भगवान शान्तिनाथ जन्मकल्याणक- २०१३

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दिनांक-7-6-2013
भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप व निर्वाणकल्याणक मनाया गया
हस्तिनापुर जम्बूद्वीप स्थल पर दिनांक 7 जून 2013 को जैनधर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ का जन्म, तप एवं निर्वाणकल्याणक मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः ऐरावत हाथी पर भगवान की शोभायात्रा निकाली गई तथा 101 फुट ऊंचे सुमेरु पर्वत की पांडुक शिला पर जन्माभिषेक किया गया। पश्चात् भगवान शांतिनाथ मंदिर में भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं 108 रजत कलशों से अभिषेक हुआ। मोक्षकल्याणक के उपलक्ष्य में भगवान की पूजन करके भक्तों ने निर्वाणलाडू समर्पित किया।

पूज्य माता जी के सानिध्य में भगवान को ऐरावत पर ले जाते श्रद्धालु


मध्यान्ह में नवग्रह शांति विधान कर मांडले पर अर्घ्य चढ़ाए गए। पश्चात् 2 बजे से अखिल भारतीय दिगम्बर जैन महिला संगठन द्वारा चारित्रवर्धनोत्सव वर्ष के अन्तर्गत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने सभी को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने सभी को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि -आज से करोड़ों वर्ष पूर्व हस्तिनापुर की पुण्य धरा पर ही भगवान शांतिनाथ ने ज्येष्ठ कृ. 14 को जन्म लिया था तथा उनके 4 कल्याणकों से पवित्र यह तीर्थ है। इसी धरती पर से उन्होंने चक्रवर्ती के रूप में छहखंड पृथ्वी पर शासन किया था। वे तीर्थंकर, चक्रवर्ती और कामदेव इन तीन पदों के धारी थे और उनके दिव्य समवसरण की रचना भी सर्वप्रथम यहीं हुई थी दिव्यज्ञान प्रगट होने के पश्चात्। सम्मेदशिखर सिद्धक्षेत्र की 19वीं कुंदकूट नामक टोंक से भगवान ने निर्वाण धाम को प्राप्त किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम पूज्य गणिनी ज्ञानमती माताजी, पूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी तथा संघस्थ सभी साधुओं के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। पीठाधीश स्वीन्द्रकीर्ति स्वामी जी के निर्देशन में कार्यक्रम हुआ। सायंकाल 108 दीपकों से मंगल आरती, भगवान का पालना झुलाना तथा रत्नवृष्टि का कार्यक्रम हुआ।
सौधर्म इन्द्र श्री कांतिलाल श्रीपाल जी शाह बांसवाड़ा (राज.) निर्वाणलाडू साहू सुभाषचंद जी-सौ मंगल जी-जालना व कल्याणमल जी पन्नालाल जी जैन-डूंगरपुर (राज.) तथा रत्नवृष्टि भी निर्मल कुमार गौतम लाल जी-डूंगरपुर (राज.) ने बोली के माध्यम से ये सौभाग्य प्राप्त किया।
-जीवन प्रकाष जैन, प्रचार संयोजक