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१२:१५, २० जनवरी २०१८ के समय का अवतरण


ॐ मार्गणा ॐ

प्रश्न:1-मार्गणा किसे कहते हैं?

उत्तर- प्रवचन में जिस प्रकार से देखे गये हों, उसी प्रकार से जीवादि पदार्थों का जिन भावों के द्वारा अथवा जिन पर्यायों में विचार-अन्वेषण किया जाय उन्हें मार्गणा कहते हैं । (गो. जी. 141)

जिन धर्मविशेषों से जीवों की खोज हो सके उन धर्मविशेषों से जीवों को खोजना मार्गणा है ।

मार्गणा, गवेषणा और अन्वेषण ये तीनों शब्द एकार्थवाची हैं । सत्-संख्या आदि अनुयोग द्वारों से युक्त-चौदह जीवसमास जिसमें या जिसके द्वारा खोजे जाते हैं उसे मार्गणा कहते हें । ७.)

प्रश्न:2-मार्गणाएँ कितनी होती हैं?

उत्तर- मार्गणाएँ चौदह होती हैं - ( 1) गति (2) इन्द्रिय ( 3) काय (4) योग ( 5) वेद ( 6) कषाय (7) ज्ञान ( 8) सयम (9) दर्शन ( 1०) लेश्या ( 11) भव्यत्व ( 12) सम्बक्ल ( 13) संज्ञी ( 14) आहार ।

प्रश्न:3-संसारी जीवों के कौनसी मार्गणाओं का अभाव भी हो सकता है?

उत्तर- संसारी जीवों के पाँच मार्गणाओं का अभाव भी हो सकता है -

1. योग - 1 वें गुणस्थान में ।

2. वेद - नौवें गुणस्थान के अवेदभाग से 1 वें गुणस्थान तक ।

3. कषाय - ग्यारहवें गुणस्थान से चौदहवें गुणस्थान तक ।

4. लेश्या - चौदहवें गुणस्थान में ।

5. सही - तेरहवें-चौदहवें गुणस्थान में ।

प्रश्न:4-सिद्ध भगवान के कौन- कौनसी मार्गणाएँ होती हैं?

उत्तर-सिद्ध भगवान के चार मार्गणाएँ होती हैं -

1. ज्ञान - केवलज्ञान ।

2. दर्शन - केवलदर्शन ।

3. सभ्यक्ल - क्षायिक सम्बक्च ।

4. आहारक - अनाहारक । विशेष : वैसे सिद्ध भगवान मार्गणातीत होते हैं लेकिन ये चार मार्गणाएँ उपचार से कही गई हैं, क्योंकि सिद्ध भगवान के ज्ञान, दर्शन, सम्बक्ल आदि शुद्ध