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तर्ज - ये शांत छवि तेरी ..........
 
तर्ज - ये शांत छवि तेरी ..........
प्रभु नाम जपने से नवजीवन मिलता है ,
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<poem><center>प्रभु नाम जपने से नवजीवन मिलता है ,
 
तन मन का मुरझाया ,उपवन खिलता है  
 
तन मन का मुरझाया ,उपवन खिलता है  
 
अंतर के कोने में ,एक दीपक जलता है |
 
अंतर के कोने में ,एक दीपक जलता है |

१९:५५, १० मार्च २०१५ का अवतरण

प्रभु नाम जपने से

तर्ज - ये शांत छवि तेरी ..........

<poem>
प्रभु नाम जपने से नवजीवन मिलता है ,

तन मन का मुरझाया ,उपवन खिलता है अंतर के कोने में ,एक दीपक जलता है | प्रभु नाम जपने ..............|| श्री पाल प्रभु गुण गाकर ,हाँ गाकर ... तूफा में भी पार हुए वो सागर | चंदनबाला दर्शन से , दर्शन से .. देखो पल में मुक्त हुई बंधन से | तन मन का मुरझाया ......... अंतर के कोने में ............||१|| हो सर्प अगर विषवाला , विषवाला ... कर दो मन तुम ध्यान बने जयमाला| भव ताप सभी गल जाये , गल जाये ... दर्शन करके संताप सभी मिट जाये | तन मन का मुरझाया ......... अंतर के कोने में ............||२|| प्रभु नाम जपने से नवजीवन मिलता है , तन मन का मुरझाया ,उपवन खिलता है अंतर के कोने में ,एक दीपक जलता है |

प्रभु नाम जपने .............