वीर निर्वाण संवत

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वीर निर्वाण संवत् -
आज से २५४५ वर्ष पूर्व जैनधर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने पावापुरी नगरी ( ज़िला- नालंदा,बिहार प्रदेश )में जलमंदिर से समस्त कर्मों को नष्ट करके मोक्षधाम को प्राप्त किया था ।

तब स्वर्ग से इन्द्रों - देवताओं ने आकर दीपमालिका जलाकर उनके निर्वाण महोत्सव की खुशियाँ मनाई थीं ।

तब से ही भारत की धरती पर दीपावली पर्व मनाया जाने लगा । वर्तमान में उन्हीं की स्मृति में वीर निर्वाण संवत् चल रहा है ।यह हमारे देश का सबसे अधिक प्राचीन संवत् माना जाता है ।

जैनधर्मानुयायियों को प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ला एकम को इस वीर निर्वाण संवत् के प्रारंभिक दिवस से अपने बही खाते आदि प्रारंभ करना चाहिए ।

यह वीर निर्वाण संवत् कार्तिक शुक्ला एकम से प्रारंभ होता है ।