8 सितम्बर 2017 पारणा महोत्सव

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पारणा महोत्सव

उषा वंदना के साथ सभा का शुभारंभ हुवा|

पूज्य चंद्नामती माताजी ने कहा,बंधुओ सोलह्करण पर्व के पारणा का आज अंतिम दिवस है|

त्याग का संदेश देने के लिए आते है'यह पर्व|साधू संत तो व्रत उपवास करते ही है,लेकिन ग्रहस्थ जीवन में रहकर भी इस पंचम काल में कमजोर शरीर से उपवास करते है |

मुंबई नगर की भौतिक नगरी में आज पूज्य ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में ३२ उपवास करने वाले व्रती आये,और सभी लोगो ने उनके उपवासो की अनुमोदना की|

सोलहकारण व्रत करने वालों में से मुंबई से आशा पाटनी जी,रतलाम से भैय्या लालजी एवं लखनऊ उत्तर प्रदेश से पधारे सुषमा जैन का सम्मान ब्र.बीना बहन जी ने माताजी की प्रेरणा से किया|

ज्ञानमती माताजी जैसी नारी इतने बड़े-बड़े कार्य कर सकती है,गृहस्थ में रहकर एक नारी भी व्रत उपवास कर सकती है|आज नारियों ने व्रत उपवास करके समाज का मस्तक ऊँचा किया है|

सभी लोगो ने जिनेन्द्र देव की प्रतिमाजी का अभिषेक किया,नमिनाथ भगवान के गर्भ कल्याणक का अर्घ्य चढ़ाया| और माताजी से सभी व्रतियों ने आशीर्वाद प्राप्त किया|

पूज्य चंदनामती माताजी ने धर्म की परिभाषा बताई-

एक युवक घर से निकलता है,धर्म का सही स्वरूप जानने-

सबसे पहले उसने प्रोफ़ेसर से पूछा-

What is the meaning of the true religion please teel me.

प्रोफ़ेसर कहते है-धार्मिक उपदेश देना गद्दी पर बैठकर यही मेरा धर्म है|

युवक एक संत के पास पहुचता है,संत से धर्म की परिभाषा पूछता है

संत कहते है-संसार के दुखो से छुटकर जो उतम सुख में पहुचावें वही धर्म है|

पूज्य चंदनामति माताजी ने व्रत का अर्थ बताया |

व से लेना 4 की संख्या ,र से 2 की लेना- यह हुवे 42

42 को उल्टा करो तो बनते हैं २४ तीर्थंकर भगवान|

इनका सुमिरन करके व्रतो को तुम तकदीर में बदलो|

२४ तीर्थंकर की भक्ति से होते है व्रत और उपवास |

पूज्य ज्ञानमती माताजी ने व्रत उपवास करने वालों को मंगल आशीवाद प्रदान किया|

और माता जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह जीव अनादिकाल से बंधा हुवा है व्रत आराधना करने वाले श्रावक २-३ भाव धारण करके दीक्षा लेकर मोक्ष को प्राप्त करेंगे|यह गौतम गणधर के वचन है|

पुण्य की उपासना करना पाप का त्याग करना |आप लोग मोक्ष मार्ग प्रशस्त करके त्याग और त्यागियों के प्रति प्रेम करो|सभी के लिए मंगल आशीर्वाद है|