09.उत्तम आकिंचन धर्म की प्रश्नोत्तरी

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दशधर्म प्रश्नोत्तरी

उत्तम आकिंचन धर्म

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प्रश्न.१ - आकिंचन्य की क्या परिभाषा है ?

उत्तर - ‘‘न मे किञ्चन अकिञ्चनः अर्थात् मेरा कुछ भी नहीं है इस प्रकार की भावना करना आकिंचन्य धर्म है।

प्रश्न.२ - अकिंचन किनको कहते हैं ?

उत्तर - सम्पूर्ण आरम्भ और परिग्रह से रहित महासाधु ही अकिंचन कहलाते हैं।

प्रश्न.३ - परिग्रह को भार क्यों कहा गया है ?

उत्तर - जिस प्रकार कोई भारी वस्तु नदी में डूब जाती है और हल्की वस्तु पानी के ऊपर तैरती है उसी प्रकार अधिक परिग्रह से सहित मनुष्य संसार समुद्र में डूब जाता है जबकि दिगम्बर महासाधु सब कुछ त्याग करके संसार समुद्र को पार कर लेते हैं।

प्रश्न.४ - आकिंचन्य धर्म की क्या महिमा है ?

उत्तर - इस धर्म के प्रभाव से मनुष्य अमूल्य रत्नत्रय निधि को प्राप्त करके तीन लोक के नाथ बन जाते हैं।

प्रश्न.५ - अकिंचन महासाधु किस प्रकार चिंतवन करते हैं ?

उत्तर - वे इस प्रकार चिन्तन करते हैं कि आत्मा शरीर से भिन्न है, तिलतुषमात्र भी परिग्रह मेरा नहीं है, मेरी आत्मा ज्ञानमयी है, अतीन्द्रिय है, सर्वोत्कृष्ट है, परमात्मस्वरूप है, आदि- आदि .................।