति होती है। सीता के शील का एवं सेठ सुदर्शन का स्मरण करना है। इसमें प्रथमानुयोग का स्वाध्याय हो जाता है।

आज कल्पद्रुम विधान की बड़ी जयमाला के साथ पूर्णाहुति हवन है। सैकड़ों लोगों ने मण्डप की १०८ एवं १००८ तक प्रदक्षिणा लगाई है। आज माताजी के सान्निध्य में कमेटी द्वारा उनका सम्मान हुआ। तपस्या करने वालों को भी कमेटी द्वारा सम्मान किया गया| पूज्य माताजी का मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ। २४ समवसरण बहुत ही खूत-सूरती से भक्तों ने सजाया। सभी देशवासियों ने २४ समवसरण के दर्शन करके महान पुण्य का अर्जन किया है।

आज वासुपूज्यनाथ भगवान का निर्वाणलाडू ११ किलों का मुम्बई महानगर के और भी सैकड़ों की संख्या में पधारे महानुभाव ने पूज्य गणिनी ज्ञानमती माताजी के सान्निध्य में निर्वाणलाडू चढ़ाया। सभी भक्तों ने बहुत ही भावविभोर होकर भक्ति का आनंद लिया। इसके पश्चात् मेघमाला व्रत के उपलक्ष्य में पूज्य माताजी ने १००८ कलशों से सभी भगवन्तों का अभिषेक कराया। सभी भक्त अपने को बहुत ही धन्य-धन्य समझ रहे हैं।

हस्तिनापुर में ७२ फुट ऊँचा अधर आकाश में भगवान शांतिनाथ का समवसरण निर्मित हो रहा है। माताजी के लिए जो वहां से निमंत्रण आया हे, उसी पर एक भक्ति नृत्य मुम्बई के पारसनाथ युवक मण्डल ने प्रस्तुत किया। निमंत्रण आया है, स्वामीजी ने नभ में अधर जहाँ समवसरण बनाया।

सारे जग में तेरी धूम, बाबा हो बाबा सभी बालकों ने पैरोड़ी किया|

पूज्य ज्ञानमती माताजी ने ब्रह्मचर्य व्रत में बताया और सभी भक्तों को समवसरण का ध्यान कराया। प्रवचन के अंत में माताजी ने कहा सभी लोग समवसरण का ध्यान करके अनंत पुण्य का संचय करो, सभी के लिए बहुत-बहुत मंगल आशीर्वाद है।