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भक्तामर स्तोत्र दीप आराधना



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➡️➡️ *विशेष सूचना*⬅️⬅️

  • धर्मप्रेमी बन्धुवर!*

उपरोक्त 14 दिवसीय *भक्तामर स्तोत्र दीप आराधना* में आप अपनी सुविधानुसार अवश्य सम्मिलित होवें । लगातार 14 दिनों तक 🪔 *48 दीपक*🪔 प्रज्वलित करके आप महान पुण्य का अर्जन कर सकते हैं अथवा किसी विशेष दिन/दिनों में भी आप यह आराधना करने हेतु जूम के माध्यम से हमसे जुड़ सकते हैं ।
अपने नाम, जूम ज्वाॅइन लिंक एवं अपनी कार्यक्रम में भाग लेने की तारीख/ तारीखों के साथ इस ➡️ *7755965418* नंबर पर वाट्सअप 📲करके अपना विवरण शीघ्र भेजें , ताकि आपको जूम के माध्यम से सभी को दिखाया जा सके ।

आप *व्यक्तिगत रूप से/संगठन/संस्था/ग्रुप/मंडल* इत्यादि के सदस्यों के साथ एकत्रित होकर कार्यक्रम में भाग लें ।
बाल विकास भाग 3 पढ़ें


श्री अभिनंदननाथ भगवान


अभिनन्दन भगवान का परिचय
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परिचय

जम्बूद्वीप के पूर्व विदेहक्षेत्र में सीता नदी के दक्षिण तट पर एक मंगलावती देश है उसके रत्नसंचय नगर में महाबल राजा रहता था। किसी दिन विरक्त होकर विमलवाहन गुरू के पास दीक्षा लेकर ग्यारह अंग का पठन करके सोलहकारण भावनाओं का चिन्तवन किया, तीर्थंकर प्रकृति का बंध करके अन्त में समाधिमरणपूर्वक विजय नाम के अनुत्तर विमान में तेतीस सागर आयु वाला अहमिन्द्र देव हो गया।

गर्भ और जन्म

इसी जम्बूद्वीप के भरतक्षेत्र में अयोध्या नगरी के स्वामी इक्ष्वाकुवंशीय काश्यपगोत्रीय ‘स्वयंवर' नाम के राजा थे, उनकी ‘सिद्धार्था' महारानी थी। माता ने वैशाख शुक्ला षष्ठी के दिन उस अहमिन्द्र को गर्भ में धारण किया और माघ शुक्ला द्वादशी के दिन उत्तम पुत्र को उत्पन्न किया। सौधर्म इन्द्र ने देवों सहित मेरू पर्वत पर जन्म महोत्सव मनाया और भगवान का ‘अभिनन्दननाथ' नाम प्रसिद्ध करके वापस माता-पिता को सौंप गये। उनकी आयु पचास लाख पूर्व और ऊँचाई साढ़े तीन सौ धनुष की थी।
क्रमशः

पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन


कुछ नए प्रजेंटेशन्स

सम्यग्ज्ञान पत्रिका


समाचार


🛕 *Jambudweep Zoom channel* 🛕

▶️ *Daliy Schedule🙏-*

7:00AM....Samaysar Swadhyay

2:00PM....Gommatsar Jeevkand

3:30PM....Bh. Parshvanath Katha

6:30.PM...Jinwar Aarti

6:45.PM...HH Gyanmati Mataji Aarti

7:00 PM...Padmanandi Granth Swadhyay

7:30 PM...Basic Knowledge of Jainism

▶️ *zoom पर जुड़ने के लिए लिंक👇-*

*Zoom app link-*

Meeting Id - 87106540812

Password- 123456

घर बैठें करें स्वाध्याय और जीतें पुरस्कार


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  • श्री पद्मनन्दिपंचविंशतिका ग्रन्थ ऑनलाइन स्वाध्याय प्रतियोगिता*
  • दिनांक 02-01-2021 को प्रदत्त स्वाध्याय हेतु मैटर*--

🙏 *श्री पद्मनंदिपंचविंशतिका ग्रंथ*🙏

अध्याय - *यतिभावना एवं सद्बोधचंद्रोदयाधिकार* (पीडीएफ संलग्न है )

  • समय सीमा* > 02-01-2021 शनिवार से 08-01-2021 शुक्रवार तक

(अगले प्रश्न दिनांक 09-01-2021 शनिवार को पूछे जाएंगे ।)

🪁🎤🪁🎤🪁🎤🪁🎤🪁🎤🪁

📖 -02-01-2021 को चतुर्थ स्वाध्याय संबंधी 📙📙📖 पूछे गए प्रश्न ।👇

📌प्रश्न 1 - सिद्ध भगवान कितने कर्मों से रहित होते हैं?

