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श्री शान्तिनाथ भगवान


शान्तिनाथ भगवान का परिचय
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परिचय

इसी जम्बूद्वीप के भरतक्षेत्र में रत्नपुर नाम का नगर है। उस नगर का राजा श्रीषेण था, उसके सिंहनन्दिता और अनिन्दिता नाम की दो रानियाँ थीं। इन दोनों के इन्द्रसेन और उपेन्द्रसेन नाम के दो पुत्र थे। उसी नगर की सत्यभामा नाम की एक ब्राह्मण कन्या अपने पति को दासी पुत्र जानकर उसे त्याग कर राजा के यहाँ अपने धर्म की रक्षा करते हुए रहने लगी थी। किसी एक दिन राजा श्रीषेण ने अपने घर पर हुए आदित्यगति और अरिंजय नाम के दो चारण मुनियों को पड़गाहन कर स्वयं आहारदान दिया और पंचाश्चर्य प्राप्त किये तथा दश प्रकार के कल्पवृक्षों के भोग प्रदान करने वाली उत्तरकुरू भोगभूमि की आयु बाँध ली। दान देकर राजा की दोनों रानियों ने तथा दान की अनुमोदना से सत्यभामा ने भी उसी उत्तम भूमि की आयु बाँध ली। सो ठीक ही है क्योंकि साधुओं के समागम से क्या नहीं होता ?

किसी समय इन्द्रसेन की रानी श्रीकांता के साथ अनन्तमति नाम की एक साधारण स्त्री आई थी उसके साथ उपेन्द्रसेन का स्नेह समागम हो गया। इस निमित्त को लेकर बगीचे में दोनों भाईयों का युद्ध शुरू हो गया। राजा इस युद्ध को रोकने में असमर्थ रहे, साथ ही अत्यन्त प्रिय अपने इन पुत्रों के अन्याय को सहन करने में असमर्थ रहे अत: वे विषपुष्प सूँघ कर मर गये, वही विषपुष्प सूँघ कर दोनों रानियाँ और सत्यभामा भी प्राणरहित हो गर्इं तथा धातकीखंड के पूर्वार्ध भाग में जो उत्तर कुरू प्रदेश है उसमें राजा तथा सिंहनन्दिता दोनों दम्पत्ती हुए और अनिन्दिता नाम की रानी आर्य तथा सत्यभामा उसकी स्त्री हुई, इस प्रकार वे सब वहाँ भोगभूमि के सुखों को भोगते हुए सुख से रहने लगे।

राजा श्रीषेण का जीव भोगभूमि से चयकर सौधर्म स्वर्ग के श्रीप्रभ विमान में श्रीप्रभ नाम का देव हुआ। रानी सिंहनन्दिता का जीव उसी स्वर्ग के श्रीनिलय विमान में विद्युत्प्रभा नाम की देवी हुई। सत्यभामा ब्राह्मणी और अनिन्दिता नाम की रानी के जीव क्रमश: विमलप्रभ विमान में शुक्लप्रभा नाम की देवी और विमलप्रभ नाम के देव हुए।


क्रमशः

बाल विकास भाग 3 पढ़ें


हस्तिनापुर तीर्थ पूजा


हस्तिनापुर तीर्थ पूजा

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स्थापना-गीता छंद

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श्री शांति कुंथू अर जिनेश्वर, जन्म ले पावन किया।
दीक्षा ग्रहण कर तीर्थ यह, मुनिवृन्द मनभावन किया।।
निज ज्ञान ज्योती प्रकट कर, शिवमार्ग को प्रकटित किया।
इस हस्तिनापुर क्षेत्र को, मैं पूजहूँ हर्षित हिया।।

