9 नियम खुशी के...

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9 नियम खुशी के...

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याद रखिए दुनिया में रोने वालों का हमेशा कोई साथ नहीं देता। जमाना चलता है तो हंसने वालों के साथ। इसलिए खोजें खुशी का खजाना। यह आपके अंदर ही छिपा होता है...

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि तनावग्रस्त वे लोग होते हैं, जिनकी जिंदगी का कोई लक्ष्य नहीं होता या जो केवल अपने में कमियां देखते रहते हैं। तनावग्रस्त होने वाले लोगों को पता ही नहीं होता कि उनके अंदर भी ढेर सारे गुण मौजूद हैं। कितनी भी विषम परिस्थितियां क्यों न आए, निराश और हताश न हों। याद रखिए रात कितनी भी काली क्यों न हो, सुबह तो होगी ही। जिंदगी को खुशनुमा बनाने के लिए बस छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें।

1. नामुमकिन और नहीं हो सकता जैसे शब्दों को अपने दिमाग से निकाल फेंकिए। ध्यान रखिए कोई भी ऐसी समस्या नहीं जिसका कोई हल न हो। चुनौतियों से घबड़ाने की बजाय उनका हंसकर सामना करना सीखें। मुश्किलों को सकारात्मक तरीके से देखें तो जिंदगी खुशनुमा हो जाएगी।

2. आधी-अधूरी बातों और पूर्वधारणाओं के आधार पर कभी कोई फैसला न लें। न ही इनके आधार पर कोई काम शुरू करें। कुछ भी करने या कहने से पहले सौ बार सोचें। जल्दबाजी में ऐसा कुछ न बोलें, जो बाद में आपके लिए पीड़ादायक बन जाए।

3. अपनी जीवनशैली को जहां तक संभव हो सहज और सादी बनाए रखें। दूसरों की नकल करना या उनके जैसा बनने की कोशिश करना केवल दुख का कारण बनता है। इसलिए आप जैसी हैं, वैसी ही रहें। किसी की देखा-देखी अपने में बदलाव करने की कोशिश न करें।

4. महत्वाकांक्षी होना अच्छी बात है, लेकिन अति महत्वाकांक्षी होना अच्छी बात नहीं है। याद रखिए जब हम अति महत्वाकांक्षी होने की कोशिश करते हैं तो जाने-अनजाने में हमसे ऐसी गलतियां होती हैं, जिनकी भरपाई करना संभव नहीं होता। बाद में पछताना ही पड़ता है।

5. किसी से भी ज्यादा उम्मीद न रखें। कारण, उम्मीदों के पूरा न होने पर तनाव उत्पन्न होता है। व्यर्थ की आशाएं और उम्मीदें तनाव ही देती हैं। हमेशा यह उम्मीद न रखें कि कोई चमत्कार होगा और आपकी जिंदगी की दशा-दिशा बदल जाएगी। यथार्थ में जीना सीखें और अपना नजरिया सकारात्मक रखें।

6. जिस समय न कहना चाहती हैं, न ही कहें। जिस विचार से आप सहमत नहीं हैं, उसके लिए हमेशा हां करना सही नहीं है। दिल और दिमाग के विपरीत काम करने पर आपको केवल निराशा ही हाथ लगेगी।

7. कोई विश्वसनीय रिश्ता आपके जीवन में हमेशा होना चाहिए, जिससे आप अपने दिल की बात शेयर कर सकें । यह कोई भी हो सकता है मसलन आपके माता-पिता, भाई-बहन, ससुराल के लोग, आपकी सहेलियां और आपके मित्र। दिल की बातें दूसरों के साथ शेयर करने से दिल हल्का हो जाता है। ध्यान यह रखें कि वह विश्वसनीय हो अर्थात् उसे अपनी कसौटी पर समय-समय पर परखती रहें।

8. प्रकृति के साथ थोड़ा समय बिताएं। कुछ देर साफ जगह पर नंगे पैर चलें। शुद्ध हवा में गहरी सांस लें। आप चाहें तो अपने लैपटॉप या मोबाइल की स्क्रीन पर कोई अच्छा सा प्राकृतिक दृश्य लगाएं। इस पर जब भी नजर जाएगी, आपको खुशी ही होगी।

9. योग- मेडिटेशन को अपनी जिंदगी का अहम् हिस्सा बनाएं। इस दौरान ऐसे कपड़े पहनें जो आरामदेह हों और उन्हें पहनकर आपको आराम मिले। इससे न केवल आप शारीरिक तौर पर फिट रहेंगी, बल्कि मानसिक रूप से भी आप प्रसन्न रहेंगी।

(डॉ. सुगंधा ओबेराय, सीनियर साइकोलॉजिस्ट)
दैनिक जागरण 24 Nov 2014