"26.शरीराष्टक प्रश्नोत्तरी" के अवतरणों में अंतर

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<font color=blue>'''प्रश्न ५०८—यह शरीर रूपी मकान किन वस्तुओं से बना है ?'''</font color><br />
 
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<font color=blue>'''उत्तर'''</font color>—यह शरीर रूपी मकान दुर्गंध तथा अपवित्र वीर्य आदि धातुरूपी भीतों से बना हुआ है, चाम से ढ़का है, विष्ठा, मूत्र आदि से भरा हुआ है और अत्यन्त क्लिष्ट है।
 
<font color=blue>'''उत्तर'''</font color>—यह शरीर रूपी मकान दुर्गंध तथा अपवित्र वीर्य आदि धातुरूपी भीतों से बना हुआ है, चाम से ढ़का है, विष्ठा, मूत्र आदि से भरा हुआ है और अत्यन्त क्लिष्ट है।

२२:२७, १३ जुलाई २०१७ के समय का अवतरण

शरीराष्टक

प्रश्न ५०८—यह शरीर रूपी मकान किन वस्तुओं से बना है ?
उत्तर—यह शरीर रूपी मकान दुर्गंध तथा अपवित्र वीर्य आदि धातुरूपी भीतों से बना हुआ है, चाम से ढ़का है, विष्ठा, मूत्र आदि से भरा हुआ है और अत्यन्त क्लिष्ट है।

प्रश्न ५०९—शरीर को किसकी उपमा दी गई है ?
उत्तर—मनुष्य का शरीर नाना प्रकार के भयंकर रोगों का घर है।

प्रश्न ५१०—उच्च बुद्धि के धारक मनुष्य, मनुष्य के शरीर को क्या कहते हैं ?
उत्तर—उच्च बुद्धि के धारक मनुष्य, मनुष्य के शरीर को नाडीव्रण (घाव) कहते हैं।

प्रश्न ५११—यह शरीर संसार रूपी नदी को कैसे पार कर सकता है ?
उत्तर—जिस प्रकार कड़वी तूमड़ी उपभोग के योग्य नहीं रहती और यदि वही तूंबी छिद्र रहित, धूप से सूखी और अंतरंग में भारी न हो तो नदी को पार कर सकती है उसी प्रकार यह शरीर तूंबी के समान कडुवा दुख का देने वाला है और यदि यही शरीर मोह तथा खोटे जन्मरूपी छेदों से रहित हो, तप रूपी धूप से सूखा हुआ हो और अंतरंग में अभिमान सहित न हो तो अवश्य ही संसार रूपी नदी को पार करने में समर्थ हो सकता है।

प्रश्न ५१२—शरीर की अवस्था कैसी होती है ?
उत्तर—शरीर में अंत समय में लटें पड़ जाती हैं, अग्नि से भस्म हो जाता है, मछली आदिकों के खाने से विष्टा स्वरूप में परिणत हो जाता है, अनेक प्रकार की रसायन खाने पर भी नष्ट हो जाता है और अनित्य है।

प्रश्न ५१३—वृद्धावस्था को किसी उपमा दी है ?
उत्तर—वृद्धावस्था को काल की आज्ञाकारिणी दासी की उपमा दी है।

प्रश्न ५१४—इसका कार्य क्या है ?

उत्तर—यह वृद्धावस्था सदा उस शरीर को जर्जरित अर्थात् छिन्न — भिन्न करती रहती है।