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(सबसे बड़ी दिगम्बर जैन कायोत्सर्ग प्रतिमा)
 
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मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में बावनगजा एक सिद्धक्षेत्र है। यहीं से इन्द्रजीत व कुम्भकर्ण आदि साढ़े पाँच करोड़ मुनि मोक्ष पधारे थे।
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मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में बावनगजा एक सिद्धक्षेत्र है। यहीं से इन्द्रजीत व कुम्भकर्ण आदि साढ़े पाँच करोड़ मुनि मोक्ष पधारे थे।
यह विश्व की सबसे ऊँची भगवान् आदिनाथ की ८४ पुâट की प्रतिमा है।
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यह विश्व की सबसे ऊँची भगवान आदिनाथ की ८४ फुट की प्रतिमा है।
 
प्रतिमा की ऊँचाई ५२ गज होने के कारण ही इसे बावनगजा क्षेत्र कहते हैं।
 
प्रतिमा की ऊँचाई ५२ गज होने के कारण ही इसे बावनगजा क्षेत्र कहते हैं।
यह प्रतिमा १३ वीं शताब्दी से पूर्व की है।
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यह प्रतिमा १३वीं शताब्दी से पूर्व की है।
 
यह प्रतिमा अपने आप में अद्भुत एवं आश्चर्य उत्पन्न करने वाली है।
 
यह प्रतिमा अपने आप में अद्भुत एवं आश्चर्य उत्पन्न करने वाली है।
 
क्षेत्र में ३२ जिनालय हैं, जिनका दर्शन करके प्रत्येक श्रावक को पुण्यार्जन करना चाहिए।
 
क्षेत्र में ३२ जिनालय हैं, जिनका दर्शन करके प्रत्येक श्रावक को पुण्यार्जन करना चाहिए।

२०:३२, ७ दिसम्बर २०१३ के समय का अवतरण


सबसे बड़ी दिगम्बर जैन कायोत्सर्ग प्रतिमा

Scan Pic0015.jpg


मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में बावनगजा एक सिद्धक्षेत्र है। यहीं से इन्द्रजीत व कुम्भकर्ण आदि साढ़े पाँच करोड़ मुनि मोक्ष पधारे थे। यह विश्व की सबसे ऊँची भगवान आदिनाथ की ८४ फुट की प्रतिमा है। प्रतिमा की ऊँचाई ५२ गज होने के कारण ही इसे बावनगजा क्षेत्र कहते हैं। यह प्रतिमा १३वीं शताब्दी से पूर्व की है। यह प्रतिमा अपने आप में अद्भुत एवं आश्चर्य उत्पन्न करने वाली है। क्षेत्र में ३२ जिनालय हैं, जिनका दर्शन करके प्रत्येक श्रावक को पुण्यार्जन करना चाहिए।