📌प्रश्न 2 - सिद्ध भगवान कहां निवास करते हैं?

📌प्रश्न 3 – समस्त कर्मों में सबसे बलवान कर्म कौन सा है?

📌प्रश्न 4 -उपयोग कितने प्रकार का होता है?

📌प्रश्न 5 – स्त्री- पुरुष - नपुंसक लिंग में से शुद्ध जीवात्मा के कौन सा लिंग माना जाता है?

इन प्रश्नों के उत्तर हमें वाट्स एप के माध्यम से इस नं. पर भेजे -👇 *8171351392*

उत्तर भेजने की आखिरी तारीख 04-01-2021 है।
पद्मनंदी पंचविंशतिका पढ़ें


श्री धर्मनाथ भगवान


धर्मनाथ भगवान का परिचय
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परिचय

पूर्व धातकीखंडद्वीप के पूर्व विदेहक्षेत्र में नदी के दक्षिण तट पर एक वत्स नाम का देश है, उसमें सुसीमा नाम का महानगर है। वहाँ पर राजा दशरथ राज्य करता था। एक बार वैशाख शुक्ला पूर्णिमा के दिन सब लोग उत्सव मना रहे थे उसी समय चन्द्रग्रहण पड़ा देखकर राजा दशरथ का मन भोगों से विरक्त हो गया। उसने दीक्षा लेकर ग्यारह अंगों का अध्ययन किया और तीर्थंकर प्रकृति का बन्ध करके अन्त में सर्वार्थसिद्धि में अहमिन्द्र हो गया।

गर्भ और जन्म

इस जम्बूद्वीप के भरतक्षेत्र में एक रत्नपुर नाम का नगर था उसमें कुरूवंशीय काश्यपगोत्रीय महाविभव सम्पन्न भानु महाराज राज्य करते थे उनकी रानी का नाम सुप्रभा था। रानी सुप्रभा के गर्भ में वह अहमिन्द्र वैशाख शुक्ल त्रयोदशी के दिन अवतीर्ण हुए और माघ शुक्ल त्रयोदशी के दिन रानी ने भगवान को जन्म दिया। इन्द्र ने धर्मतीर्थ प्रवर्तक भगवान को ‘धर्मनाथ' कहकर सम्बोधित किया था।
क्रमशः

भक्तामर स्तोत्र


भक्तामर स्तोत्र-संस्कृत(आचार्य श्री मानतुंग कृत)

भक्तामर-प्रणत-मौलि-मणि-प्रभाणा-

मुद्योतकं दलित-पाप-तमो-वितानम्।
सम्यक्प्रणम्य जिन-पाद-युगं युगादा-
वालम्बनं भव-जले पततां जनानाम् ।।१।।

य: संस्तुत: सकल-वाङ्मय-तत्त्वबोधा-
दुद्भूत-बुद्धि-पटुभि: सुरलोक-नाथै:।
स्तोत्रैर्जगत्त्रितय-चित्त-हरै-रुदारै:,
स्तोष्ये किलाहमपि तं प्रथमं जिनेन्द्रम् ।।२।।

बुद्ध्या विनापि विबुधार्चित-पाद-पीठ,
स्तोतुं समुद्यत-मतिर्विगत-त्रपोऽहम्।
बालं विहाय जल-संस्थित-मिन्दु-बिम्ब-
मन्य: क इच्छति जन: सहसा ग्रहीतुम्।।३।।

वक्तुम गुणान् गुण-समुद्र शशांक-कान्तान्,
कस्ते क्षम: सुर-गुरु-प्रतिमोऽपि बुद्ध्या।
कल्पान्त-काल-पवनोद्धत-नक्र-चक्रम,
को वा तरीतु-मलमम्बुनिधिं भुजाभ्याम्।।४।।

सोऽहं तथापि तव भक्ति-वशान्मुनीश,
कर्तुं स्तवं विगत-शक्ति-रपि प्रवृत्त:।
प्रीत्यात्म-वीर्य-मविचार्य मृगी मृगेन्द्रं,
नाऽभ्येति किम निज-शिशो: परि-पालनार्थम्।।५।।
क्रमशः

आज का दिन - २७ जनवरी २०२१ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक २७ जनवरी २०२१
तिथी- पौष शुक्ल १४
दिन- बुधवार
वीर निर्वाण संवत- २५४७
विक्रम संवत- २०७७

सूर्योदय ०७.१२
सूर्यास्त १८.०७


अथ पौष मास फल विचार

भगवान अभिनन्दननाथ - ज्ञान कल्याणक

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०-९ अं
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