ॐ ह्रीं हस्तिनापुरक्षेत्रे गर्भ-जन्म-तपो-ज्ञान-कल्याणकधारका: श्रीशांति-कुंथु-अरतीर्थंकरा:! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं हस्तिनापुरक्षेत्रे गर्भ-जन्म-तपो-ज्ञान-कल्याणकधारका: श्रीशांति-कुंथु-अरतीर्थंकरा:! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं।
ॐ ह्रीं हस्तिनापुरक्षेत्रे गर्भ-जन्म-तपो-ज्ञान-कल्याणकधारका: श्रीशांति-कुंथु-अरतीर्थंकरा:! अत्र मम सन्निहितो भवत भवत वषट् सन्निधीकरणं।


-चामर छंद-

तीर्थ रूप शुद्ध स्वच्छ सिंधु नीर लाइये।
गर्भवास दु:खनाश तीर्थ को चढ़ाइये।।
हस्तिनागपुर पवित्र तीर्थ अर्चना करूँ।
तीर्थनाथ पाद की सदैव वंदना करूँ।।१।।

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ॐ ह्रीं शांति-कुंथु-अरतीर्थंकर-गर्भ-जन्म-तपो-ज्ञानकल्याणकपवित्र-हस्तिनापुरक्षेत्राय जलं निर्वपामीति स्वाहा।

क्रमशः

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(अगले प्रश्न दिनांक 09-01-2021 शनिवार को पूछे जाएंगे ।)

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📖 -02-01-2021 को चतुर्थ स्वाध्याय संबंधी 📙📙📖 पूछे गए प्रश्न ।👇

📌प्रश्न 1 - सिद्ध भगवान कितने कर्मों से रहित होते हैं?

📌प्रश्न 2 - सिद्ध भगवान कहां निवास करते हैं?

📌प्रश्न 3 – समस्त कर्मों में सबसे बलवान कर्म कौन सा है?

📌प्रश्न 4 -उपयोग कितने प्रकार का होता है?

📌प्रश्न 5 – स्त्री- पुरुष - नपुंसक लिंग में से शुद्ध जीवात्मा के कौन सा लिंग माना जाता है?

इन प्रश्नों के उत्तर हमें वाट्स एप के माध्यम से इस नं. पर भेजे -👇 *8171351392*

उत्तर भेजने की आखिरी तारीख 04-01-2021 है।
पद्मनंदी पंचविंशतिका पढ़ें


'भगवान श्री शांतिनाथ जिनपूजा


भगवान श्री शांतिनाथ जिनपूजा

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अथ स्थापना-गीता छंद

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हे शांतिजिन! तुम शांति के, दाता जगत विख्यात हो।
इस हेतु मुनिगण आपके, पद में नमाते माथ को।।
निज आत्मसुखपीयूष को, आस्वादते वे आप में।
इस हेतु प्रभु आह्वान विधि से, पूजहूँ नत माथ मैं।।१।।

ॐ ह्रीं श्रीशांतिनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं श्रीशांतिनाथजिनेन्द्र! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं।
ॐ ह्रीं श्रीशांतिनाथजिनेन्द्र! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।


अष्टक-गीता छंद

चिरकाल से बहुप्यास लागी, नाथ! अब तक ना बुझी।
इस हेतु जल से तुम चरण युग, जजन की मनसा जगी।।
श्री शांतिनाथ जिनेश शाश्वत, शांति के दाता तुम्हीं।
प्रभु शांति ऐसी दीजिए, हो फिर कभी याञ्चा नहीं।।१।।

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ॐ ह्रीं श्रीशांतिनाथजिनेन्द्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा।

क्रमशः

काव्य कथा


🏳️‍🌈🏳️‍🌈 *सेठ सुदर्शन* 🏳️‍🌈🏳️‍🌈

की काव्य कथा

द्वारा- *परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी*

जरूर सुनें👉🏻 - पारस चैनल के सीधे प्रसारण (प्रात: 6 से 7 बजे) के माध्यम से !!

आज का दिन - १६ जनवरी २०२१ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक १६ जनवरी २०२१
तिथी- पौष शुक्ल ४
दिन- शनिवार
वीर निर्वाण संवत- २५४७
विक्रम संवत- २०७७

सूर्योदय ०७.१३
सूर्यास्त १८.००


अथ पौष मास फल विचार



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०-९ अं
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